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सतना

जब लाश ने पुलिस को बताया कैसे हुई हत्या

‘ रेगर मार्क ‘ से पता चला हत्या करके टांगी गई है लाश

सतनाJun 20, 2024 / 12:10 pm

Ramashankar Sharma

सतना। जंगल के पेड़ में लटकी हुई लाश ने अपनी हत्या की जानकारी पुलिस को दी। लाश के खुलासे के बाद पुलिस ने जब चिकित्सकों की मदद ली तो कहानी और स्पष्ट हुई। इसके बाद पुलिस के हाथ पर हत्या आरोपी की गर्दन थी। पुलिस ने जब इस पर दबाव बढाया तो रटंट तोते की तरह आरोपी ने न केवल अपना गुनाह कबूल लिया बल्कि हत्या कैसे की इसकी पूरी कहानी भी सुनाई।
बेटे ने दी पिता के लापता होने की सूचना

16 जून की देर शाम बरौंधा थाना पुलिस की मुश्किल बढ़ने जा रही थी। लगभग 7 बजे पुलिस के पास पहुंचे शख्स ने अपना नाम दयाराम निवासी केल्हौरा बताते हुए जानकारी दी कि उसके पिता रामसजीवन यादव गायब हैं। उनका कहीं पता नहीं चल रहा है। वे वन विभाग में दिहाड़ी कर्मचारी हैं और चौकीदार का काम करते हैं। उनके साथी मंजू सिंह शाम 5 बजे पिता की मोटर साइकिल टूटी हालत में घर पहुंचा गए हैं। लेकिन पिता कहां है और उनकी मोटर साइकिल कैसे टूटी इसकी जानकारी नहीं बता रहे। इसके साथ ही उसने पिता के साथ कोई अनहोनी की आशंका भी व्यक्त की।
पुलिस रात को पहुंची गांव

दयाराम की बात से पुलिस के कान खडे हुए। आनन फानन में थाना पुलिस ने अपने अधिकारियों को जानकारी दी। इसके बाद रात को थाना प्रभारी 9 बजे के लगभग गांव पहुंच गए। उनके साथ वन विभाग के रेंजर भी गांव में पहुंचे। इस घटना की जानकारी गांव के हर घर को हो गई थी। पुलिस को गांव में देख एक सनसनी फैल गई थी। पुलिस ने पूछताछ शुरू की लेकिन कोई ठोस जानकारी हाथ नहीं लग पाई थी। शंका के आधार पर पुलिस ने मंजू को अपनी हिरासत में ले लिया था। इधर गांव के कई लोग जंगल में लापता रामसजीवन की खोज में निकल गए थे। लेकिन उन्हें रामसजीवन का कोई सुराग नहीं मिला था। पुलिस ने रात ज्यादा होने पर तय किया की अगले दिन तलाश का काम शुरू किया जाएगा।
और सन्न रह गए लोग

दूसरे दिन 17 जून को गांव वालों ने फिर से रामसजीवन की तलाश शुरू की। गांव के पास मौजूद बैरहा नाला से आगे गहरे जंगल तक तलाश की गई। लेकिन कहीं रामसजीवन का पता नहीं चला था। निराश गांव वाले जब जंगल से लौट रहे थे तो नाले के ऊपर जंगल में एक पेड़ पर रामसजीवन की लाश फांसी पर लटकी देखी। उनके आश्चर्य का ठिकाना न था… क्योंकि इस जगह से होकर वो लोग गुजरे थे, लेकिन तब यहां कोई लाश नहीं मिली थी। आनन फानन में पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पुलिस पहुंची। लेकिन जिस तरह से लाश फंदे में लटकी थी उसे देखकर पुलिस को हत्या की आशंका हो चुकी थी।
इस तरह लाश ने बताई अपनी हत्या की कहानी

पुलिस ने जब लाश देखी तो उसे दो तथ्य गौर करने वाले नजर आए जो हत्या की ओर इशारा कर रहे थे। पहला तो जिस स्थल पर लाश मिली थी वहां से ग्रामीण पहले ही गुजर चुके थे। लिहाजा यह तय किया गया कि लाश को यहां लाकर टांगा गया गया है। दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण तथ्य था फांसी के फंदे पर झूलती लाश के हाथ। ये हाथ फांसी लगाकर आत्म हत्या या हत्या को झूठा साबित कर रहे थे। क्योंकि फंदा लगाकर फांसी से मौत होने पर हाथ सीधे नीचे रहते हैं। लेकिन यहां पर हाथ अकड़े हुए सीधे बैठी अवस्था की तरह थे। पुलिस को यह समझते देर नहीं लगी कि यह राइगरमार्टिस(अकड़न) की वजह से हुआ है। राइगरमार्टिस उसे कहते हैं जब शरीर मौत के कुछ घंटों के बाद अकड़ने लगता है। फंदे पर लटके शव के हाथ इसी तरह अकड़े हुए थे। जो इशारा कर रहे थे कि इसे कहीं और मारा गया था और बाद में इसे लाकर लटकाया गया है। इसलिए हाथ राइगर मार्टिस की वजह से अकड़ गए हैं।
पोस्ट मार्टम में मिला दूसरा सबूत

रामसजीवन यादव के शव का जब पोस्ट मार्टम किया गया तो चिकित्सकों ने पाया कि शव के शरीर में कई स्थानों पर चोट के निशान है। साथ ही गला दबा कर हत्या करने के लक्षण भी दिखे। जांच में चिकित्सकों ने पाया कि मृतक के अंडकोष में भी चोट के निशान है। अंडकोष में चोट के निशान होने की जानकारी जब पुलिस को मिली तो उन्हें यह एक सबूत भी लगा कि हो न हो हत्या के पीछे की वजह इससे जुड़ी हो सकती है। इसके बाद पुलिस ने रिश्तों को लेकर अपनी खोज का दायरा बढ़ा दिया।
सबूतों से पकड़ में आया आरोपी

जिस तरह से लाश को फांसी के फंदे पर लटका पाया गया उससे यह तो स्पष्ट हो गया था कि जब लाश फांसी पर लटकाई गई थी उस वक्त मंजू पुलिस की अभिरक्षा में था। लिहाजा वह संदेह के घेरे से बाहर हो गया। अब पुलिस को तलाश थी कि अवैध रिश्ते की कहानी पर। गांव वालों से पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि रामजस मवासी को अपने घर में अवैध रिश्ते की शंका रहती थी। वह कई लोगों पर शंका करता था। इसके साथ ही यह भी पता चला कि फारेस्ट की जमीन में घर बनाने, जमीन जोतने एवं लकडी काटने सहित पैसे के लेने देने को लेकर रामसजीवन से विवाद था। इन आधारों पर उसे प्राइम सस्पेक्ट के रूप में देखा गया। इसके बाद पुलिस ने साइबर जांच का भी सहारा लिया। इस तरह यह तय हो गया कि रामजस ही वह शख्श था जो रामसजीवन की हत्या कर सकता था।
रामजस ने उगले राज

अपनी पूरी पड़ताल और फारेसिंक और साइबर सबूतों को सामने रख जब पुलिस ने रामजस से पूछताछ शुरू की तो वह कुछ छिपाने की स्थिति में नहीं था। इसके बाद उसने हत्या की पूरी कहानी बताई। कहा, उसका पुराना विवाद तो था ही साथ ही उसे रामसजीवन के चरित्र पर भी शंका थी। जब उसने रामसजीवन को अपने घर के आगे से गुजरता देखा तो उसे अकेला पाकर उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान अंडकोष में भी मारा। फिर गला दबा कर हत्या कर दी। इसके बाद शव को घर के पीछे ले जाकर छिपा दिया। शव को दीवार से टिकाकर छिपाया था। जिससे उसके हाथ उसी अवस्था में अकडे रह गए। सुबह जब ग्रामीण जंगल के अंदर चले गए तो मौका देखकर घर से कुछ ही दूर नाले के ऊपर धवा के पेड़ में लाश को टांग दिया। लाश इसलिए टांगी ताकि लोग माने कि रामसजीवन ने आत्महत्या की है। लेकिन अकड़े हुए हाथों से पूरी कलई खुल गई। इस स्वीकारोक्ति के बाद पुलिस ने रामजस मवासी उर्फ बेटा पिता बेलिया मवासी उम्र 32 वर्ष निवासी केल्हौरा मंडा टोला थाना बरौंधा को गिरफ्तार कर लिया है।
हत्या की गुत्थी इन्होंने सुलझाई

इस हत्या की गुत्थी सुलझाने में अभिनव सिंह थाना प्रभारी बरौधा, निरीक्षक विजय प्रताप सिंह, उप निरीक्षक अजीत सिह, उप निरीक्षक विशन सिंह मरावी, एएसआई दीपेश पटेल, सउनिसुमरन सिंह, प्रधान आरक्षक संदीप तिवारी सहित अन्य शामिल रहे।

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