सतना कोरोना ओरेंज जोन से बाहर निकल कर ग्रीन जोन में आया, अब कोई कोरोना पॉजीटिव नहीं

इधर बिना 14 दिन पूरे हुए क्वारंटीन सेंटर से जेल स्टाफ घर भेजा गया

इधर कोरोना के नए प्रभारी बनाए गए डॉ प्रवीण श्रीवास्तव

 

By: Ramashanka Sharma

Published: 18 Apr 2020, 01:02 AM IST

सतना. इंदौर से रासुका के आरोपी पत्थरबाज सतना केन्द्रीय जेल पहुंच कर कोरोना पॉजीटिव पाए गए थे। इंदौर के दोनों कैदियों की जांच सतना में होने के कारण पॉजीटिव केस की गणना सतना जिले में हुई थी। उधर कोरोना केस के आधार पर जिलों की निर्धारित ग्रेडिंग के अनुसार दो पॉजीटिव केस के कारण सतना जिले को ऑरेंज जोन दिया गया था। इस स्थिति को देखते हुए कलेक्टर अजय कटेसरिया ने शासन को इस संबंध में पत्र लिखा था और स्पष्ट किया था कि ये दोनों कोरोना पॉजीटिव सतना के समुदाय से नहीं है और न ही इनका सामुदायिक संपर्क हुआ है। इस जानकारी से राज्य शासन संतुष्ट होते हुए सतना को कोरोना ग्रीन जोन में डाल दिया है। साथ ही मुख्यमंत्री ने भी अपनी वीसी में आज इसकी जानकारी दे दी है।

यह लिखा था पत्र

कलेक्टर सतना ने आयुक्त स्वास्थ्य विभाग को लिखे पत्र में बताया था कि प्रदेश स्तर पर कोरोना का जो हेल्थ बुलेटिन जारी हो रहा है उसमें सतना से दो कोरोना पॉजीटिव दिखाए जा रहे हैं वे दोनों सतना समुदाय से नहीं है। ये दोनों बंदी इंदौर के हैं और जिन्हें कलेक्टर इंदौर के आदेश पर सतना केन्द्रीय जेल स्थानान्तरित किया गया था। इन्हें शुरू से ही क्वारंटीन में रखा गया था। रिपोर्ट पॉजीटिव आते ही इन्हें रीवा मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया और न्यायालय के आदेश के अनुक्रम में उन्हें भोपाल मेडिकल कालेज भेजा जा चुका है। इन बंदियों के प्रथम, द्वितीय और तृतीय संपर्क के लोगों की संख्या २३ है। जिन्हें भी क्वारंटीन किया जा चुका है। इनके परिवार भी होम क्वारंटीन है। जेल परिसर और जेल कालोनी कंटेनमेंट एरिया घोषित है। ये इंदौर समुदाय के थे और सतना समुदाय में कोई भी केस कोरोना पॉजीटिव नहीं है। लिहाजा सतना की गणना के कोरोना पॉजीटिव की संख्या विलोपित की जाए। इसका नतीजा यह रहा कि स्वास्थ्य विभाग के हालिया जारी आंकड़े में सतना अब ग्रीन जोन में शामिल कर लिया गया है। उधर आज की वीसी में मुख्यमंत्री ने भी सतना को ग्रीन जोन में बताया है।

कोरोना व्यवस्था सुधारने डॉ प्रवीण को जिम्मेदारी

कोरोना फाइट के लिये अब तक जो भी इंतजाम स्वास्थ्य महकमे की ओर से किये जा रहे थे उससे कलेक्टर लगातार असंतुष्ट नजर आ रहे थे। कोरोना व्यवस्थाओं को लेकर सीएमएचओ की सक्रियता अपेक्षित नहीं नजर आ रही थी। जो सजगता और सक्रियता होनी चाहिए ती उसमें सीएमएचओ और नोडल खरे नहीं उतर रहे थे। जिला प्रशासन से जारी होने वाले आदेश और निर्णयों के पालन में भी अपेक्षित तेजी नहीं थी। आपात स्थितियों में भी सामान्य काल की तरह काम हो रहा था। इससे असंतुष्ट नजर आए कलेक्टर ने अब कोरोना की जिम्मेदारी डॉ प्रवीण श्रीवास्तव को सौंपी है। अब सीएमएचओ अपने मूल काम करेंगे। कोरोना का पूरा काम डॉ श्रीवास्तव के जिम्मे होगा।

बिना प्रोटोकॉल पूरा किये छोड़ दिया जेल स्टाफ

उधर एक बड़ा सवाल जीएनएम हास्टल में रखे गये जेल स्टाफ की क्वारंटीन सेंटर से छुट्टी को लेकर खड़ा हो गया है। नियमानुसार कोरोना पॉजीटिव के संपर्क की संभावना में क्वारंटीन किये गये लोगों को तय प्रोटोकॉल के अनुसार १४ दिन क्वारंटीन रखा जाता है। क्योंकि कोरोना का इक्यूबेशन पीरियड १४ दिन का होता है। इक्यूबेशन पीरियड वह होता है जिसमें वायरस से पीडि़त इंसान में कोरोना के लक्षण आते हैं। इसलिये पॉजीटिव के संपर्क वालों को १४ दिन तक क्वारंटीन करने का प्रोटोकॉल है। लेकिन यहां उससे आधे समय में पहली रिपोर्ट निगेटिव आते ही छोड़ दिया गया। जो कि नियमानुसार गलत है।

कलेक्टर ने किया नये आइसोलेशन का निरीक्षण

उधर भारत सरकार की कोरोना इलाज की नई गाइड लाइन आने के बाद जीएनएम हॉस्टल को नये सिर से क्वारंटीन और आइसोलेशन सेंटर के रूप में तैयार किया गया है। इसको लेकर कलेक्टर ने शुक्रवार की देर शाम यहां का निरीक्षण किया। इस दौरान नये कोरोना प्रभारी डॉ प्रवीण श्रीवास्तव भी मौजूद रहे। कलेक्टर ने निर्णय लिया कि अगर कोई पॉजीटिव आता है तो सबसे पहली प्राथमिकता उसे सभी के संपर्क से दूर रखने और उसकी गतिविधियां न्युनतम की जाना होगा। ऐसे में निर्णय लिया गया ऐसे लोगों को सबसे उपर के फ्लोर पर रखा जाए। इसके अनुरूप व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए। साथ ही यहां इलाज के लिये आवश्यक उपकरण, दवाओं की उपलब्धता भी देखी गई। इसके बाद जिला अस्पताल का निरीक्षण किया।

Ramashanka Sharma Reporting
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