गुस्सा तो होगा हीः शिवराज मंत्रिमंडल में उस विंध्य क्षेत्र की उपेक्षा जहां बजा था भाजपा का डंका

-सरकार बनी कांग्रेस की पर, विंध्य के 7 जिलों की 32 सीटों में 28 सीट में भाजपा का बजा था डंका
-अब एक भी मंत्री नहीं होने से क्षेत्र के विकास को लेकर मायूस है जनता भी

By: Ajay Chaturvedi

Published: 04 Jul 2020, 04:38 PM IST

सतना. शिवराज चौहान मंत्रिमंडल का विस्तार तो हो गया पर यह विस्तार कई मायनों में नकारात्मक ऊर्जा का संचार कर गया। खास तौर पर बात की जाए विंध्य क्षेत्र की तो इलाके के भाजपा विधायक ही नहीं वोटर भी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। उनकी यह सोच वाजिब भी है। आखिर जिस विरोध की लहर के बीच इस विंध्य क्षेत्र ने कांग्रेस का बैंड बजा दिया हो, क्षेत्र के 7 जिलों की 32 सीटों में 28 सीटों पर न केवल कांग्रेस प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा, बल्कि कइयों की तो जमानत तक जब्त हो गई। लेकिन इससे मिला क्या, ये सवाल अब इलाके के हर नागरिक व विधायक समर्थकों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है।

हर गली, चट्टी चौराहे पर दो लोग भी मिल रहे हैं तो चर्चा इस बात कि आखिर ऐसा क्या गुनाह किया है विध्य के लोगों ने कि भाजपा ने विंध्य क्षेत्रवासियों को इस कदर उपेक्षित कर दिया। नागरिक जिन्होंने बड़े चाव से प्रायः हर विधानमंभा क्षेत्र में कमल खिलाया था, उन्हें इस बात की चिंता सता रही है कि जब उनके जनप्रतिनिधियों को मंत्रिमंडल में जगह ही नहीं मिल पा रही तो इलाके का विकास कैसे होगा। भले ही अगले विधानसभा चुनाव में अभी देर हो पर जनता अभी से भाजपा को सबक सिखाने के मूड में आने लगी है। नाराज विधायक भले ही कुछ खुल कर न बोलें पर अंदर ही अंदर वो भी नेतृत्व से खासे नाराज नजर आ रहे हैं। उनके समर्थक तो दबी जुबान अपना आक्रोश प्रकट भी करने लगे है। लेकिन उन्हें भी विधायकों का स्पष्ट संदेश है कि अभी कुछ भी खुल कर विरोध नहीं करना है। पर अंदर ही अंदर खिचड़ी तो पकनी शुरू हो चुकी है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो भाजपा विधायकों की नाराजगी बड़ा गुल भी खिला सकती है।

बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में विंध्य के 7 जिलों की 32 सीटों में 28 सीट पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। सिहावल, सतना और चित्रकूट को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश सीटों पर न केवल कांग्रेस हारी बल्कि जमानत भी जब्त हो गई। विंध्य में भाजपा का ऐसा जादू चला कि कमलनाथ, सिंधिया, राहुल और यादव गुट के सभी प्रत्यशियों को हार का सामना करना पड़ा। यहां तक कि पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल, पूर्व मंत्री राजेन्द्र सिंह, ब्राह्मण नेता सुंदरलाल तिवारी जैसे दिग्गजों को विंध्य क्षेत्र के वोटरों ने धता बता दिया। लेकिन अब वो ही मतदाता यह सवाल कर रहे हैं कि आखिर क्या वजह रही कि शिवराज के कैबिनेट में विंध्य के भाजपा विधायकों को जगह नहीं मिली।

अब चाहे बात की जाए पूर्व मंत्री राजेन्द्र शुक्ला की तो उन्हें विकास पुरुष का खिताब मिला था कभी। लेकिन वह भी कैबिनेट से बाहर हैं। राजेन्द्र शुक्ल पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती सरकार में पर्यावरण मंत्री रहे फिर शिवराज चौहान के सबसे खास बन गए और खनिज, ऊर्जा, जनसम्पर्क, अप्रवासी भारतीय, वाणिज्य व उद्योग विभाग की जिम्मेदारी तक संभाली। लेकिन इस बार उन्हें भी नहीं पूछा गया। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी को हराकर सुर्खियों में आए गिरीश गौतम ने तो लगातार चौथी बार भाजपा को जीत दिलाई है। लेकिन ये भी उपेक्षित कर दिए गए। सीधी के केदार नाथ शुक्ला को भी दरकिनार कर दिया गया। वैसे केदारनाथ उन कद्दावर नेताओं में से हैं जो आसानी से बहुत दिनों तक चुप नहीं बैठ सकते। वह मंत्रिमंडल विस्तार के पहले ही अपनी मंशा पूरी तरह से साफ कर चुके हैं।

लोगों का कहना है कि भाजपा नेतृत्व मध्य प्रदेश के एक राज परिवार को तो बेइंतिहां महत्व दे रहा है। ठीक है उनकी वजह से प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी, लेकिन राज्य के दूसरे राजपरिवार को दरकिनार किया जाना कहां तक उचित है। सियासी समीकरणों के लिहाज से भी यह कहीं से घाटे का सौदा नहीं होता। बात रीवा रियासत के युवराज दिव्यराज सिंह की हो रही है जिन्होंने जीत का सिलसिला बरकरार रखते और दूसरी बार भी फतह हासिल की। ऐसे में उन्हें भी मंत्रिमंडल से बाहर रखना रीवा के लोगों को सालने लगा है।

उधर वरिष्ठ विधायक पूर्व मंत्री नागेंद्र सिंह नागौद की बात करें तो नागेंद्र सिंह पूर्व की भाजपा सरकार में मंत्री रहे और खजुराहो लोकसभा सीट से जीत दर्ज कर लोकसभा भी पहुंचे थे। उम्र दराज इस दिग्गज नेता को भी दरकिनार किया गया है। नागेंद्र सिंह गुढ़ की बात की जाए तो कांगेस को छोड़कर भाजपा में आए नागेंद्र सिंह 3 बार जीत दर्ज कर चुके हैं और उम्रदराज विधायक हैं। बावजूद इन्हें मंत्री नहीं बनाया गया है।

Show More
Ajay Chaturvedi
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned