बच्चों को शिष्टाचार का पाठ पढ़ाएगी एक संस्था

बच्चों को शिष्टाचार का पाठ पढ़ाएगी एक संस्था
National Descent Day Special

Jyoti Gupta | Publish: May, 14 2019 12:26:47 PM (IST) Satna, Satna, Madhya Pradesh, India

नेशनल डिसेंसी डे विशेष: शहर में शुरू हुई हरे माधव रुहानी बाल संस्कार क्लास

 

 सतना. वर्तमान में समय बच्चे शिष्टाचार की तहजीब को भूलते जा रहे हैं। न गुरुआें का सम्मान न परिवार के मान का ख्याल बस अपनी ही धुन में मग्न हो चुके हैं। इस आधुनिकता में अब स्कूलों में भी नैतिक शिक्षा का पाठ नहीं पढ़ाया जाता। व्यस्तता के चलते परिवार में भी बच्चों को वो तहजीब नहीं सिखाई जाती जिसकी वर्तमान में बेहद आवश्यकता है। फिलहाल आज हम एेसी संस्था के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने शहर के बच्चों को शिष्टाचार सिखाने का बीड़ा उठा लिया है। नेशनल डिसेंसी डे पर उस संगठन के बारे में प्रकाश डाल रहे हैं जिन्होंने बच्चों को शिष्टाचार का पाठ पढ़ाना भी शुरू कर दिया है।

हरे माधव रुहानी बाल संस्कार
हम जिस संस्था की बात करे हैंवह हरे माधव परमार्थ सत्संग समिति जिसने हाल ही में हरे माधव रुहानी बाल संस्कार शुरू किया है। इस संस्था द्वारा हर रविवार को बीटीआई ग्राउंड के पीछे स्थित माधव दरबार में अनुभवी शिक्षकों द्वारा बच्चों को शिष्टाचार का पाठ पढ़ाया जा रहा है।

50 बच्चे हो रहे लाभाविन्त

संस्था द्वारा शिष्टाचार की क्लास सुबह आठ बजे तक आयोजित की जाती है। अब तक 50 बच्चों का निशुल्क रजिस्ट्रेशन हो चुका है। इस क्लास में शिष्टाचार के तहत बच्चों में नम्रता, गुस्से को काबू करने का तरीका, ईश्वरी भक्ति, हमे कैसे उठना, बैठना, खाना, पीने का तरीका व गुरुजन और बड़ों का आदर कैसे करना चाहिए यह सिखाया जाता है। यही नहीं इस संस्था द्वारा यह क्लासेस निशुल्क संचालित की जा रही है जिसके तहत शहर का हर बच्चा भाग ले सकता है।

शिष्टाचार इसलिए भी जरूरी
शिष्टाचार जीवन का दर्पण है। जिससे हमारे व्यक्तित्व का स्वरूप दिखाई देता है। हमारे शिष्ट व्यवहार का दूसरे पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। दूसरों को सद्भावना, सहयोग और आत्मीयता का बोध होता है। साथ ही समाज में लोकप्रियता बढ़ती है। जीवन पथ पर आगे बढऩे के लिए शिष्टाचार बहुत उपयोगी और जरूरी है। इसके विपरीत अशिष्ट व्यवहार दूसरों में घृणा, द्वेष पैदा कर देता है। अशिष्टता से अपने पराए हो जाते हैं। हम समाज में अकेले रह जाते हैं। शिष्टाचार व्यवहार की वह रीति नीति है जिसमें व्यक्ति और समाज की आंतरिक सभ्यता और संस्कृति के दर्शन होते है। इसलिए हर व्यक्ति के अंदर शिष्टाचार होने चाहिए। यह शिष्टाचार बचपन में सीखी हुई अच्छी आदतों से आती है।

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