जांच और ड्राप प्वॉइंट तक भेजने में घालमेल

परिवहन, निगम और राजस्व अमले में समन्वय का अभाव

By: Pushpendra pandey

Published: 05 May 2020, 07:42 PM IST

सतना. प्रदेश सरकार ने अन्य जिलों और प्रांतों में फंसे मजदूरों को वापस लाने का क्रम प्रारंभ कर दिया है। इसके तहत काफी संख्या में बसों से मजदूर सतना पहुंच रहे हैं। इसके अलावा भी गुजरात से काफी संख्या में मजदूर निजी वाहनों से किराया देकर सतना पहुंच रहे हैं, लेकिन सतना आने के बाद पूरी व्यवस्था जो कोरोना संक्रमण से सुरक्षा को लेकर तय की गई है उसका कोई पालन नहीं हो रहा है। हालात यह है कि बसों से मजदूर उतार कर अपने से अस्पताल भेज दिए जाते हैं। उसके बाद उन्हें उनके ड्रॉप प्वाइंट तक भेजने की व्यवस्था नहीं है। अभी तक जो देखने में आया है उसके अनुसार ज्यादातर में सिर्फ मैदानी राजस्व अमला ही नजर आ रहा है लेकिन अन्य विभाग जिसमें परिवहन और निगम के लोग नदारद है। ऐसी ही घटना सोमवार की शाम धार से आई बस के दौरान देखी गई।
धार से काफी संख्या में श्रमिक बस से सतना पहुंचे। इस बस में सतना के अलावा रीवा तक के लोग थे। बस वालों ने बस खड़ी कर सभी को उतार कर वापस जाने की तैयारी की। तब यहां पटवारी तो पहुंच गए। यहां सतना वालों को उतार कर पाछे से आ रही एक अन्य बस का इंतजार करने लगे, लेकिन जो मजदूर उतरे उन्हें जिला अस्पताल जाने को कह दिया गया। उनके साथ कोई अमला नहीं गया। जबकि शासन के स्पष्ट नियम है कि बाहर से आने वाले मजदूरों को पहले बार्डर पर उतार कर उनकी स्क्रीनिंग की जाएगी उसके बाद उन्हें ड्राप प्वाइंट तक छोड़ कर होम क्वारंटीन किया जाएगा। लेकिन इस पूरे मामले में जिले में समन्वय का पूरा अभाव दिख रहा है। न तो एक जगह उतार कर उनकी स्क्रीनिंग हो रही है और न ही उन्हें ड्राप प्वाइंट पर भेजने की व्यवस्था है और इसके बाद उनके होम क्वारंटीन या संस्थागत क्वारंटीन की निगरानी का कोई इंतजाम जमीनी स्तर पर नजर आ रहा है।

परिवहन अमला सवालों में
पूरे मामले में परिवहन विभाग को भी जिम्मेदारी दी गई है। मसलन गुजरात से जो बसें या मालवाहक मजदूरों को निजी तौर पर सीधे लेकर आ रहे है और उन्हें शासन द्वारा अनुमति नहीं है और इनके द्वारा मजदूरों से किराया लिया जा रहा है तो यह परमिट नियमों का उल्लंघन है। ऐसे मामलों की जांच के लिये परिवहन विभाग के अमले को जिम्मेदारी है लेकिन यह अमला लगातार फे्रम से ही गायब नजर आ रहा है।

निगम का अमला क्या कर रहा
जब कोटा से बच्चे आए थे तो उनके आने के पहले एक-एक घर की जांच की गई थी। इस काम में निगम का अमला भी लगा था लेकिन उसके बाद से प्रवासी मजदूरों के सतना पहुंचने के मामले में अब यह अमला पूरी तरह से किनारा किए हुए नजर आ रहा है।

पूरे प्लॉनिंग की जरूरत
जानकारों का कहना है अब जब बाहर से काफी संख्या में मजदूर आ रहे हैं तो उनकी सुरक्षित घरों तक वापसी या क्वारंटीन की प्रक्रिया का ठोस प्लान बनाना जरूरी है। मसलन शहर में इन्हें प्रवेश से पहले ही रोक कर सतना के लोगों को उतार कर वहीं उनकी स्क्रीनिंग कर ली जाए। इसके बाद जिन्हें घर भेजना है उनके ड्राप प्वाइंट तय कर घरों तक भिजवाया जाए और यह चेक कराया जाए कि वे होम क्वारंटीन हुए या नहीं या फिर जिन्हें संस्थागत क्वारंटीन होना है उन्हें वहां तक भेजा जाए। इसके लिये बकायदे वाहनों का नियोजित इंतजाम होना चाहिए और इसकी पुख्ता निगरानी व्यवस्था होनी चाहिए।

Pushpendra pandey Desk
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