Mudda kya Hai: 25 लाख की आबादी वाले जिले में 400 बेड का अस्पताल, नेता बताएं कहां मिले इलाज

'मुद्दा क्या है'... विराट नगर के युवा बोले- स्वास्थ्य सेवाएं चौपट, निजी अस्पतालों की मौज

By: suresh mishra

Published: 29 Mar 2019, 01:53 PM IST

सतना। लोकसभा चुनाव में इस बार स्वास्थ्य और शिक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। 25 लाख की आबादी वाले जिले में 400 बेड वाला जिला अस्पताल है। यहां के नेता बताएं कि आम जनता को इलाज कहां मिले। नेता और अफसर के साथ घटना दुर्घटना हुई तो इलाज कराने एयर एम्बुलेंस मंगाकर दिल्ली और विदेश चले जाते हैं पर आम जनता को यहीं मरना पड़ता है।

शहर में सभी सेवाओं का विस्तार हुआ है पर स्वास्थ्य और शिक्षा का कोई विस्तार नहीं हुआ। कहने को तो मेडिकल कॉलेज की स्वीकृत मिल गई है पर एक ईंट तक नहीं रखी गई। 100-200 ओपीडी वाले जिला अस्पताल में रोजाना 1400 से 1500 मरीज आते है।

डॉक्टरों की पर्याप्त व्यवस्था न होने से आधे मरीज घर लौट जाते हैं। इसी तरह शिक्षा क्षेत्र का हाल है। न यहां सरकारी स्कूलों की संख्या बढ़ी न कॉलेजों की। ऊपर से कई कालेजों की मान्यता ही खत्म कर दी गई। यहां के सांसद-विधायक बताएं कि आखिर जनता-जनार्दन जाए तो कहां जाए। कुछ ऐसी बात 'मुद्दा क्या है' कार्यक्रम में विराट नगर के युवाओं ने कही।

प्राइवेट अस्पतालों पर जिला प्रशासन की लगाम नहीं है। जेनेरिक मेडिसिन के दावे हवा हवाई हैं। अन्य राज्यों पर अमल हुआ पर मध्यप्रदेश में नहीं हुआ है। यहां इलाज दिल्ली-मुंबई से भी महंगा है।
आदित्य मिश्रा

शहर का जो विकास रुका है, उसके लिए नेता-अफसरों के साथ हम लोग भी जिम्मेदार हैं। 15 लाख 63 हजार मतदाता वाले जिले में महज 5 से 10 हजार कर्मचारी भारी पड़ जाते है। हक के लिए लडऩा होगा।
राहुल सिंह बघेल

शहर में धूल-डस्ट के लिए अफसर जिम्मेदार हैं। इनके पास कोई प्लान नहीं। 20 साल पहले का सोचकर प्लान बनाना चाहिए। यहां उल्टा होता है। उसी सड़क को बनाते हैं फिर खोदते है।
मनोज प्रजापति

किसानों की ऋणमाफी एक मजाक है। कोई भी सरकार किसान हितैषी नहीं हो सकती है। सब किसानों के जख्मों पर मरहम की जगह जख्म दे देते हैं। अभी तक एक रुपए का कर्जा माफ नहीं हुआ है।
राममूर्ति

शहर में बच्चों को पढ़ाने के लिए कोई स्कूल नहीं है। व्यंकट क्रमांक-1 और 2 हैं जो 30 से 40 वर्ष पहले जिले को मिले थे। जनसंख्या में वृद्धि हुई लेकिन स्कूली की नहीं हुई। इसलिए निजी स्कूल सालाना 50 हजार से 1 लाख फीस लेते हैं।
आशीष शुक्ला

मोदी सरकार विकास के दावे कर रही है। राहुल गांधी लगातार कई मुद्दों पर विरोध जता रहे हैं। लेकिन हमको अपने शहर के विकास से मतलब है। यहां बेरोजगारी भुखमरी सबसे बड़ी समस्या है।
राजू पाण्डेय

शहर विकास के लिए नेताओं के साथ-साथ बड़े लोग जिम्मेदार हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बात आती है तो कोई तैयार ही नहीं होता है। सेवा भावना किसी के अंदर बची ही नहीं है। सब दिखावटीपन करते है।
मनोज पाण्डेय

निजी चिकित्सक एक दिन में 30 से 50 हजार रुपए कमा रहे। शहर में पूरी स्वास्थ्य सेवाएं चौपट है। किसी भी डॉक्टर के अंदर सेवा भावना नहीं है। सबकी संवेदनाएं मर चुकी है।
सत्यनारायण सिंह

suresh mishra
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