सोहावल में नामी ज्वेलर्स सहित भू-माफियाओं की कई जमीनें सरकारी घोषित

शहर से लगी 20 करोड़ की बेशकीमती जमीनें हुई म.प्र. शासन की

सोहावल जनपद कार्यालय के पहले सड़के के दोनों और मौजूद हैं ये आराजियां

भारतमाला प्रोजेक्ट को देखते हुए कुछ लोगों ने मुआवजे की लालच में करवा लिये थे कई छोटे-छोटे हिस्से

By: Ramashanka Sharma

Published: 01 Aug 2020, 10:27 AM IST

सतना. इन दिनों सरकारी जमीनों को फर्जीवाड़ा कर निजी कराने वालों पर शामत आई हुई है। लगातार जमीनें या तो सरकारी हो रही हैं या फिर ऐसे फर्जीवाड़े में शामिल जमीनों को वापस सरकारी करने नोटिसें जारी की जा रही हैं। नगर निगम से लगी मझबोगवां की 12 एकड़ के लगभग की आराजी को कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी अजय कटेसरिया ने शासकीय घोषित कर दिया। आज की स्थिति में इन जमीनों का बाजार मूल्य 20 करोड़ से ज्यादा बताया जा रहा है। सोहावल जनपद कार्यालय के पास सड़क के दोनों ओर मौजूद हैं ये बेशकीमती जमीनें।

सतना नगर निगम से लगी बेशकीमती सरकारी जमीनों को 70 से 80 के दशक में राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी तरीके से निजी करवा लिया गया था। इसमें से कई जमीनें तो ऐसी थी कि जो सीलिंग एक्ट के तहत जागीर उन्मूलन की आराजी थी जो शासकीय घोषित कर दी गई थीं। बाद में इन जमीनों को सोहावल निवासी कुछ महापात्रों ने तहसीलदार की मिलीभगत करके अपने नाम करवा लिया। जबकि सीलिंग की जमीन को मुक्त करने का अधिकार तहसीलदार को कभी था ही नहीं। इस मामले की शिकायत उच्च स्तर पर की गई। जिससे शासन स्तर से जांच के निर्देश आते रहे लेकिन मामला ठंडे बस्ते में ही पड़ा रहा। इधर कलेक्टर कटेसरिया ने मामले की जांच का जिम्मा एसडीएम रघुराजनगर पीएस त्रिपाठी को दिया।

बदले गये नायब तहसीलदार

सीएम मॉनिट में पहुंच चुके इस प्रकरण में तत्कालीन अधिकारी गंभीरता नहीं बरत रहे थे। साथ ही मामलों में लटकाने की शिकायतें भी काफी आ रही थीं। इसको लेकर कलेक्टर ने यहां के नायब तहसीलदार को भी बदला। इसके बाद काम में गति आई। जिसके बाद तहसीलदार ने यहां का प्रतिवेदन एसडीएम को दिया। परीक्षण उपरांत एसडीएम ने यह जमीनें शासकीय करने की अनुशंसा के साथ नस्ती कलेक्टर के पास भेजी। जिस पर कलेक्टर ने सभी तथ्यों का अवलोकन करने के बाद लगभग 12 एकड़ निजी आराजी शासकीय घोषित कर दी। इन जमीनों के शासकीय होते ही यहां हड़कम्प मच गया है।

कर दिये गए कई बटांक

बताया गया है कि यहां की कई आराजियां भारत माला प्रोजेक्ट के तहत अयोध्या से मैहर बाया चित्रकूट प्रस्तावित नेशनल हाइवे की जद में आ रही थीं। ऐसे में यहां के भू-स्वामियों ने ज्यादा मुआवजे की लालच में अपनी जमीनों के कई बटांक भी करा लिये थे। हालांकि बाद में इस प्रोजेक्ट के भू-अर्जन मामले को नेशनल हाइवे अथारिटी ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

ये जमीनें हुई सरकारी

सोहावल जनपद कार्यालय के पहले सड़क के दोनों और पटवारी हल्का मझबोगवां की आराजी नंबर 27/2 रकवा 2.53 एकड़ सरकारी घोषित की गई। अभी यह जमीन गौरीशंकर अग्रवाल, रविशंकर अग्रवाल, सरिता अग्रवाल, मयूर गोयनका, सोनल, गौरी, उमाशंकर और ऋतु के नाम थीं। इसी तरह से आराजी नंबर 48 रकवा 1.87 एकड़ भी सरकारी घोषित कर दिया गया है। यह रकवा मुकेश जगदम्बा प्रसाद खरे, कमर सिद्दीकी और हलीबुद्दीन सिद्दीकी के नाम पर था। इसी तरह से आराजी नंबर 41 का अंशभाग जिसका रकवा 22 डिसमिल था, यह भी सरकारी घोषित कर दिया गया। यह आराजी शांति सिंह पति धीरेन्द्र सिंह व अनिल त्रिपाठी के नाम थी। यहां सबसे बड़ी आराजी जो अभी सरकारी घोषित की गई है वह है आराजी नंबर 45 जिसका रकवा 6.93 एकड़ रहा। इस आराजी के कई बटांक हुए हैं। यह जमीन सरकारी होने से पहले जिनके नाम रही उनमें लक्ष्मीचंद मंघानी रायपुर, गीता मानेन्द्र तिवारी, बविता शुक्ला अशोक शुक्ला, प्रभा सुशील कुमार मुख्तियारगंज, महेश कुमार इंदरलाल छुट्टानी सिंधीकैम्प, मनोज कुमार परमानंद दुल्हानी जयस्तंभ चौक, दयाराम आनंदराम नामदेव संग्राम कालोनी, लक्ष्मीचंद भरोचंद मंघानी, रानी संपतलाल अग्रवाल, राकेश नर्मदा अग्रवाल, वृजेश कुमार सतीश उरमलिया प्रभातविहार, शांति धीरेन्द्र सिंह कुर्मवंशी सतरी, मो. असलम अयूब, सुशील करुणाशंकर प्रेमबिहार, श्रीराम रामगोपाल चांदनी टॉकीज, सचिव देव सुरेन्द्र शर्मा नई बस्ती, गोविन्द चंद्रिका दुबे चकबंदी, संतोष कुमार केदार गुप्ता नई बस्ती, कौशल सुल्ताना जमील नजीराबाद, ममता गोविन्द प्रसाद दुबे चकबंदी, शिवकरण शंकर चौधरी बांधी, लल्लू सौखीलाल सेन बांधी, वीणा सुरेश कुमार श्रीवास्तव राजेन्द्र नगर, आजाद एस श्रीवास्तव, सूर्यभान, रंगलाल श्रीवास्तव मुंबई, मो. असलम इस्लाम, अरसद, आवेदन, असलम, शरीफ इदरीश नजीराबाद, असलम अयूब नजीराबाद, देवराज रामलखन चौधरी राजेन्द्र नगर, निसार सहादर रहमान नजीराबाद, शशिदेवी रामबिहारी पाठक सोहावल, सुधा सिंह जितेन्द्र सिंह चंदेल धवारी, पंकज नितिन उमाशंकर श्रीवास्तव इलाहाबाद, नीतू महेश श्रीवास्तव इलाहाबाद, पूनम आनंद श्रीवास्तव खूंथी, अनिल रामदेव साहू कृष्णनगर शामिल हैं।

जागीरदारी उन्मूलन की जमीन भी हुई सरकारी

मझबोगवां की आराजी नंबर 19 रकवा 65 डिसमिल को भी सरकारी घोषित कर दिया गया है। बताया गया है कि जागीरदार उन्मूलन की इस आराजी को 1967-68 में तहसीलदार ने सरकारी किया लेकिन इस आदेश का पालन नहीं हुआ। फिर 1985-86 में भी आदेश हुआ जिसका भी पालन नहीं हुआ। 2003-04 में फिर तहसीलदार ने आदेश किया जिसका पालन कर इत्तलाबी कर दी गई। जांच में पाया गया कि तहसीलदार को जागीर उन्मूलन की जमीन मुक्त करने का अधिकार ही नहीं था। लिहाजा इन जमीनों को शासकीय कर दिया गया। शासकीय की गई जमीनों से रामसेवक, रामकली, रामनारायण, सूरज, रामनिवास रामभद्राचार्य को बड़ा झटका लगा है।

Ramashanka Sharma Reporting
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