शिवराज सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना के विरोध में अब राजमाता दिलहर भी

भाजपा की कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री कुसुम सिंह महदेले भी विरोध में
-कांग्रेस पहले से कर रही है विरोध
-मुख्यमंत्री तक को झेलना पड़ा है स्थानीय युवकों का विरोध

By: Ajay Chaturvedi

Published: 05 Apr 2021, 04:09 PM IST

सतना/पन्ना. केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में अब पन्ना राजघराने की सबसे बुजुर्ग सदस्य राजमाता दिलहर कुमारी सहित भाजपा की कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री कुसुम सिंह महदेले भी खड़ी हो गई हैं। बता दें कि एमपी सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का विरोध कांग्रेस काफी पहले से कर रही है। पिछले दिनों होली पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जब सपरिवार पन्ना आए थे, तो स्थानीय युवकों ने इस परियोजना के प्रति विरोध जताया था। शनिवार को जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व खजुराहो सांसद विष्णुदत्त शर्मा पन्ना पहुंचे, तो भी उन्हें कांग्रेस नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ा था। कांग्रेसजनों ने इस परियोजना को पन्ना के लिए घातक बताते हुए उन्हें ज्ञापन सौंपा।

पन्ना राजघराने की सबसे बुजुर्ग सदस्य राजमाता दिलहर

वैसे पन्ना जिले के नागरिक केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करने के लिए नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं। वाहनों में नारे लिखवाकर लोगों को जागरूक करने का भी प्रयास किया जा रहा है ताकि केन नदी को बचाने के इस अभियान में अधिक से अधिक लोग जुड सकें। पन्ना वासियों का कहना है कि केन नदी पर पहला हक उनका है, लिहाजा हमें हमारे हक से वंचित नहीं किया जा सकता।

स्थानीय लोगों के मुताबिक पन्ना जिले में पेयजल की आपूर्ति नलकूप, बोरिंग, कुंओं व तालाबों के जरिए होती है। इन जल स्त्रोतों में अत्यधिक कैल्शियम होने के कारण पन्ना की 90 फीसदी जनता उदर रोगों से पीड़ित है। ऐसे में यदि केन नदी का पानी जो पूरी तरह प्रदूषण से मुक्त है तथा जिस पर पन्नावासियों का पहला हक है, वह पेयजल के लिये उपलब्ध हो जाय तो पन्नावासियों को उदर रोगों से निजात मिल सकती है।

परियोजना की हकीकत से जनमानस को अवगत कराने की मुहिम में सक्रिय अंकित शर्मा बताते हैं कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से पन्ना जिले के किसी भी भू-भाग को कोई लाभ नहीं मिलेगा, जबकि 427 किमी लंबी केन नदी का अधिकांश भाग जो केन को विशाल बनाता है, जल आपूर्ति वाला यह क्षेत्र पन्ना जिले में ही स्थित है। केन नदी से प्रति वर्ष अरबों रुपयों की रेत निकलती है, जो इस परियोजना के मूर्तरूप लेने पर खत्म हो जाएगी। इससे पन्ना जिले को भारी राजस्व का नुकसान होगा। कहा ये भी जा रहा है कि पन्ना टाईगर रिजर्व के स्थापित होने में पन्नावासियों ने अत्यधिक बलिदान दिया है, और अब जब पन्ना टाइगर रिजर्व बाघों से आबाद हुआ व यहां पर्यटन के विकास की संभावनाएं बढ़ीं तो टाईगर रिजर्व को ही उजाडने की साजिश रच दी गई जो इस जिले के साथ घोर अन्याय है।

बताया जा रहा है कि प्रस्तावित ढोढन बांध चूंकि पन्ना टाईगर रिजर्व के कोर एरिया में आता है जो बाघों का प्रिय विचरण व रहने का स्थल है। इसी जगह पर अति दुर्लभ लंबी चोंच वाले गिद्घ भी रहते हैं। पार्क का यह अति महत्वपूर्ण हिस्सा डूब में आ जायेगा। बांध निर्माण के बाद पार्क का बफर एरिया निश्चित ही कोर एरिया में परिवर्तित होगा जिसके परिणाम स्वरूप पन्ना वासियों को फिर विस्थापन का दंश झेलना पडेगा। पन्ना टाईगर रिजर्व के कडे नियमों व बफर क्षेत्र के कारण पन्ना जिले के लोगों को मौजूदा समय अनेकों मुसीबतें झेलनी पडती हैं, यदि बाँध का निर्माण हुआ और कोर क्षेत्र को विस्तारित किया गया तो पन्नावासियों की मुसीबतें और बढ जायेंगी तथा रोजी-रोजगार के साधन भी खत्म हो जाएंगे।

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