Corona Effect नहीं मिले खरीदार, किसानों ने टमाटर की खड़ी फसल में छोड़ दिए जानवर

700 एकड़ में खड़ी फसल नष्ट, प्रति किसान 50 हजार से एक लाख तक नुकसान,लाकडाउन ने तोड़ी किसानों की कमर

By: Sukhendra Mishra

Published: 18 Apr 2020, 12:21 AM IST

सतना. दिनभर गुलजार रहने वाली बेरमी की टमाटर मंडी एक माह से बीरान है। बेरमा सहित आसपास के गांवों में जिन खेतों में टमाटर की फसल लहलहाती थी। वह इस साल समय से पहले ही उजड़ गए हैं। उजड़े खेतों में फसल के अवशेष समेटते किसानों के चेहरे पर छाई मायूसी यह बता रही थी कि लाकडाउन ने उन्हें गहरी चोट दी है। कोराना वायरस के चालते एक माह से लागू लाकडाउन ने उद्योग जगत के साथ खेती को भी तवाह कर दिया है। जिले के सब्जी उत्पादक एवं फूल की खेती करने वाले किसानों को उपज बेचने ग्राहक न मिलने के कारण उन्हें भारी आर्थिक क्षति हुई है। अच्छी गुणवत्ता का टमाटर उत्पादन करने वाले मैहर क्षेत्र के किसानों की फसल लाकडाउन के कारण नहीं बिकी तो मजबूर किसानों ने खड़ी फसल पर जानवर छोड दिए।

क्षेत्र में लगभग 700 एकड़ में लगी टमाटर की फसल किसानों को प्रति दिन 500 से एक हजार रूपए की आय देती थी । इस वर्ष लाकडाउन के कारण पूरी तरह से तवाह हो चुकी है। इससे जिले के सब्जी उत्पादक किसानों को 50 हजार से एक लाख रूपए की की आर्थिक क्षति हुई है।

बिक्री से नहीं निकल रही थी लागत

बेरमा के किसानों का कहना है कि कोरोना वायरस व लाकडाउन के कारण वाहन न चलने से 20 मार्च के बाद दूसरे प्रदेशों में टामाटर की आपूर्ति बंद हो गई। इससे टमाटर के दाम गिर गए। मंडी में टमाटर के भाव 2 रूपए किलो मिलने के कारण टमाटर की तोड़ाई व परिवहन की लागत भी नहीं निकल पा रही थी। इसलिए किसानों ने खेत से टमाटर की तुड़ाई बंद कर दी। तुड़ाई न होने से पूरी फसल खेत में भी नष्ट हो गई।

आर्थिक तंगी में फंसे किसान मदद की दरकार

ए ग्रेण टमाटर उत्पादन के लिए जिले की 8 राज्यों के अलग पहचान हैं। अकेले बेरमा स्थित टमाटर मंडी से प्रतिदिन 40 गाड़ी टमाटर दूसरे राज्यों को भेजा जाता था। लेकिन लाकडाउन के कारण बीते एक माह से एक गाड़ी टमाटर भी जिले से बाहर नहीं गया। बिक्री न होने कारण किसानों ने खेत उजाड़ दिए। इससे रोज होने वाली आय बंद हो गई हैं। किसान राकेश साहू का कहना है टमाटर की बिक्री से चार माह इतनी आय हो जाती थी कि इससे सालभर का खर्च चलता था। लेकिन इस वर्ष टमाटर की फसल न बिकने के कारण वह आर्थित तंगी से जूझ रहे हैं। यदि सरकार से मदद नहीं मिली तो कृषक परिवार भूखों मर जाएगे।

टमटार की फसल इस साल बहुत अच्छी थी, दूसरे राज्यों में मांग अधिक होने के कारण भाव भी अच्छे मिल रहे थे। लेकिन लाकडाउन ने हमारी मेहनत पर पानी फेर दिया। जब फसल निकलने लगी तो बिक्री ही बंद हो गई। ग्राहक न मिलने के कारण फसल नष्ट करनी पड़ी।

कैलाश साहू, टमाटर उत्पादक किसान

सतना में फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की मांग ढेड़ दशक से की जा रही है। यदि जिले में टमाटर उद्योग से संबंधित कोई यूनिट होती तो आज किसानों को अपनी खड़ी फसल पर जानवर छोडऩे की नौवत नहीं आती। लाकडाउन से सब्जी उत्पादन जिन किसानों की फसल खराब हुई है उन्हें आर्थिक मदद मिलनी चाहिए।

महेन्द्र सिंह, संभागीय अध्यक्ष किसान यूनियन

जब मैं मंडी अध्यक्ष था तो मैहर बायपास में सब्जी एवं फूल मंडी खोलने 10 एकड़ जमीन आरक्षित करवाई थी। लेकिन 15साल बाद जिले में थोक सब्जी मंडी नहीं खुल सकी। जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण सब्जी उत्पादन किसानों को सब्जी बिक्री के लिए प्लेटफार्म नहीं मिल पा रहा है।

जगदीश सिंह, पूर्व मंडी अध्यक्ष सतना

Sukhendra Mishra Reporting
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