फोरम का आदेश : किसान को एक माह के अंदर बीमा कंपनी फसल नुकसान का भुगतान करे

मानसिक व आर्थिक क्षतिपूति राशि देने का आदेश

 

 

By: Vikrant Dubey

Published: 03 Jan 2020, 07:20 PM IST

सतना. किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वाली बीमा कपंनी के लिए यह फैसला बड़ी नसीहत है। किसान को फसल नुकसान के बाद भी भुगतान में देरी को लेकर बीमा कंपनी के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उपभोक्ता फोरम ने जुर्माना लगा दिया। फोरम ने मुकदमे का खर्च के साथ मानसिक व आर्थिक क्षतिपूति राशि भुगतान करने का आदेश दिया है।

मैहर के ग्राम घोरबाई की रहने वाली कृषक ललती बाई पति पुरुषोत्तम पटेल ने उपभोक्ता फोरम में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टेशन रोड मैहर और प्रबंधक एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड क्वालिटी ग्लोवस प्रथम तल आबीआई के सामने नेशनल हाइवे नंबर 12 होशंगाबाद रोड भोपाल के खिलाफ परिवाद दाखिल किया था। उनका आरोप था, खेत में फसल बोने के बाद 15 अगस्त 16 से 19 अगस्त 16 तक अतिवृष्टि और जल भराव के कारण उसकी आराजी नंबर 45/1 खसरा रकवा 2.462 हेक्टेयर में बोई धान, उड़द और मूंग की फसल डूबकर नष्ट हो गई। जिससे परिवादी को दो लाख रुपए की क्षति हुई।

न ममाले का निराकरण न ही दी फसल नुकसानी

जिसकी सूचना उसने एसडीएम को दी। तब तहसीलदार मैहर वृत्त बदेरा द्वारा हल्का पटवारी से आराजी में बोई गई धान की जांच करायी गई। पटवारी ने जांच रिपोर्ट में अतिवृष्टि से 75 प्रतिशत धान की फसल नष्ट होने का प्रतिवेदन दिया। जबकि उसके द्वारा बोई गई धान शतप्रतिशत नष्ट हो गई थी। परिवादी ने 26 सितंबर 16 को फसल बीमा दावा एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड के समक्ष धान की फसल नष्ट होने की क्षतिपूर्ति के लिए प्रस्तुत किया था। लेकिन इंश्योरेंस कंपनी द्वारा न तो फसल नुकसानी की क्षतिपूर्ति राशि दी गई और न ही ममाले का निराकरण किया गया।

परिवाद खर्च व आर्थिक क्षतिपूर्ति देने आदेश

फोरम अध्यक्ष बीएल वर्मा, सदस्य डॉ राकेश मिश्रा व सदस्य सावित्री सिंह ने कृषक ललती बाई पति पुरुषोत्तम पटेल की याचिका स्वीकार करते हुए प्रबंधक एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड क्वालिटी ग्लोवस प्रथम तल आबीआई के सामने नेशनल हाइवे नंबर 12 होशंगाबाद रोड भोपाल को एक माह के अंदर परिवादी को मूंग और उड़द की फसल की नुकसानी कलेक्टर गाइड लाइन के अनुसार भुगतान करने के आदेश दिए। इसके अलावा मानसिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति बतौर पांच हजार रुपए और परिवाद खर्च दो हजार रुपए देने भी आदेशित किया। यह भी आदेश दिए कि निर्धारित समयावधि के अंदर उक्त राशि का परिवादी को भुगतान नहीं करने पर दस प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज देय होगा।

Vikrant Dubey
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