मध्य भारत में 1897 से हुई थी रामलीला की शुरुआत, ब्रह्मचर्य के साथ हनुमान के लिए होती है ये शर्त

suresh mishra

Publish: Sep, 16 2017 04:43:14 (IST)

Satna, Madhya Pradesh, India
मध्य भारत में 1897 से हुई थी रामलीला की शुरुआत, ब्रह्मचर्य के साथ हनुमान के लिए होती है ये शर्त

श्री बिहारी रामलीला समाज: राम के पात्र को २० दिन भगवान स्वरूप सम्मान, ब्रह्मचर्य के नियम से बंधे होते हैं हनुमान

सतना। श्रीबिहारी रामलीला समाज की प्रथम रामलीला बिहारीजी मंदिर के सामने शहर के रामभक्तों ने महंत वृंदावन दास के मार्गदर्शन में १८९७ में शुरूकी थी। कुछ वर्षों बाद सुभाष पार्क में प्रारंभ किया। जो तब से निरंतर यहीं चल रही है। रामलीला समाज के सह मंत्री आशुषोत दुबे ने 'पत्रिकाÓ को बताया कि इस समय महंत बृजेन्द्र कुमार दुबे हैं।

उनके मार्गदर्शन में रामलीला कई वर्षों से हो रही है। रामभक्तों का सहयोग मिलता रहता है। रामलीला के पात्र प्रोफेशनल नहीं हैं। सभी रोजी-रोटी के लिए नौकरी या व्यापार करते हैं।

पांच प्रमुख किरदार
रामलीला के मंचन के दौरान छोटा-बड़ा से अधिक महत्वपूर्ण स्वरूप का किरदार है। श्रीराम का मुकुट धारण करने वाले को भगवान की तरह सम्मान दिया जाता है। यह व्यवस्था प्रांरभ से है। पांच प्रमुख किरदार निभाने वालों में श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, जानकी एवं हनुमान को बीस दिवस विशेष सम्मान दिया जाता है।

हनुमान के लिए ब्रह्मचर्य जरूरी
हनुमान का पात्र करने वाले कलाकार को दैनिक जीवन में भी बीस दिन ब्रम्हचर्य का पालन करना पड़ता है। प्रारंभ में सभी कलाकारों को श्रीबिहारी मंदिर में रहकर सभी नियमों का पालन करते हुए रामलीला का मंचन करना पड़ता था। आज समय के साथ कुछ नियम बदले हैं लेकिन सम्मान नहीं बदला है।

नए इफेक्ट की कोशिश
दुबे ने बताया, वर्षों बाद सभी के सहयोग से श्रीबिहारी रामलीला के मंचन को नए इफेक्ट देने की कोशिश की जा रही है। साउंड और विजुअल इफेक्ट देने का प्रयास किया जा रहा है। पहली बार संगीत नए रूप में दिया जा रहा है।

फेसबुक से लाइव
श्रीबिहारी रामलीला सन् १८९७ पेज फेसबुक पर प्रतिदिन दिखाया जाएगा। इसे पहला प्रयोग मानकर किया जा रहा है। कुछ राम भक्त वृद्ध होने के कारण सुभाष पार्क तक नहीं पहुंच पाते हैं। उनको ध्यान में रखकर पहला प्रयास किया गया है।

संगीत का आकर्षण
रामलीला मंचन को बांधने का प्रमुख कार्य संगीत का है। इसमें अरुण परौहा, बृजेन्द्र कुमार दुबे हैं जिनका साथ संगीत के अन्य साथी देते चले आ रहे हैं। सुभाष पार्क के पास से गुजरने वाला रामायण की चौपाइयों को संगीत के साथ सुनकर रुक जाता है।

सिर्फ ३५ कलाकार
रामलीला के मंचन में ३५ कलाकार हैं। अधिकतर दिन में नौकरी करने के बाद रात को मंचन करते हैं। कलाकारों में पुनीत, अंकित, शैलेन्द्र कुमार दुबे, मंगलेश्वर मिश्रा, ददोली पाण्डेय, नंदूलाल गर्ग, कमलेश गर्ग, नरेन्द्र त्रिपाठी, प्रमोद चतुर्वेदी, रामनाथ दाहिया, श्रीराम मिश्रा, नत्थूलाल नामदेव, दीपक मिश्रा आदि हैं।

पहले दिन हुआ नारद मोह का मंचन
श्रीबिहारी रामलीला समाज के तत्वाधान में आायोजित रामलीला महोत्सव में गुरुवार को नए कलेवर के साथ नारद मोह का मंचन देखने सैकड़ों रामभक्त सुभाष पार्क पहुंचे। प्रथम दिवस नारद मोह का मंचन हुआ। नारद का पात्र निभा रहे भाजपा नेता नरेन्द्र त्रिपाठी व्यक्तिगत कारणों से नहीं पहुंच पाए थे, जिस कारण नारद का पात्र नन्हू लाल गर्ग ने किया।

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