मध्यप्रदेश के खरीदी केंद्रों में किसानों से हर साल 6 करोड़ की अवैध वसूली, जिला प्रशासन अनजान

किसानों के कमीशन से मालामाल समितियां

By: suresh mishra

Published: 30 Dec 2018, 01:46 PM IST

सतना। किसानों की उपज खरीदकर उन्हें समर्थन मूल्य देने के लिए जिले में खोले गए खरीदी केंद्र अवैध वसूली का अड्डा बन चुके हैं। कहने के लिए खरीदी केंद्रों में किसानों को एक पैसा नहीं देना होता है। यहां ट्रॉली से अनाज उताने से लेकर तौल कराने तक हर सुविधा मुफ्त है। इसका भुगतान प्रदेश सरकार समितियों को करती है। इसके बावजूद खरीदी केंद्रों में व्याप्त तानाशाही के चलते किसानों को धान की क्वॉलिटी पास कराने, अनाज उतारने तथा तौल से कम्प्यूटर में इंट्री कराने तक हर कार्य के लिए कमीशन देना पड़ रहा है।

खरीदी केंद्रों से जुड़े जानकारों का दावा है कि समितियां किसानों से अनाज खरीदी के नाम पर हर साल कमीशन के रूप में 6 करोड़ से अधिक की अवैध वसूली करती हैं। खरीदी केंद्रों में किसान खुलेआम लुट रहा है। उसे समितियों में हर काम का पैसा देना पड़ता है। और प्रशासन है कि सबकुछ जानते हुए भी इससे अनजान बना है।

हर काम के दाम
खरीदी केंद्रों में किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, केंद्र में रात न गुजारनी पड़े, इसके लिए सरकार ने पंजीकृत किसानों के लिए मैसेज व्यवस्था लागू की थी। एक सप्ताह पूर्व किसान के मोबाइल में मैसेज जाता है। उसमें उसका अनाज किस दिन खरीदा जाएगा इसकी जानकारी होती है। लेकिन जिले के एक भी खरीदी केंद्र में मैसेज सिस्टम लागू नहीं है। केंद्रों में हर काम का पैसा फिक्स है। जो किसान उसका पालन करते हैं उनकी धान की तौल हो जाती है जो आनाकानी करते हैं उनको इंतजार कराया जाता है।

जगह न होने का बहाना ...
खरीदी केंद्रों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पहले खरीदी शुरू करने में जानबूझ कर देरी की जाती है। इसके बाद खरीदी प्रारंभ होने पर केंद्र में अनाज डंप कराया जाता है। इसका फायदा उठाते हुए समिति कर्मचारी किसानों से जल्दी धान तौलने के चक्कर में प्रति ट्राली 1500 से दो हजार तक कमीशन ले लेते हैं।

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