65 साल की सास और 45 की बहु ने सीखा कखग

65 साल की सास और 45 की बहु ने सीखा कखग
Literacy Day Special

Jyoti Gupta | Updated: 13 Sep 2019, 05:53:24 PM (IST) Satna, Satna, Madhya Pradesh, India

साक्षरता दिवस विशेष : अब हस्ताक्षर भी कर लेती है और चिठ्ठी भी लिख लेती हैं

सतना. जो लोग शिक्षित नहीं होते हैं, वे ही इसका दर्द समझते हैं। जब भी कोई शिक्षित व्यक्ति उनके पास बैठता है तो वे हमेशा इस बात का अफसोस जताती है। कहते हैं काश हमने भी पढ़ लिया होता तो शायद अंगूठा नहीं लगाना पड़ता न ही अंगूठा छाप कहलाते। कई बार जब एेसे लोगों को पढऩे की बात कही जाती हैं तो वे हंस कर बोलते हैं अब बच्चों की उम्र है पढऩे की बुढ़ापे में अब हम क्या करेंगे पढ़ लिख कर। फिर भी जिले में कई एेसी ग्राम पंचायते हैं जहां के लोगों ने प्रौढ़ शिक्षा ली और कखग सीख कर पढऩे लिखने लग गए। प्रौढ़ शिक्षा विभाग से मिले आंकड़ो पर नजर डाले तो विगत पांच वर्षों में एक लाख बीच हजार लोगों ने प्रौढ़ शिक्षा ग्रहण की। पांच साल पहले 852 ग्राम पंचायतों से एक लाख 12 हजार लोगों को चिन्हित किया गया। वहीं अभी 72 हजार लोगों को शिक्षित होना बाकी है। फिलहाल आज हम एेसी सास और बहु की जानकारी देने जा रहे हैं जिन्होंने एक साथ पढऩा शुरू किया और अब हस्ताक्षर और चि_ी भी लिखने की कोशिश करती हैं।

बेटे बने सक्षरता के हमराही

ग्राम पंचायत गौरैया के क्षेत्र में आने वाला गांव गढ़वा निवासी 65 वर्षीय सास चंद्रवती सिंह और 45 वर्षीय बहु रामलली सिंह ने बताया कि वे साक्षर नहीं थी, लेकिन उनके मन में इस बात की ललक थी कि काश वो कभी पढ़ पाती। रामकली के दो बेटे और एक बेटी की शादी हो गई और वे जीविकोपर्जन के लिए बाहर रहने लगे। एेसे में दोनों को अपने बेटो से बात करने में काफी दिक्कत होती थी। न तो वे मोबाइल चला सकती थी और न ही लेटर लिख सकती। यहां तक उन्हें जोड़, घटना भी नहीं आता और हस्ताक्षर भी नहीं बनता। दो साल पहले जब उन्हे प्रौढ़ शिक्षा योजना के तहत पढऩे का मौका मिला तो वे बिना समय गवाएं इसके लिए तैयार हो गई। फिर क्या एक साल तक सास बहु ने जमकर पढ़ाई की। कखगघ, व्यंजन, मात्राएं, गिनती, जोड़ घटाना सीखने में छह माह गुजर गए। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई। सातवे माह में दोनों ने हस्ताक्षर करना शुरू कर दिया। आठवे माह में मोबाइल चलाना सीख लिया और अब दोनों ही चि_ी लिखने का प्रयास शुरू कर चूकी हैं। रामलली ने बताया पिछले ही माह उन्होंने अपने बेटे को चिट्टी लिखकर भेजी। हालाकि वे बहुत शुद्ध नहीं लिखी थी पर बेटो को बहुत अच्छा लगा। वे चाहते हैं कि हम दोनों अभी शिक्षा जारी रखें और भी साक्षर बनें।

फूलमती ने पांच साल में तीन सौ लोगों को किया साक्षर

ग्राम पंचायत गजगवां निवासी फूलमती सिंह को आज से पांच साल पहले प्रेरक के लिए चुना गया। इसके बाद उन्होंने अपने ही ग्राम पंचायत के चिन्हित तीन सौ लोगों को साक्षर बनाने की कोशिश की। वे कहती हैं सौ युवा, बुजुर्ग, महिलाएं आज बहुत ही अच्छे से पढऩा लिखना सीख गए हैं। पर आज भी दो सौ को पढ़ाने का सिलसिला जारी है। वे कहती हैं जब उन्होंने इसकी शुरूआत की तो लगा कहां फंस गई। बाद में उन्हें यह काम अच्छा लगने लगा। इन लोगों को पढ़ाने के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ी । चूंकी मैंने इन्हे पढ़ाने की ठान ली थी इस वजह से पीछे नहीं हटी। उनके खेतो में जाकर पढ़ाया। पेड़ों की छाव में पढ़ाया। चौपाल लगाकर कर पढ़ाया तब जाकर मेहनत रंग लाई। अब इस काम में मजा आने लगा है जैसे जैसे मौका मिलेगा मैं लोगों को साक्षर बनाने के लिए आगे आऊंगी।

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