सुरक्षा पर सवाल: नवजात को कुत्ता उठा ले गया और दिखा किसी को नहीं!

जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, एडीएम के नेतृत्व में जांच करने पहुंची टीम


सतना
जिला अस्पताल में नवजात को कुत्ते द्वारा उठा ले जाने के मामले में बुधवार से जांच शुरू हो गई। एडीएम मूलचंद वर्मा व सीएमएचओ डॉ. विजय आरख जांच करने पहुंचे। उन्होंने ड्यूटी डॉक्टर, स्टॉफ, सुरक्षाकर्मी व परिजनों के बयान दर्ज किए।  प्रथम दृष्ट्या सुरक्षा में चूक मानी जा रही है। गंभीर सवाल ये है कि चार गेट  पार कर कुत्ता वार्ड में पहुंचा और वहां से वह नवजात को लेे गया, लेकिन किसी ने देखा तक नहीं।  सुरक्षाकर्मी ने लापरवाही की, तो वार्ड में मौजूद स्टॉफ क्या कर रहा था? 6 घंटे तक चली जांच के दौरान सीएस डॉ. एसबी सिंह व डॉ. रेखा त्रिपाठी सहित सहित अस्पताल का अन्य स्टॉफ भी मौजूद रहा।

जांच प्रतिवेदन तलब
जांच टीम ने सीएस डॉ. एसबी गर्ग से मामले का तथ्यात्मक जांच प्रतिवेदन मांगा है। इसमें ड्यूटी स्टॉफ की सूची, सुरक्षा व्यवस्था, घटना की जानकारी कैसे प्राप्त हुई, क्या कार्रवाई की गई? मामले में परिजनों ने शिकायत की या नहीं? लापरवाही किस स्तर पर हुई? विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। सीसीटीवी फुटेज चेक कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।

बयान में विरोधाभाष
मामले को लेकर अस्पताल का स्टॉफ और परिजनों के बयान विरोधाभाषी हैं। प्रसव कराने के समय से लेकर नवजात के जिंदा या मृत पैदा होने पर भी संशय की स्थिति है। स्टॉफ का कहना है कि नवजात मृत पैदा हुआ था। उसके शव को परिजनों के कस्टडी में सौंप दिया गया। वहीं प्रसूता की देवरानी के बयान लगातार बदलते रहे।

सवाल, जिनके जवाब नहीं मिल रहे
अगर नवजात मृत पैदा हुआ, तो उसकी डेथ ऑडिट क्यों नहीं की गई?
मृत बच्चे को तत्काल परिजनों के सुपुर्द क्यों किया गया? प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं की गई?
परिजनों की मानें तो प्रसव नर्स ने कराया। अगर सच है, तो ड्यूटी डॉक्टर कहां थे और नवजात को मृत किसने घोषित किया?
वार्ड तक पहुंचने में चार गेट पड़ते हंै, सभी खुले कैसे रह गए?
केवल सुरक्षा में चूक की बात कर अन्य की जिम्मेदारी को नकारा कैसे जा सकता है?
ड्यूटी डॉक्टर कौन था? स्टॉफ नर्स को पता तक नहीं, ये अपने आप में गंभीर सवाल है? आखिर उसने परिजनों को नवजात को लेकर किसके पास भेजा, जिसने मृत घोषित किया।
मामला संज्ञान में आने के बाद स्टॉफ ने रात के वक्त ही जिम्मेदारों को सूचना क्यों नहीं दी। दूसरे दिन शाम तक मामले को दबा कर रखा गया। मीडिया में खबर आने के तीसरे दिन जांच टीम गठित क्यों की गई?

सुर्खियों में जिला अस्पताल
तीन माह पहले मेटरनिटी वार्ड में बिल्ली पहुंच गई और एक नवजात को पंजा मार दिया था।
जुलाई माह में प्रसव के दौरान नवजात गिर गया और उसकी मौत हो गई। गंभीर चिकित्सीय लापरवाही है। जांच जारी है।
कोख में दो बच्चों का दम घुट गया, शासकीय डॉक्टर पर निजी नर्सिंग होम में प्रसूता को शिफ्ट करने के आरोप लगे।
एसएनसीयू वार्ड में दो साल पहले आग लग गई थी। कई नवजातों की जिंदगी खतरे में पड़ गई थी।
suresh mishra
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