मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर मध्य प्रदेश की सियासत में आई गर्मी, अटकलों के बाजार तेज

-पहली बार में मंत्री न बन पाने वालों ने ठोंकी ताल
-नए युवा चेहरों की दावेदारी भी खिला सकती है गुल

By: Ajay Chaturvedi

Updated: 29 Jun 2020, 05:00 PM IST

सतना. मध्य प्रदेश में एक बार फिर से सियासी हलचलें तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल का विस्तार करने वाले हैं। इस संबंध में उनकी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीडी शर्मा से हुई गुफ्तगू को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में बीजेपी के अंदरखाने में मंत्री पद को लेकर दावेदारी भी तेज हो गई है। वैसे माना यह भी जा रहा है कि शिवराज सिंह चौहान का मौजूदा कार्यकाल पूर्व के कार्यकालों की तुलना में उतना आसान नहीं है। यहां तक कि मंत्रिपरिषद में जगह देने को लेकर भी वह पूरी तरह से पूर्व की तरह स्वतंत्र नहीं हैं। मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल में कौन शामिल होगा इसका फैसला केंद्रीय नेतृत्व पर ही निर्भर होगा। वैसे माना जा रहा है कि एक-दो दिन में मंत्रिमंडल की सूची पर मुहर लग जाएगी।

मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने रविवार को बड़ा निर्णय लेते हुए काफी दिनों से अस्वस्थ चल रहे राज्यपाल लालजी टंडन की जगह उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को मध्य प्रदेश के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। ऐसे में सोशल मीडिया पर उड़ी मंत्रिमंडल विस्तार की हवा और तेज हो गई है। माना जा रहा है कि यूपी की राज्यपाल को मध्य प्रदेश का अतिरिक्त प्रभार सौंपने की जल्दबाजी के पीछे भी केंद्र यानी भाजपा नेतृत्व के तार मंत्रिमंडल विस्तार से जुड़े हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने कहा है कि राज्यपाल पद के कार्यों के लगातार प्रभावित होने के चलते ऐसा किया गया है। बता दें कि राज्यपाल लालजी टंडन का इन दिनों लखनऊ में इलाज चल रहा है।

बता दें कि शिवराज सिंह चौहाने ने 23 मार्च को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी जिसके अगले ही दिन कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते पूरे देश में लॉकडाउन हो गया। ऐसे में मध्य प्रदेश में कैबिनेट गठन न होने की वजह से कोरोना संकट से मुख्यमंत्री शिवराज अकेले जूझ रहे थे। लिहाजा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के 29 दिनों बाद शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल का गत गत 21 अप्रैल को गठन हुआ। शिवराज सरकार के पहले मंत्रिमंडल में दो सिधिया समर्थकों सहित पांच मंत्रियों को शामिल किया गया। इसमें सिंधिया समर्थक तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत सहित बीजेपी के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा, कमल पटेल तथा मीना सिंह को शपथ दिलाई गई। यहां यह भी बता दें कि सिंधिया समर्थक तुलसी सिलावाट और गोविंद सिंह राजपूत कांग्रेस की कमलनाथ सरकार में भी कैबिनेट मंत्री रहे हैं। इन दोनों मंत्रियों सहित 22 विधायकों ने सिंधिया के समर्थन में विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था जिसके बाद यह बीजेपी में शामिल हो गए थे। वहीं बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा, राज्य के नर्मादांचल क्षेत्र के ओबीसी नेता व पूर्व मंत्री कमल पटेल और आदिवासी नेता मीना सिंह को भी शिवराज मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। मीना सिंह शिवराज मंत्रिमंडल की अकेली महिला सदस्य है।

मंत्रिमंडल गठन के बाद सीएम चौहान ने डॉक्टर नरोत्तम मिश्रा को गृह और स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी है तो कमल पटेल को कृषि मंत्री बनाया। मीना सिंह को आदिम जाति कल्याण मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया। इसके अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी माने जाने वाले तुलसीराम सिलावट को जल संसाधन मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई,तो गोविंद सिंह को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्रालय दिया गया।

लेकिन राजनीतिक पंडितों ने तभी यह कहा कि शिवराज सिंह की राह इस बार उतनी आसान नहीं है जितनी बतौर मुख्यमंत्री पिछले तीन कार्यकालों के तेरह सालों में रही। पिछले कार्यकाल में बिना रोक-टोक सरकार चलाने वाले शिवराज सिंह चौहान के सामने शायद यह पहला मौका है जब वे टीम गठित करते वक्त पूरी तरह अपने मन की नहीं कर पाए।

अब एक बारगी फिर से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासत गरमा गई है। इसके साथ ही राजनीतिज्ञों ने गुणा गणित बैठाना शुरू कर दिया है। अगर बात विंध्य क्षेत्र से की जाए तो इस इलाके से मंत्री पद को लेकर कई बड़े चेहरे हैं जो शिवराज के पूर्व के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान दमखम वाले मंत्री मानें जाते रहे हैं। वहीं कुछ ऐसे चेहरे हैं जिन्हें अब तक मंत्री पद नसीब नहीं हुआ है। इस दफा वो कहीं ज्यादा दावेदार माने जा रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अबकी बार पुराने चेहरों के साथ नए चेहरों को भी जगह मिल सकती है।

यहां यह बता दें कि प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर शुरुआत से ही चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। 21 अप्रैल को गठित मंत्रिमंडल काफी छोटा रहा जिसके चलते कम लोगों को ही जगह मिल सकी। इससे विंध्य के किसी भी नेता को मंत्री बनने का मौका नहीं मिल पाया, जबकि विंध्य में भाजपा का अच्छा खासा प्रभाव रहा है। पूर्व में रीवा से राजेंद्र शुक्ला खनिज मंत्री हुआ करते थे। नागेंद्र सिंह नागौद भी मंत्री रह चुके हैं। पहले मंत्रिमंडल विस्तार में राजेंद्र शुक्ला को मंत्री पद नहीं मिला जिसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी हुईं। सियासी गलियारों में चल रही चर्चाओं में अबकी बार रीवा से राजेंद्र शुक्ला, सीधी से केदारनाथ शुक्ला, धौहनी से कुंवर सिंह टेकाम शिवराज सिंह, सिंगरौली से रामलल्लू वैश्य मंत्रिमंडल के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री के करीबी मानें जाने वाले चुरहट के शरदेंदु तिवारी की दावेदारी भी किसी से कमतर नहीं है। वहीं गिरीश गौतम, नागेंद्र सिंह नागौद का नाम भी चर्चाओं में है। वैसे चर्चा है कि यदि कुछ चेहरों को मंत्री पद नहीं मिला तो वो समर्थकों संग बगावती सुर भी अलाप सकते हैं और ऐसा होता है तो यह वर्तमान राजनीतिक माहौल में भाजपा के लिए मुश्किल खड़ा कर सकता है।

इस मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कांग्रेसी खेमे में भी सुगबुगाहट है। साथ ही शिवराज सिंह की सरकार बनवाने में मदद करने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया के राज्यसभा में जाने के बाद से उनके समर्थक भी आंख गड़ाए बैठे हैं।

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