गायब जंगल की जमीन पर लीज आवंटन के मुद्दे विस में गरमाएंगे

सवालों के जवाब बनाने में अधिकारियों को आ रहा पसीना

 

By: Ramashanka Sharma

Published: 02 Dec 2019, 02:00 AM IST

सतना. अल्प कालिक विधानसभा सत्र को लेकर अब जिले में विधायकों के सवाल पहुंचने शुरू हो गए हैं। विभागों से मिली रही जानकारी के अनुसार इस बार सतना जिले के विधायकों ने फैक्ट्रियों से होने वाले प्रदूषण को फोकस किया है तो जंगल वाली जमीनों पर लीज आवंटन पर भी जवाब चाहे हैं। वहीं किसान ऋण माफी पर भी सरकार को घेरने की कोशिश की गई है। ऐसे में जिले के संबंधित अधिकारियों को इनका जवाब बनाने में काफी पसीना बहाना पड़ रहा है।
फर्जी लोन की चाही गई जानकारी

कृषि विभाग के अफसरों के हाथ पांव किसान कर्ज माफी की जानकारी तैयार करने में फूल रहे हैं। इनसे उत्तर चाहा गया है कि जिले में किन किन समितियों के किस किस स्थान पर कितने फर्जी लोन जारी करने की शिकायतें सामने आई हैं। अधिकारी इसका भी उत्तर तैयार कर रहे हैं कि किन समितियों ने किसानों की जानकारी के बिना उनके नाम से फर्जी लोन दिखा दिया था। मशक्कत इस बात पर हो रही है कि इन शिकायतों पर जिम्मेदारों ने क्या जांच की और क्या कार्रवाई हुई? उल्लेखनीय है कि सतना जिले में आधा सैकड़ा के लगभग किसानों ने उनके नाम से फर्जी ऋण लिये जाने की शिकायत की थी। जिसमें कारीगोही से लेकर अमरपाटन, रघुराजनगर, नागौद और मैहर की कई समितियों के किसान शामिल थे। कई किसान तो बकायदे जन सुनवाई में शिकायत लेकर आए थे तो अमरपाटन तहसील मे तत्कालीन एसडीएम आशीष सांगवान ने ऐसा ही मामला पकड़ कर संबंधित संस्थाओं को जांच के लिये प्रकरण सौंपा था।
लीज की उपयोगिता नहीं और हो रहा खेल

मैहर में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें जिस प्रयोजन के लिये लीज की जमीन ली गई थी वह प्रयोजन नहीं होने पर अब उन जमीनों को खुर्द बुर्द किया जा रहा है। मैहर कस्बे में ही चूना उद्योग के लिये रेलवे स्टेशन के पास ही शासकीय भूमि पर लीज आवंटित की गई थी। लेकिन अब यहां चूना भट्ठा का संचालन पूरी तरह से बंद हो चुका है साथ ही यहा लीज का प्रयोजन और लक्षित उद्देश्य पूरा हो रहा है। ऐसे में इन जमीनों को खुर्द बुर्द करने की तैयारी व्यापक पैमाने पर चल रही है। ऐसे ही मामले से जुड़े सवाल का जवाब अधिकारी तैयार कर रहे हैं। जिसमें यह पूछा गया है कि इनकी लीज कब समाप्त की जा सकेगी ताकि इन बेशकीमती जमीनों को अन्य महत्वपूर्ण शासकीय प्रयोजन के लिये किया जा सके।
विकास में बाधक अतिक्रमण

शहर में सरकारी जमीनें काफी हैं लेकिन इन पर अतिक्रमण होने के कारण उपयोगिता नहीं हो पा रही है। वहीं राजस्व अमले की अनदेखी से कई जमीनों पर केस भी न्यायालय में चल रहे हैं। यहां की आबादी, गौचर, तालाब के लिये सुरक्षित जमीनों पर भी अवैध कब्जा कर लिया गया है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण मेडिकल कालेज की जमीन सहित इसी से लगी न्यायाधिकारियों के लिए आवंटित जमीन हैं। यहां पूरी बस्ती खड़ी कर दी गई है। ऐसे में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण बड़ी समस्या के रूप में सामने आया है। वहीं काफी संख्या में पात्र ऐसे परिवार है जो पट्टा प्राप्त करने के हकदार है। लेकिन उन्हें पट्टे नहीं मिल पा रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर भी जवाब चाहे गए हैं। अधिकारी इसका जवाब तलाश रहे हैं कि घूरडांग, नई बस्ती, टिकुरिया टोला, महदेवा सहित अन्य स्थानों पर कब जांच कर कैम्प लगाकर पट्टा वितरण किया जा सकेगा? भले ही हाल में कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने प्रशासनिक अधिकारियों को यह चुनौती दी है कि नई बस्ती का अतिक्रमण हटाने तक अन्य अतिक्रमण नहीं हटाए जाएं लेकिन उन्ही की पार्टी के विधायक ने यह जवाब चाहा है कि आबादी, तालाब, गौचरण सहित अन्य शासकीय भूमियों का कितना रकबा अतिक्रमण में है और इन पर क्या कार्रवाई की जा रही है?
रखौधा की लीज पर घेरने की कोशिश

जिले में व्यापक पैमाने पर सरकारी भूमि बिना उपयोग के पड़ी हुई है। कुछ जमीनें तो ऐसी है जिनका उल्लेख लैण्ड बैंक में भी नहीं है। इस पर भी सवाल खड़ा किया गया है कि कितनी अनुपयोगी जमीन पड़ी है इस पर प्रशासन क्या कार्रवाई कर रहा है? सबसे बड़ा मामला रखौंधा जंगल का है। राजस्व दस्तावेजों में वर्ष 2000 तक रखौंधा का बड़ा भू-भाग राजस्व रिकार्ड में जंगल दर्ज था। जंगल पहाड़ पर खनन कारोबारियों ने पहले तो अवैध खनन का खेल शुरू किया लेकिन अब यहां पर लीज आवंटित की जाने लगी है। इन्ही लीजों पर सवाल खड़े किये गये हैं और अधिकारी इसका जवाब तैयार कर रहे हैं। जवाब इस बात का तैयार किया जा रहा है कि जंगल पहाड़ में कैसे लीज आवंटित की गई और क्या इस लीज को निरस्त किया जाएगा या नहीं? इस मामले में पहले ही कई सवाल गाहे बगाहे उठते रहे हैं और अनियमितता के आरोप भी जिम्मेदारों पर लगाए गए हैं।
सीएम मॉनिट में लापरवाही

जिले की लाल फीताशाही का आलम यह है कि शासन स्तर से आने वाले मामलों में भी कार्रवाई को गंभीरता से नहीं लिया जाता है। ऐसे ही एक मामले में रघुराजनगर के अधिकारियों और राजस्व अमले को घेरने की कोशिस की गई है जिससे उनके चेहरे पर परेशानी नजर आ रही है। सीएम मॉनिट के एक प्रकरण में तहसीलदार से लेकर मैदानी राजस्व अमले द्वारा की गई लापरवाही पर अब अधिकारियों को जवाब तैयार करना पड़ रहा है।
तालाब की जमीनों पर कूट रचना

शहर सहित जिले में कई तालाबों को सुनियोजित तरीके से खत्म करने का खेल किया जा रहा है। मैहर और सतना में इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के भी निर्देश है कि किसी जलाशय के स्वरूप को नहीं बदला जा सकता है। लेकिन यहां अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसा किया जा रहा है। ऐसे ही मामले में यह जवाब चाहा गया है कि तालाब की कितनी जमीन में किसी भी प्रकार के निर्माण के मामले सामने आए हैं? कितनी जमीन पर अतिक्रमण किया गया है और क्या कार्रवाई की गई है?
फैक्ट्रियों के प्रदूषण पर गंभीर

जिले में स्थापित फैक्ट्रियों की वजह से व्यापक प्रदूषण फैल रहा है। तो कुछ फैक्ट्रियां है जो अपना दूषित जल नदियों में मिला रही है। कई फैक्ट्रियां अपने सीएसआर मद का सही उपयोग नहीं कर रही है। इन सब मामलों को लेकर कई सवाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित राजस्व अमले से दागे गए हैं जिनके जवाब तैयार करने में अधिकारियों को काफी सोचना पड़ रहा है।

Ramashanka Sharma
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned