एक रिश्ता लड़ाई, नोंक-झोंक और स्नेह का

एक रिश्ता लड़ाई, नोंक-झोंक और स्नेह का
National Sisters and Brothers Day Special

Jyoti Gupta | Publish: May, 02 2019 09:31:14 PM (IST) | Updated: May, 02 2019 09:31:16 PM (IST) Satna, Satna, Madhya Pradesh, India

नेशनल सिस्टर्स और ब्रदर्स डे स्पेशल

 

सतना. भाई-बहन का रिश्ता दुनिया का सबसे प्यारा और अनोखा रिश्ता होता है। इसमें एक-दूसरे के लिए प्यार भी होता है तो नोंकझोंक और गुस्सा भी। परिस्थिति चाहे कैसी भी हो, यह प्यार और खट्टी-मीठी नोंकझोक में कोई बदलाव नहीं आता। कई बार जब बुरा वक्त आता है तो भाई बहन की और बहन भाई को बुरी परिस्थितियों से लडऩे में साथ देते हैं। आज सिस्टर्स और ब्रादर्स डे है। ऐसा दिन जोकि भाई-बहनों को समर्पित है। आज हम शहर की उन बहनों के बारे में बात करेंगे जो हर परिस्थिति में अपने भाई के साथ खड़ी हैं और आगे भी खड़ीं रहेंगी। वे अपने भाईयों की पढ़ाई में तो मदद कर ही रही हैं पर दुनियां को समझने में भी छोटे भाईयों की मदद करती हैं।

हर वक्त भाई पर रखती हंू नजर

छात्र नेता प्रियांशा उर्मलिया अपने छोटे भाई पवक उर्मलिया को बहुत ही प्यार करती हैं। उनका कहना है कि भाई अभी काफी छोटा है और शैतान भी। इसलिए हर वक्त उस पर नजर रखती हंू। वो कहती हैं कि उन दोनों के बीच में नोंक झोंक भी होती है। पर जब भी भाई को मदद चाहिए होती है। उनके पास ही आता है। उसकी इच्छा डॉक्टर बनने की है। इसलिए मैं हर वक्त उसे प्रोत्साहित करती हंू। हर दिन कुछ भी हो जाए कम से कम दो घंटे उसको पढ़ाती हंू और एक घंटे उसके साथ खेलती भी हंू। उसके लिए दुनियां को समझना अभी आसान नहीं है। इसलिए हर वक्त उसको गाइड करती रहती हंू। हम दोनों हर दिन एक साथ ही खाना खाते हैं। पूरे दिन के घटना क्रम को साझा भी करती हंू।
शादी के बाद भी भाई की करती हैं मदद
पुष्पराज कॉलोनी निवासी रुपाली गुप्ता कहती हैं कि भाई बहन का रिश्ता इतना मजबूत रिश्ता होता है। कि दूर रहने के बाद भी एक दूसरे का सुख ओर दुख का आभास हो जाता है। हम चार भाई बहन है। मैं बड़ी। बड़ी बहन होने के नाते मेरी कुछ जिम्मेदारियां भी है। जिसे मैं बाखूबी निभाने की कोशिश भी करती हंू। बड़ा भाई समझदार है पर छोटा प्रांशु अभी उसे और समझदार बनने की जरुरत है। उसे कुछ भी चाहिए तो वो मुझे ही याद करता है। मैं अपने भाईयों को अच्छा इंसान, अच्छा नागरिक और सक्षम बनाना चाहती हंू। ताकि वह मेरे मां बाप का सहारा बन सके। इसलिए मैं उसकी पढ़ाई में मदद करती हंू। यकीनन एेसा करना मुझे बहुत अच्छा लगता है। पर इसका मतलब यह नहीं कि भाई की शैतानियों को नजरअंदाज करूं। गलती करने पर कान भी खीचती हंू।

जहां बहन वहां भाई

सर्किट हाउस निवासी मंजरी सक्सेना इस समय इंदौर से इलेक्ट्रानिक मीडिया से बीएससी फाइनल कर रही हैं। उनका छोटा भाई क्षितिज सक्सेना भी वही से बीटेक सिविल कर रहा है। मंजरी कहती है कि जब हम दोनों घर में रहते थे तो जमकर झागड़ा करते थे। छोटी छोटी बातों में मुंह फुलाते रहते थे। किसी को विश्वास ही नहीं होगा कि अब हम दोनों एक भी झगड़ा नहीं करते। यहां तक हम दोनों के विचार भी काफी मिलने लगे। जब इंदौर में दोनों को पढऩे आना था तो घर वाले चिंतिंत थे कि दोनों कैसे मैनेज कर पाएंगे। पर यहां कर सबकुछ बदल गया। एक तो दोनों की अहमियत समझ में आ गई। जब दोनों रहते हैं तो किसी भी कार्य को बेहतर तरीके से कर पाते हैं। जब अकेले रहते हैं कोई भी काम ठीक से नहीं हो पाता। दोनों एक दूसरे की घर के कामो और पढ़ाई में मदद करते हैं। भाई बहन की बॉडिंग बड़े होने पर ही समझ आया।

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