टाइगर स्टेट में लापरवाहीः पहले जाग जाते तो बच जाती बाघों की जान

- मुकुंदपुर टाइगर सफारी में दो बाघों की मौत
- 10 वे दिन भी बाघों की रहस्यमयी मौत पर पर्दा
- 14 सदस्योंका दल निगरानी में जुटा
- जू अथारिटी पर उठ रहे हैं सवाल
- जांच के बाद कई लोगों पर गिर सकती गाज

By: Hitendra Sharma

Published: 09 Jan 2021, 12:09 PM IST

सतना. मुकुंदपुर टाइगर सफारी में 10 दिन के अंदर सफेद बाघ गोपी और नकुल की रहस्यमयी मौत का सच क्या है? यह भी तक पता नहीं चल सका है। हालांकि इन मौतों ने जू अथारिटी और प्रदेश सरकार पर सवालिया निशान जरूर लगा दिया है।

टाइगर सफारी में संक्रमित मांस की आशंका के चलते पिछले तीन दिन से 14 सदस्यों का दल निगरानी में जुटा हुआ है। तीन दिन से बांधवगढ़ नेशनल पार्क, संजय टाइगर रिजर्व सीधीऔर स्कूल आफ वाइल्ड लाइफ फरिंसिक एण्ड हेल्‍थ सेंटर जबलपुर की टीम चिकित्सकों के साथ मांस की गुणवत्ता देख रही है।

हेल्दी डाइट पर फोकस

अब टीम द्वारा निर्धारित मात्रा में डाइट दी जा रही है। बकरों को अपने सामने कटवा कर मांस की मात्रा, हड्डी की मात्रा और चर्बी समेत सभी पैरामीटर देखे जा रहे हैं। टीम अपनी गोपनीय जांच की पल-पल की जानकारी राजधानी में बैठे अफसरों को दे रही है।

कई लोगों पर गिरेगी गाज

फिलहाल इस प्रकरण में टीम द्वारा कोई राय नहीं दी गई, लेकिन इस गोपनीय जांच के बाद कई लोगों पर गाज गिर सकती है। बताया जाता है कि टीम अपनी निगरानी में ही जीवित भेंसा, बकरा, मंगाकर उनके स्वास्थ्य का परीक्षण करती है। इसके बाद ही बाघों को भोजन दिया जा रहा है।

जब तक बाघ भोजन करने के बाद आराम के लिए अपने बाड़े की ओर नहीं जाते, तब तक टीम उन पर नजर रखती है। ज्ञात हो कि पिछले दिनों तक मांस सप्लायर द्वारा मांस सफारी में पहुंचाया जा रहा था। सुबह पशु बध के बाद शाम तक सप्लाई की जाती थी। ठेकेदार के पास मांस को रखने के कोई संसाधन नहीं थे। इससे मांस खराब हो जाता था। इसके अलावा शिकायत यह भी थी कि ठेकेदार क्रैशी द्वारा मृत पशुओं का मांस भी भेज दिया जाता था।

तो सफारी में दहाड़ता नकुल

मुकुंदपुर सफारी में बाघों और अन्य विडालवंश के जानवरों की मौत कोई नई बात नहीं। इन दो बाघों के पहले भी कुछ बाघ जान गवां चुके हैं। यदि गोपी की अचानक हुई मौत के बाद इस प्रकार की चौकसी बरती गई होती तो शायद सफारी में नकुल अभी भी दहाड़ मार रहा होता। र्भाय हैकि नकूल की मौत के बाद ही सरकार और अथारिटी की तंद्रा टूटी।

 

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