मेडिकल कॉलेज की जमीन पर नियम विरुद्ध बनवाए PM आवास, विधानसभा को किया गुमराह

गड़बड़झाला: पात्रता की शर्तों को आवंटन नियम बताकर कर रहे बचाव, नहीं बन पा रहा कॉलेज भवन

By: suresh mishra

Published: 03 Jan 2020, 01:28 PM IST

सतना/ मेडिकल कॉलेज की जमीन पर प्रधानमंत्री आवास का आवंटन शासन के नियम निर्देशों के विरुद्ध किया है। लाखों रुपए उन लोगों को नियम विरुद्ध जारी कर दिए गए जिनके पास न तो खुद की कोई जमीन थी और न ही उनके पास कोई शासकीय पट्टा या अधिकार पत्र है। महज पांच साल के समेकित कर को आधार बनाकर पात्रता की शर्तों को आवंटन नियम मानते हुए मेडिकल कॉलेज की आरक्षित विशुद्ध शासकीय जमीन पर प्रधानमंत्री आवास बनवा दिए।

नतीजा, अब यहां मेडिकल कॉलेज भवन भी नहीं बन पा रहा है। मेडिकल कॉलेज भवन बनाने में बाधक बने ये आवास गिराने में निगम का तकनीकी अमला अभी इसीलिए इसमें टालमटोल कर रहा है क्योंकि इन आवासों के गिरते ही अनियमितता की पोल खुल जाएगी और संबंधितों पर सख्त कार्रवाई होगी। यही वजह है कि इन लोगों ने विधानसभा को भी गलत जानकारी देकर गुमराह किया।

ये है मामला

22 दिसंबर 2017 को संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास ने बीएससी घटक के हितग्राहियों के भूमि दस्तावेज के संबंध में एक पत्र जारी किया। इसमें पीएम आवास (शहरी) के बीएलसी घटक के तहत हितग्राही के पास भूमि स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों को लेकर योजना में शिथिलता की जानकारी दी गई थी। यह शिथिलता इस विषय पर थी कि कई हितग्राहियों के पास भूमि स्वामित्व संबंधित दस्तावेज जैसे रजिस्ट्री उपलब्ध न होने से उन्हें पीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था। इस पर शासन ने दिशा निर्देश जारी किए थे कि ऐसे हितग्राही जिनके पास भूमि स्वामित्व के संबंध में विक्रय पत्र या दानपत्र का नोटरी दस्तावेज उपलब्ध है एवं वे स्थल पर विगत 5 या उससे अधिक सालों से निवासरत हैं किन्तु रजिस्ट्री दस्तावेज उपलब्ध नहीं है उन हितग्राहियों द्वारा रजिस्ट्री कराने की कार्रवाई प्रक्रियाधीन होने से रजिस्ट्री में विलंब हो रहा है।

ये हितग्राही रजिस्ट्री से मुक्त नहीं रहेंगे

इस स्थिति में अगर भूमि स्वामित्व संबंधी विवाद नहीं है, तो वे आवास योजना के पात्र माने जाएंगे। अंत में शासन ने यह स्पष्ट किया कि ये हितग्राही रजिस्ट्री से मुक्त नहीं रहेंगे। सभी को यथाशीघ्र रजिस्ट्री की कार्रवाई पूर्ण कर उसकी प्रति निकाय को देनी होगी। यह पत्र स्पष्ट रूप से निजी जमीनों के लिए था न कि शासकीय भूमि पर कब्जा कर रह रहे लोगों के लिए लेकिन नगर निगम सतना के योजना प्रभारी ने इसे सरकारी जमीन का मानते हुए इन सभी से पांच साल का समेकित कर जमा करवा कर उन्हें पीएम आवास आवंटित कर दिया।

बिना भू-स्वत्व के बनवा दिया पीएम आवास
जानकारों का कहना है कि बीएलसी घटक मामले में जमीन का स्वामित्व अथवा पट्टा या भू-अधिकार पत्र अनिवार्य है। अगर यह नहीं है तो वे आवास निर्माण नहीं कर सकते हैं। शासन से जो छूट मिली थी वह पात्रता के लिए थी। न कि आवास निर्माण के लिए। ऐसे पात्र लोगों को पहले पट्टा आवंटन करवाना चाहिए था फिर वहां आवास बनवाना था लेकिन यहां के मामले में ऐसा नहीं किया गया। जबकि पीएम आवास के संबंध में यह भी स्पष्ट है कि अगर कोई हितग्राही योजना का पात्र है और उसके पास जमीन नहीं है तो वह फिर एसएचपी घटक में आएगा और उसे सरकार आवास बनाकर देगी। लेकिन नगर निगम के तकनीकि अधिकारी शासन के नियम निर्देशों की अपने तरह से व्याख्या करते हुए नियम विरुद्ध तरीके से मेडिकल कालेज की आरक्षित शासकीय जमीन पर बिना भू-स्वत्व के माकान बनवा दिए।

सफाई नगर निगम के जिम्मेदारों की
उधर मामले में निगम के जिम्मेदार नगरीय प्रशासन एवं विकास की अपर आयुक्त मिशन डायरेक्टर (एचएफए) डॉ मंजू शर्मा के उस पत्र का हवाला दे रहे जिसमें लिखा गया है कि 'ऐसे हितग्राही जो संबंधित आबादी क्षेत्र में पूर्व से निवासरत हैं एवं नगरीय निकाय को नियमित संपत्तिकर या समेकित कर का भुगतान कर रहे हैं लेकिन उनके पास भू-स्वामित्व के दस्तावेज नहीं है उस स्थिति में इन्हें पात्र माना जाए एवं उसी स्थान पर आवास निर्माण के लिए बीएलसी घटक में सम्मिलित किया जाए। लेकिन निगम के अधिकारी अपने इसी आदेश पर भी उलझ रहे हैं। दरअसल मेडिकल कॉलेज के लिए आरक्षित (आवंटित नहीं) यह जमीन न तो आबादी क्षेत्र है और न ही दखल रहित भूमि है। लिहाजा, यहां पर पीएम आवास बीएससी घटक के तहत नहीं बनवाया जा सकता था। इतना ही इस आदेश का बाद में डॉ मीनाक्षी सिंह ने स्पष्टीकरण भी दिया है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि हितग्राहियों के पास विक्रय पत्र अथवा दानपत्र होने चाहिए।

ऐसे किया गुमराह
मेडिकल कॉलेज की जमीन में प्रधानमंत्री आवास बनाने के मामले में निगम के अफसरों ने विधानसभा को भी गुमराह किया है और पात्रता की शर्त को आवंटन बताया है। साथ ही पात्रता संबंधी मार्गदर्शी निमयों के आगे की व्याख्या को छिपा लिया है।

शासन ने आदेश जारी कर सरकारी जमीन पर निवास करने वाले ऐसे लोग जिनके पास भू स्वामित्व दस्तावेज उपलब्ध नहीं है उन्हें भी पात्र मानते हुए उसी स्थान पर आवास निर्माण के निर्देश थे। हमें पता नहीं था कि जमीन मेडिकल कॉलेज के लिए आरक्षित है।
अरुण तिवारी, प्रभारी आवास योजना

मामला संज्ञान में है। जल्द ही संबंधित नस्ती बुलाकर जांच की जाएगी। उसके आधार निर्णय लिया जाएगा।
सतेन्द्र सिंह, कलेक्टर एवं प्रशासन नगर निगम

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