इस सड़कों से प्रतिदिन गुजरते हैं 500 ओवरलोड ट्रक और डंपर

  इस सड़कों से प्रतिदिन गुजरते हैं 500 ओवरलोड ट्रक और डंपर
satna news

पन्ना जिले में जिला प्रशासन और पुलिस की टीम ने रविवार को संयुक्त कार्रवाई करते हुए कुछ घंटे के अंदर 400 से ज्यादा ओवरलोड ट्रक पकड़ लिए। अर्थदंड भी अधिरोपित कर दिया।


सतना
पन्ना जिले में जिला प्रशासन और पुलिस की टीम ने रविवार को संयुक्त कार्रवाई करते हुए कुछ घंटे के अंदर 400 से ज्यादा ओवरलोड ट्रक पकड़ लिए। अर्थदंड भी अधिरोपित कर दिया। इससे साबित हुआ कि पन्ना में जिम्मेदारों की मिलीभगत से वर्षों से ओवरलोडिंग का खेल चल रहा था।अन्यथा एक झटके में इतने बड़े पैमाने पर वाहन नहीं पकड़े जाते।

लेकिन, इसकी तुलना सतना से की जाए, तो ओवरलोडिंग के मामले में जिले के हालत पन्ना से ज्यादा बद्तर हैं। यहां मैहर, रामपुर, कोटर, मझगवां, नागौद क्षेत्र में चूना पत्थर से लदे ओवरलोड ट्रक दिखाई देना आम बात है। जो हाइवे के साथ-साथ ग्रामीण सड़कों पर दौड़ते हैं। जिले की सड़कों से प्रतिदिन 400-500 ओवरलोड ट्रक और डंपर दौड़ते हैं।


नेशनल हाइवों की धज्जियां उड़ रही
जिले में नेशनल हाइवों की धज्जियां उड़ रही हैं और ओवरलोडिंग को रोकने वाला कोई नहीं है। यहां तक की जिले के प्रमुख धार्मिक स्थल चित्रकूट और मैहर जाने के लिए तो ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। यही हाल सतना से रीवा हाईवे का है। जहां सड़क के नाम पर बड़े-बड़े बोल्डर और धूल से सनी सड़क है। पर्यटन स्थल पन्ना और खजुराहो की ओर जाने वाला हाईवे भी जर्जर होने लगा है। इन सबके पीछे जितना सड़क बनाने वाली कंपनियां जिम्मेदार हैं, उतना ही यहां से गुजरने वाले ओवरलोड वाहन भी हैं।


40 टन की क्षमता, 80 टन का बोझ
जिले की सीमा से होकर गुजरने वाले सभी नेशनल व स्टेट हाईवे सड़क पर खुलेआम ओवरलोड वाहन धमाचौकड़ी मचा रहे हैं। 40 टन की क्षमता वाली सड़क पर 80 टन का बोझ ढोने से सड़कें चरमरा गई हैं। भारी भरकम वाहनों के निकलने से सड़कों का दम निकलता जा रहा है। लेकिन इन बेलगाम भागते वाहनों पर अंकुश लगाने वाला जिम्मेदार कागजी खानापूर्ति करने में लगा रहता है।

यहां देखने वाला
कोई नहीं
मैहर में ओवरलोडिंग का खेल सबसे ज्यादा होता है। घुनवारा, भदनपुर, झुकेही सहित मैहर शहर के बीचों-बीच ओवर लोड ट्रकों की धमाचौकड़ी देखी जा सकती है। ट्रक थाने व एसडीएम कार्यालय के सामने से गुजर जाते हैं, लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। यहां आधा दर्जन से ज्यादा ऐसे जनप्रतिनिधि हैं, जिनका ट्रांसपोर्ट व के्रशर का व्यवसाय है, दर्जनों बार इनके ट्रक ओवर लोड पकड़े गए। लेकिन, कार्रवाई दिखावे की होती है। 1-2 वाहनों पर कार्रवाई कर छोड़ दिया जाता है। एक ट्रांसपोर्टर के पास 500 से ज्याद हाइवा व डंपर चलते हैं।

रामपुर व बाबूपुर
का नेटवर्क
रामपुर बाघेलान व बाबूपुर एक-दूसरे से ग्रामीण सड़क व हाइवे से जुड़े हुए हैं। बाबूपुर अवैध खनन के लिए बदनाम है। रामपुर बाघेलान व सतना में अवैध पत्थरों की खपत होती है। प्रतिदिन औसतन 300-400 डंपर व हाइवा ग्रामीण सड़कों को बर्बाद करते हुए दौड़़ते हैं।

आधी रात को रेत
के ट्रक
सतना जिले में प्रतिदिन रात के वक्त 500 से ज्यादा ट्रक रेत के आते हैं। ये पन्ना, सिंगरौली व शहडोल की सीमा से प्रवेश करते हैं। इसमें से 80-90 फीसदी वाहन ओवरलोड होते हैं। जो रात के अंधेरे में रेत सप्लाई कर गायब हो जाते हैं। केवल शहरी सीमा में प्रतिदिन 200 से ज्यादा वाहन आते हैं। इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

जिम्मेदारों की चुप्पी
ओवरलोड वाहनों पर आरटीओ, यातायात पुलिस व राजस्व अधिकारी सीधे तौर पर कार्रवाई कर सकते हैं। थाना व राजस्व का अमला पूरे जिले में है, लेकिन महीनों गुजर जाते हैं, कोई कार्रवाई नहीं होती है। अगर, भोपाल मुख्यालय से निर्देश मिल जाए, तो दिखावे के लिए रश्म अदायगी कर दी जाती है।

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