Rpf post suicide: परिजनों को परेशान करते रहे अफसर, पोस्ट में हंगामा, सिपाहियों और अफसरों से झूमाझटकी

घटना कैसे हुई इस पर आरपीएफ ने साधी चुप्पी, देररात वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त सतना पहुंचे

 

By: Pushpendra pandey

Published: 10 Jun 2021, 02:46 AM IST

सतना. रेल सुरक्षा बल की अभिरक्षा में एक युवक की मौत हुई है। उसकी मौत की वजह और कारण को घंटों तक छिपाया गया। परिजनों से भी आरपीएफ अधिकारी झूठ बोलते रहे। दोपहर दो बजे तक दिवस अधिकारी के रूप में मो मुख्तार खान की ड्यूटी बताई जा रही है। इनके साथ दिन ड्यूटी के अन्य कर्मचारी भी रहे। पोस्ट प्रभारी मान सिंह भी खबर पाते ही पहुंच गए थे। वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त यह नहीं बता सके कि इस मौत का जिम्मेदार किसे माना जाएगा/

मंगलवार को घर से निकला
आदित्य के सबसे बड़े भाई ललित पासी ने बताया कि वह चार भाई हैं। दूसरे नंबर का अमित इसके बाद आदित्य और फिर अनिल है। अनिल की शादी सतना में तय हुई है। इसलिए भाई के ससुराल जाने के लिए आदित्य मंगलवार को रीवा से सतना जाने के लिए रवाना हुआ था। सतना आने के बाद उसका किसी से संपर्क नहीं हुआ है। बुधवार की शाम करीब बजे आरपीएफ रीवा से कुछ लोग आए और आदित्य के बारे में पूछताछ कर चले गए। इसके आधे घंटे बाद इन्हीं में एक आरपीएफ जवान ने फोन पर सूचना दिया कि आदित्य की मृत्यु हो गई है।

जीआरपी का रास्ता दिखाया
आदित्य की मां मुन्नी अपनी बहू और बेटों के साथ आरपीएफ पोस्ट पहुंची तो यहां से इन परेशान परिजनों को कह दिया गया कि आदित्य को जीआरपी में रखा गया है। वह जीआरपी गए तो पता चला कि आरपीएफ में है। इस झूठ से मृतक के परिजन भड़क गए और पोस्ट में जाकर जमकर हंगामा किया। कई सिपाहियों व अफसरों से झूमाझटकी तक हुई। सीनियर कमांडेंट के आने के बाद जब यह स्पष्ट हुआ कि आरपीएफ पोस्ट में ही मौत हुई है तो सच्चाई परिजनों के सामने आई।

सीसीटीवी में कुछ नहीं
आरपीएफ पोस्ट में लाॉकअप के बाहर ड्यूटी रूम में सीसीटीवी कैमरा इस तरह लगाया गया है कि लॉकअप के अंदर का कुछ दिखाई नहीं दे। बताते हैं कि घटना के बाद कैमरे का रुख मोड़ दिया गया और साक्ष्य मिटाने की पूरी कोशिश की गई है। पता चला है कि मंडल स्तर के अधिकारियों के फरमान से यहां के अफसरों ने घटना को छिपाने और उसे दूसरा रूप देने की पूरी कोशिश की।

आरपीएफ को कितना अधिकार
आरपीएफ के वरिष्ठ सुरक्षा आयुक्त कह रहे हैं कि उनके जवानों ने मोबाइल चोरी के शक में आदित्य को पकड़ा और उसके कब्जे से फोन बरामद किया। तो फिर प्लेटफार्म से ही तत्काल संदेही को जीआरपी के सुपुर्द क्यों नहीं किया गया। आखिर आरपीएफ कौन सी वाहवाही लूटना चाह रही थी। सात साल से कम सजा वाले अपराधों में गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है और अगर किसी व्यक्ति को पूछताछ के लिए लाया जाता है तो उसे लॉकअप में बंद नहीं रख सकते। बावजूद इसके आरपीएफ ने लापरवाही बरती और फिर घटना व साक्ष्य छिपाने की पूरी मशक्कत करते रहे।

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IMAGE CREDIT: patrika
Pushpendra pandey Desk
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