मां बन कर भाई ने पाला, अमरीका मल्टीनेशनल कंपनी का बना दिया इंजीनियर

मां बन कर भाई ने पाला, अमरीका मल्टीनेशनल कंपनी का बना दिया इंजीनियर
National Brother Day

Jyoti Gupta | Publish: May, 24 2019 08:31:41 PM (IST) Satna, Satna, Madhya Pradesh, India

नेशनल ब्रदर्स डे

 

सतना. परिवार एक ऐसी संस्था है जो आपसी सहयोग व समन्वय से क्रियान्वित होती है। उसके समस्त सदस्य आपस में मिलकर अपना जीवन प्रेम, स्नेह एवं भाईचारा पूर्वक निर्वाह करते हैं। संस्कार, मर्यादा, सम्मान, समर्पण, आदर, अनुशासन आदि किसी भी सुखी-संपन्न एवं खुशहाल परिवार के गुण होते हैं। कोई भी व्यक्ति परिवार में ही जन्म लेता है, उसी से उसकी पहचान होती है। परिवार से ही अच्छे-बुरे लक्षण सीखाता है। कहते हैं कि परिवार से बड़ा कोई धन नहीं होता हैं। पिता से बड़ा कोई सलाहकार नहीं होता हैं, मां के आंचल से बड़ी कोई दुनिया नहीं होती। सबसे बड़ी बात भाई से अच्छा कोई भागीदार, शुभ चिंतक नहीं हो सकता है। खासकर उस घर में बड़े भाई की जिम्मेदारी तब और बढ़ जाती है जब घर में मां नहीं रह जाती। बद्रर्स डे में आज हम शहर के एेसे भाई से आपको मिलवाने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने छोटे भाई को आठ साल की उम्र से ही अपने पास ही रखा। मां बनकर उसकी शिक्षा दिक्षा की हो। भाई के चरित्र निर्माण से लेकर सफ लता तक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

दोस्त और मां बनकर दिया प्यार दुलार
उतैली निवासी फौज से रिटायर्ड सूबेदार मेजर रामप्रकाश पटेल ने अपने भाई के लिए जितनी देख-रेख की शायद ही कोई भाई इतना कर पाए। जी हां, जब भाई जय प्रताप सिंह पटेल आठ वर्ष का था तभी उसके अपने गांव से वे अपने साथ लेकर श्रीनगर लेकर चले गए। क्योंकि वह अपने भाई को अच्छा इंसान, शिक्षित और अनुशाषित व्यक्ति बनाना चाहते थे, वह जानते थे कि गांव का महौल में उनके भाई की देख रेख इतनी अच्छी नहीं हो पाएगी। उन्होंने जय का एडमीशिन आर्मी स्कूल में कराया। वे बताते हैं कि जब वे सुबह पीटी के लिए जाते थे तभी भाई को जगा कर कुछ पढऩे का एसाइनमेंट देकर जाते। फिर जब वह पीटी से वापस आते तो भाई की नहलाते स्कूल के लिए तैयार करते और स्कूल छोडऩे जाते। फिर ड्यूटी में लग जाते। बीच में समय निकाल कर भाई के लिए टिफिन लेकर स्कूल जाते उसको अपने हाथो से खाना खिलाते थे। एग्जाम के दौरान अवकाश लेकर परीक्षा की तैयारी करवाते थे। जब भाई 12 साल का हुआ तो उनकी मां का निधन हो गया। उसके बाद तो जय की पूरी जिम्मेदारी उनके ऊपर आ गई। उन्होंने जय की हर छोटी -छोटी सी ख्वाइश को पूरा किया। 12वीं तक जय को अपने पास रखा। 12वीं के बाद जय का एडमीशिन नागपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज में करवा दिया। इसके बाद वह हर महीने जय से मिलने श्रीनगर से जाते रहे। उनका कहना है कि जय को उन्होंने अपने बेटे की तरह पाला है। दोनों की अच्छी बॉंडिंग है। आज जय अमेरिका के मल्टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर है। जिसका श्रेय उनके बड़े भाई ५५ वर्षीय रामप्रकाश को जाता है।

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