पौधे लगाएं बड़े प्यार से, पर सावधानीपूर्वक

वैज्ञानिक पद्धति से लगाएंगे तो कभी भी नहीं मुरझाएंगे आपके पौधें

By: Jyoti Gupta

Published: 24 Jul 2018, 09:22 PM IST

सतना. मानसून के सक्रिय होते ही अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य पौधरोपण शुरू हो जाता है। समस्त सामाजिक संगठन, स्कूल, कॉलेज में बड़े ही जोर शोर और उत्साह पूर्वक विभिन्न प्रजाति के पौधों को रोपने का काम किया जाता है।पर एक्सपर्ट का कहना है कि हम इस नेक कार्य को करने में अपना समय, मेहनत, धन लगाते हैं तो क्यों न इस कार्य को बेहतर से और बेहतर करें। जिससे पौधेरोपण के बाद उत्तम परिणाम आ सके। इसके लिए जरूरी है कि आप पौधे लगाने से पहले कुछ तकनीकी बातों का ध्यान रखें, जिससे पौधे लगाने के बाद इसके सार्थक परिणाम भी दिखाई दें।

जल और जगह दोनों का चुनाव सही हो
यहां पर जगह का मतलब है कि जिस जगह हम पौधरोपण करें उस स्थान पर पानी का जमाव न हो। कोयला उपरी स्थल पर न हो। अधिक पथरीली जमीन न हो और सबसे प्रमुख बात वह घेराव युक्त हो। मतलब बाउंड्रीवाल लगाया जा सके। अगर एेसी जगह पर पौधे लगाते हैं तो यह सुरक्षित रहेंगे। वरना आपकी मेहनत बेकार हो जाएगी। अब बारी आती है जल की। पौधों को बढऩे के लिए जल की जरुरत है इसलिए जगह एेसी भी हो जहां पर नौ महीने तक पौधे को पानी देने की व्यवस्था की जा सके।

साइज व दूरी
लोग बड़े ही शौक से कही भी पौधे लगाने लगते हैं जबकि यह गलत है। इसलिए पौधे लगाने से पहले उनके बीच की दूरी का ध्यान रखें। गढ्ढों का मानक साइज होता है। डेढ़ से दो फिट लम्बाई, चौड़ाई व गहराई होनी चाहिए। मिटटी की स्थिति एवं पौधे की ऊंचाई के आधार पर यह अधिक भी हो सकता है। एक गढ्ढे से दूसरे गड्ढे तक की दूरी न्यूनतम 10 फु ट होनी चाहिए। मोटे ताने या अधिक घेराव वाले पौधों के लिए गड्ढों की दूरी 15 फु ट रखनी चाहिए।


पौधे लगाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
गड्ढों को पौधरोपण से दो दिन पूर्व खुदवाएं उसमें नीम की खली व दीमकरोधी पावडर मिला कर गोबर की खाद डाल दें। पौधरोपण के समय गढ्ढे से बाहर निकली मिटटी को लगभग दो इंच गढ् ढे में दोबाल डाल देवें और गड्ढे के बीचों बीच पौधे एकदम सीधे लगाएं। मिटटी का पटाव करें व उसी समय लगभग 300 मिली पानी की सिंचाई कर दें।
पौधों की साइज बड़ी हो तो बांस या लकड़ी का सपोर्ट लगाएं। घेराव की व्यवस्था तत्काल करें। तेज धूप में पौधे न लगाएं।

पौधे कहा और कौन कौन से लगाएं

1.पाठ शालाएं- गुलमोहर, टीकोमा, अमलतास, नीम, करंज, जामुन, आम, जंगल जलेबी।
2.पंचायत भवन- अर्जुन, शीशम, शिरसा, सागौन, करमा, कदम।
3.आंगनवाडी- पपीता, मूनगा, सीताफ ल, अमरुद, नीबू, आंवला, जामुन, नीम, कटहल।
4.अस्पताल परिसर- कदम, रबड़, बादाम, पीपल, क्यारियों में देवना, तुलसी, खम्हार,गुलमोहर।
5.सामुदायिक भवन- कदम, बादाम, पेलटाफ ोरम, गुलमोहर,अर्जुन, आम, नीम, जामुन।
6.प्रशिक्षण केंद्र- कदम, बादाम, पेलटाफ ोरम, गुलमोहर, अर्जुन, आम, नीम, जामुन।
7.श्मशान घाट- पीपल, बरगद, कदम, शीशम, नीम, सप्तपर्णी, चंदन।
8.सड़क के किनारे- चम्पा, कदम, गुलमोहर, करंज,आम, जामुन, डीवाईडर में कम चौड़ी जगह होने पर कनेर, मोंगरा, टगर, गुडहल, मदार, हरसिंगार।
9.तालाब नदी आदि जल श्रोतों के निकट- खजूर, नारियल, पीपल, गूलर, छतवन, सुपाड़ी, बेल,बेर।
10.औद्योगिक क्षेत्र- गुलमोहर, कदम, पेलटाफ ोरम, शीशम, बादाम, आम, पीपल, चकुन्दी, सप्तपर्णी।
11.छोटे बड़े झाड़ के जंगल- साल, सागौन, नीम,आम, तेंदू, बकायन, महानीम, पीपल, बरगद, आंवला।


हमारी संस्था शहर में दो साल से पौधे रोपने का कार्य कर रही हैं। मैं शहर के सभी सामाजिक संगठनों से अनुरोध करती हंू कि वे पौधे लगाएं पर पर पूरी वैज्ञानिक पद्धति के साथ। जिससे पौधे अच्छे से बढ़ सकें और आपकी मेहनत, समय, धन बर्बाद न हो।
सीमा अग्रवाल निखार, अध्यक्ष, अंकुरण तरु

पौधे लगाना बहुत अच्छी बात है पर उसकी देखभाल करना और बीच में नष्ट होने से बचाना भी आपका कर्तव्य है। एेसे में पौधे लगाते वक्त तकनीक का ध्यान रखें। एेसे ही किसी भी जगह पर पौधे नहीं लगाएं।
डॉ. शोभा गुप्ता, विभागाध्यक्ष ,बॉटनी

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