स्वच्छता मिशन की हकीकत: डस्टबिन रखा न शौचालय बनवाए और बात करते हैं साफ-सफाई की

कार्यशाला में भड़के पार्षद, स्वच्छता मिशन को लेकर गुरुवार को नगर निगम के सभागार में कार्यशाला का आयोजन किया गया।

By: suresh mishra

Published: 18 Aug 2017, 12:24 PM IST

सतना। स्वच्छता मिशन को लेकर गुरुवार को नगर निगम के सभागार में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें शहर के प्रबुद्धजन, आम नगरिक एवं पार्षदों ने विचार रखे। सभी ने शहर को स्वच्छ बनाने के लिए निगम प्रशासन की कार्यशैली पर जमकर सवाल उठाए। 'शहर को स्वच्छ कैसे बनाया जाए' इस विषय पर आयोजित कार्यशाला देखते ही देखते परिषद की बैठक में तब्दील हो गई।

आक्रोशित पार्षदों ने शहर में निगम प्रशासन द्वारा बनाए गए शौचालयों की गुणवत्ता एवं डोर-टु-डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था पर अधिकारियों को जमकर घेरा।  कहा, कचरा रखने के लिए निगम प्रशासन आज तक डस्टबिन जैसी मूलभूत सुविधा का प्रबंध नहीं कर सका। शहर में जो सार्वजनिक शौचालय बनवाए गए हैं वे उपयोग लायक नहीं हैं।

अधिकारियों के बीच कई बार नोकझोंक

लोगों के घरों से कई-कई दिन कचरे का उठाव नहीं किया जाता और बात करते हैं शहर को स्वच्छ बनाने की। निगम अधिकारियों की मनमानी पूर्ण कार्यशौली से भड़के पार्षदों एवं निगम के अधिकारियों के बीच कई बार नोकझोंक भी हुई। इस मौके पर महापौर ममता पाण्डेय, ननि अध्यक्ष अनिल जायसवाल, निगमायुक्त प्रतिभा पाल मौजूद रहीं।

जब याद आए पूर्व निगमायुक्त
कार्यशाला में निगम प्रशासन के कामकाज पर चर्चा करते हुए प्रमुखजनों ने लोकायुक्त में फंसे ननि के पूर्व आयुक्त सुरेन्द्र कथुरिया द्वारा तीन माह में किए गए कार्यों की सराहना की। ननि अध्यक्ष ने इसे स्वीकार करते हुए कहा कि जो अधिकारी शहर विकास के लिए कार्य करेगा जनता उसका साथ देगी।

कार्यों की समीक्षा

पूर्व आयुक्त कथुरिया ट्रैपिंग मामले में फंस गए यह अलग बात है। लेकिन, उन्होंने शहर विकास का जो खाका खींचा उससे शहर की जनता निगम के कर्मचारी तथा पार्षद सभी खुश थे। अध्यक्ष ने निगमायुक्त प्रतिभा पाल को सुबह नगर भ्रमण कर जनता की समस्या सुनने और अधिकारी-कर्मचारियों के कार्यों की समीक्षा कर उन्हें दायित्व बदलने की सलाह दी।

जनता तय करे अपने दायित्व
कार्यशाला में सभी को सुनने के बाद निगमायुक्त ने कहा, जनता एवं पार्षद शहर को स्वच्छ बनाने के लिए उठाए गए कदमों से असंतुष्ट जरूर हैं लेकिन यह कोई नहीं चाहता कि हम स्वच्छता सर्वेक्षण २०१८ से बाहर हो जाएं। जनता के सुझावों को ध्यान में रखते हुए हम शहर को विकास के रास्ते पर ले जाएंगे। हमारे पास जितने संसाधन हैं उन्हीं का उपयोग कर हमें शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण में टॉप पर ले जाने का संकल्प लेना होगा।

एनजीओ पर फोड़ा गंदगी का ठीकरा
कार्यशाला में स्वच्छता अभियान के तहत लोगों को जागरुक करने एवं कचरा कलेक्शन का कार्य संभाल रही स्वयंसेवी संस्था पार्षदों के निशाने पर रही। पार्षद कुदरतउल्ला बेग ने कहा, स्वच्छ भारत मिशन का कार्य देख रहा एनजीओ भ्रष्ट है। मैंने इसकी कई बार शिकायत की, लेकिन निगम प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।

एनजीओ के कामकाज पर असंतोष

राजेंद्र दाहिया ने कहा, फावड़ा निगम का, झाड़ू निगम का। एनजीओ पूरी मशीनरी निगम की उपयोग कर रहा है। फिर पैसा किस बात का ले रहा है। ननि अध्यक्ष ने भी स्वच्छता मिशन की जिम्मेदारी संभाल रहे एनजीओ के कामकाज पर असंतोष व्यक्त किया। कहा, अभी तक काम संतोषजनक नहीं है।

यह सुझाव आए
- शहर से बाहर हों डेयरी।
- हर गली-चौराहे पर रखे जाएं डस्टबिन।
- पालतू पशुओं को छोडऩे पर लगे प्रतिबंध।
- घर से कचरा उठाने वाहनों में तैनात हों कर्मचारी।
- कचरा कलेक्ट, परिवहन एवं अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार हो।
- सार्वजनिक शौचालयों की हो मरम्मत।
- तालाबों में न मिले गंदा पानी, कराएं सौंदर्यीकरण।
- हर व्यक्ति ले शहर को साफ करने का संकल्प।
- मृत जानवर हटाने चौराहों पर लगें हेल्पलाइन नंबर।

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