Satna Live: कोई सरकार से खुश तो कोई दिखा नाराज, सतना में अमौंधा से सेमरिया चौक तक लाइव कवरेज

महिलाओं की जुबान पर रसोई गैस के बढ़ते दाम और महंगाई, युवाओं ने रोजगार का उठाया मुद्दा, व्यापारी भी असंतुष्ट

By: suresh mishra

Published: 15 Nov 2018, 06:27 PM IST

सुरेश मिश्रा/सजल गुप्ता@सतना। लोगों की नब्ज को पकडऩे और जनता क्या चाहती है प्रदेश की नई सरकार से? बीते पांच साल में जनता सरकार से कितना संतुष्ट है? इसको लेकर पत्रिका की ओर से चौक से चौक अभियान की शुरुआत की गई। पहले दिन हम सतना शहर के पन्ना रोड से एंट्री पाइंट अमौंधा गांव सेंट माइकल स्कूल कॉर्नर से रीवा रोड स्थित सेमरिया चौराहा तक गए। यहां आठ जगहों पर हर वर्ग के मतदाताओं से बातचीत की। हर वर्ग का अलग-अलग मुद्दा सामने आया। महिलाएं रसोई गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमत से परेशान दिखी तो युवा बेरोजगारी की मार से थका-हारा नजर आया।

नोटबंदी और जीएसटी के मार से प्रभावित व्यापारी असंतुष्ट दिखे। गांव से शहर आए किसानों ने भावान्तर, सिंचाई के पानी, फसल बीमा और आवारा मवेशी की समस्या का रोना रोया। जर्जर सड़कों से गुजरने वाला आमजन यहां के बेतरतीब विकास से असंतुष्ट नजर आया। बुजुर्ग पेंशन सहित अन्य समस्याओं से परेशान दिखाई दिए।

सेंट माइकल स्कूल अमौंधा 100 मीटर चलने पर
ऑटो के इंतजार में बैठी नीलू अहिरवार ने बताया, महिलाओं को सरकारी कार्यालयों में ज्यादा परेशानी होती है। साधारण महिला की अधिकारी सुनते नहीं। बेटे का आज तक आधार कार्ड नहीं बना। 10 बार चक्कर काट चुके। बगल में बैठी राजकली ने कहा कि रसोई गैस के दाम आसमान पहुंच गए। कुछ दिन और इसी तरह रहा तो फिर महिलाओं को चूल्हा फूंकना पड़ेगा।

मारुति शोरूम 500 मीटर चलने पर
गाड़ी की सर्विस के बाद इंतजार कर रहे मौसमी दाहिया ने कहा, पेट्रोल की कीमतों में लगाम लगना चाहिए। आए दिन पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सोच समझ कर वाहनों की सवारी करनी पड़ रही है। सरकारें वादे तो बड़े-बड़े करती है पर वे कागजों तक सीमित रह जाते है। जमीनी स्तर पर काम नहीं हो रहा है। सरकार किसी की बने पर महंगाई पर ध्यान देना चाहिए।

सुमित बाजार 100 मी चलने पर
फॉर्मेसी के छात्र पवन कुशवाहा साइकिल से चलते-चलते बोले कि प्रदेश को युवा मुख्यमंत्री चाहिए। जो युवाओं की बात सुने। उनके भविष्य की चिंता करे। मां-बाप खेती कर बच्चों को बड़ी उम्मीद से पढ़ाते हैं कि कल बेटा बुढ़ापे का सहारा बनेगा। अब सरकार कहीं रोजगार तो दे नहीं रही। बाहर के शहरों में रोजगार के लिए जाना पड़ता है।

हैलमेट तिराहा 1.5 किमी चलने पर
मेडिकल स्टोर दवाई लेने आए प्रताप सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां तो सही हैं पर राज्य सरकार उसका पालन नहीं कर पाती है। 2013 चुनाव के बाद राज्य सरकार ने कुछ खास नहीं किया। सड़क, बिजली, पानी की समस्या बरकरार है। पुलिस को ही देखिए चौराहों पर हेलमेट की चेकिंग की जाती है पर कार्रवाई सिर्फ गरीबों पर होती है।

होटल भरहुत 150 मी चलने पर
एक दुकान के बाहर तीन-चार फुटपाथ पर रोजगार चलाने वाले व्यापारी बैठे थे। सरकार के कामकाज का सवाल किया तो राजू प्रसाद सोनी, रज्जब खान, दीपक गुप्ता भड़क गए। बोले सरकार ने हमें कहीं का नहीं छोड़ा। सैकड़ों को हटा दिया गया। जहां मंडी बनाई वहां अब ग्राहक उतनेे नहीं पहुंचते। बेटियां जवान बैठी हंै। अब उनकी शादी कैसे करें, एक रोजगार था जो छीन लिया है।

सर्किट हाउस चौक 600 मी चलने पर
गया द्विवेदी बस का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा, १५ साल से सत्ता में काबिज सरकार से ऊब चुके हैं। हिमाचल, राजस्थान की जनता हर पांच साल में नई सरकार बनाती है। इसलिए वहां का विकास दिखता है। यहां जमीनी स्तर पर ५० प्रतिशत कार्य भी नहीं हो पाया है। जब तक कोई अधिकारी इस शहर को पहचानता है, तब तक उसका ट्रांसफर कर दिया जाता है।

तिब्बती बाजार 100 मी चलने पर
ठंंड के के कपड़े खरीदने पहुंचे रिटायर्ड लोको पायलट रामसरोवर गौतम ने बताया कि प्रदेश सरकार का कोई विजन प्लान नहीं। सरकार पेंशनर्स के लिए कुछ खास नहीं कर रही है। प्रदेश के मुकाबले छत्तीसगढ़ का सिस्टम सही है। यहां तो कई ऐसे पेंशनर्स है जिनको अभी तक सातवें वेतनमान का लाभ ही नहीं मिला। एक साल से फाइल संबंधित विभाग से टेजरी में ही घूम रही है। अफसरशाही हावी है।

समरिया चौराहा 1.50 किमी चलने पर
ऑटो चालक अजीत प्रजापति ने कहा कि सरकार किसी की भी हो, लेकिन अच्छा कार्य करे। जब हम किसी अधिकारी के पास काम करवाने जाते है तो 10 बार चक्कर काटना पड़ता है। हम लोगों के सामने कोई भी रसूखदार पहुंचता है तो वही काम तुरंत हो जाता है। शहर का ट्रैफिक सिस्टम बहुत ही लचर है। दिल्ली से ज्यादा सेमरिया चौराहे पर प्रदूषण है। विजन प्लान नहीं है। हर जगह धूल-धुआं ही रहता है।

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