scriptsatna: Yogesh became mayor after gaining the confidence of 47 voters | satna: 47 फीसदी मतदाताओं का विश्वास हासिल कर योगेश बने महापौर | Patrika News

satna: 47 फीसदी मतदाताओं का विश्वास हासिल कर योगेश बने महापौर

24916 मतों से कांग्रेस प्रत्याशी एवं विधायक सिद्धार्थ को हराया

6 प्रत्याशियों की जब्त हो गई जमानत

 

 

सतना

Published: July 18, 2022 10:40:24 am

सतना। सतना नगर निगम महापौर के त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी योगेश ताम्रकार ने 63292 मत पाकर विजय हासिल की। उन्होंने अपने निकटतम कांग्रेस प्रत्याशी एवं विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा को 24916 मतों से हराया। सिद्धार्थ कुशवाहा को 38376 मत मिले। कांग्रेस से बगावत कर बसपा से चुनाव मैदान में उतरे सईद अहमद को 26151 मतों से संतोष करना पड़ा। लेकिन इनके मैदान में आने से न केवल मुकाबला त्रिकोणीय हो गया बल्कि भाजपा की राह भी आसान हो गई। मत प्रतिशत की स्थिति अगर देखें तो योगेश को 46.77 फीसदी मतदाताओं ने वोट किया तो सिद्धार्थ पर 28.22 फीसदी मतदाताओं ने ही विश्वास जताया। सईद अहमद के पक्ष में 19.23 फीसदी मतदाताओं ने वोटिंग की। विगत चुनाव की स्थिति अगर देखे तो भाजपा प्रत्याशी ममता पाण्डेय ने 65093 मत पाकर कांग्रेस प्रत्याशी उर्मिला त्रिपाठी को 31785 मतों से जीत हासिल की थी। इस चुनाव में भाजपा, कांग्रेस और बसपा के प्रत्याशियों को छोड़ कर शेष सभी 6 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई है। 1070 मतदाताओं ने किसी भी प्रत्याशी को अपनी पसंद में शामिल नहीं करते हुए नोटा पर विश्वास जताया। आप पार्टी के जरिये राजनीति शुरू करने वाले लोक निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त ईई बसंत विश्वकर्मा को 4015 मत मिले। इस बार पार्षदों की स्थिति अगर देखें तो भाजपा के 20, कांग्रेस के 19, बसपा का 1और 5 पार्षद निर्दलीय जीते हैं।
satna: 47 फीसदी मतदाताओं का विश्वास हासिल कर योगेश बने महापौर
24916 मतों से कांग्रेस प्रत्याशी एवं विधायक सिद्धार्थ को हराया
शुरू से अंत तक योगेश ने बनाए रखी बढ़त

भाजपा प्रत्याशी योगेश ताम्रकार ने पहले राउण्ड से कांग्रेस प्रत्याशी से बढ़त हासिल कर ली थी जो आखिरी तक बनी रही। लगातार इनका सीधा मुकाबला कांग्रेस से ही रहा। पहले चक्र में योगेश को सिद्धार्थ से 3876 मतों की बढ़त हासिल हुई। दूसरे राउण्ड में योगेश 3912, तीसरे राउण्ड में 3939, चौथे में 3899, पांचवे में 3252, छठवें में 2424, सातवें में 1913, आठवें में 940, नौवें राउण्ड में 225, दसवें राउण्ड में 307 और आखिरी ग्यारहवें चक्र में योगेश ने सिद्धार्थ से 229 मतों से बढ़त हासिल की। उधर तीसरे नंबर पर रहे बसपा प्रत्याशी नौंवे चक्र को छोड़ कर सभी चक्र में कांग्रेस प्रत्याशी से पीछे रहे। नौंवे चक्र में सईद सिर्फ 1 वोट से सिद्धार्थ से आगे रहे।
इनकी हुई जमानत जब्त
नगर निगम चुनाव में 1,35,953 मतदाताओं ने मतदान किया था। ऐसे में प्रत्याशियों को जमानत जब्त होने से बचाने के लिये डाले विधिमान्य मतों का छठवां हिस्सा 22,659 मत पाना जरूरी था। लेकिन 6 प्रत्याशी ऐसे रहे जिनकी जमानत जब्त हो गई। इनमें से 5 प्रत्याशी तो ऐसे रहे जिन्हें नोटा से भी कम मत मिले। नोटा को 1070 मत मिले हैं।
प्रत्याशी - मिले मत

अरुण वर्मा - 781

बसंत विश्वकर्मा - 4015

बृजेश यादव - 594

रवीना विपिन त्रिवेदी - 431

रविशंकर यादव - 820

संतोष कुमार जायसवाल - 423
प्रत्याशियों को अपने वार्ड में मतदाताओं का मिला भरपूर विश्वास
भाजपा प्रत्याशी योगेश ताम्रकार वार्ड क्रमांक 7 के निवासी हैं। इन्हें अपने वार्ड में कुल 1281 मत मिले हैं तो कांग्रेस प्रत्याशी को यहां से 498 मत और बसपा प्रत्याशी सईद अहमद को 218 मत मिले हैं। कांग्रेस प्रत्याशी सिद्धार्थ कुशवाहा का निवास वार्ड क्रमांक 14 में हैं। इन्हें अपने वार्ड से 2353 मत मिले हैं तो भाजपा प्रत्याशी को यहां 1819 मत और बसपा प्रत्याशी को 720 मत मिले हैं। बसपा प्रत्याशी सईद अहमद वार्ड 35 के निवासी है। इन्हें अपने वार्ड से 1674 मत मिले हैं। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 367 व भाजपा प्रत्याशी को 65 वोट मिले हैं।
सिर्फ एक वोट से जीती ममता

पार्षदी के चुनाव में वार्ड नंबर 15 में सबसे कड़ा मुकाबला रहा। यहां भाजपा की पूर्व पार्षद ममता मुरारी सोनी ने निकटतम कांग्रेस प्रत्याशी सरला जेपी कुशवाहा से 1 वोट से जीत हासिल की है। ममता को कुल 1076 वोट मिले वहीं सरला को 1075 वोट पर संतोष करना पड़ा। ममता दूसरी बार शहर सरकार का हिस्सा बनेंगी।
महापौर के दावेदार रहे अनिल नहीं जीत सके पार्षदी

भाजपा से महापौर की टिकट के प्रबल दावेदार रहे अनिल जायसवाल अपनी पार्षदी नहीं बचा सके। पिछली बार स्पीकर जैसा महत्वपूर्ण पद संभाल चुके अनिल इस बार महापौर की तैयारी में लगे थे। लेकिन महापौर की टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने पार्षद पद के लिये चुनाव लड़ने को तैयार हो गए। लेकिन इस बार वे कांग्रेस के पंकज कुशवाहा से 181 वोट से हार गए। अनिल को 1202 तो पंकज को 1383 वोट मिले। अनिल की हार सतना नगर निगम चुनाव में बड़ी हार मानी जा रही है। क्योंकि वे इस बार भी स्पीकर पद के दावेदार माने जा रहे थे। अब भाजपा को स्पीकर के लिये नया चेहरा तलाशना होगा। अनिल जायसवाल नगर निगम में पहली बार चुनाव हारे हैं और इनका चुनाव रथ एक नये प्रत्याशी ने रोका है।
पूर्व नेता प्रतिपक्षों को भी लगा झटका

इस चुनाव में नगर निगम के दो नेता प्रतिपक्षों को तगड़ा झटका लगा है। पिछली परिषद में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में कांग्रेस के वार्ड 29 से पार्षद शैलेन्द्र सिंह रहे। इस बार वार्ड महिला आरक्षित हो जाने पर कांग्रेस ने उनकी पत्नी कल्पना को टिकट दिया था। यहां से भाजपा प्रत्याशी रानी शुक्ला मैदान में थी जो जिला मंत्री बालकृष्ण शुक्ला की पत्नी है। रानी शुक्ला ने कल्पना सिंह को 62 मतों से पराजित किया है। रानी को 637 तो कल्पना को 575 वोट मिले। इसी तरह एक और पूर्व नेता प्रतिपक्ष कुदरत उल्ला बेग की पत्नी बसपा प्रत्याशी शाहीन बेगम भी हार गई हैं। ये कांग्रेस से टिकट मांग रहीं थी लेकिन टिकट नहीं मिलने पर पाल बदल कर बसपा खेमे से चुनाव मैदान में उतरी थीं। यहां कांग्रेस प्रत्याशी प्रिया त्रिपाठी को 566 वोट, भाजपा प्रत्याशी रीता शर्मा को 226 और बसपा प्रत्याशी शाहीन को 375 मत मिले। यहां से निर्दलीय प्रत्याशी सूफिया खान 651 मत पाकर जीत हासिल की हैं।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष के लिये संकट के बादल

वार्ड 35 से लगातार कांग्रेस का परचम फहराने वाले इकबाल माई डियर को दरकिनार कर शहर कांग्रेस अध्यक्ष मकसूद अहमद ने इस बार अपने बेटे आमिर अहमद को टिकट दिलवाई थी। इस टिकिट परिवर्तन को लेकर कांग्रेस के अंदर खाने में बड़ा बवाल भी हुआ था। इससे नाराज इकबाल माई डियर ने कांग्रेस से बगावत करते हुए अपने बेटे मोहम्मद तारिक रजा (फुरसत) को बसपा की टिकट से चुनाव मैदान में उतारा। जब रविवार को नतीजे सामने आए तो बसपा प्रत्याशी मोहम्मत तारिक ने कांग्रेस प्रत्याशी आमिर को 423 वोट से धराशायी कर दिया। इस परिणाम के बाद अब शहर अध्यक्ष कांग्रेस अपनी पार्टी में ही सवालों में घिरते नजर आ रहे हैं। यहां से भाजपा प्रत्याशी मो. उस्मान को 36 वोट और आप प्रत्याशी को 37 वोट मिले हैं।
दो मतदान केन्द्रों में भाजपा को मिले सिर्फ 1-1 वोट
इस बार के चुनाव में तीन मतदान केन्द्र ऐसे रहे हैं जहां से भाजपा प्रत्याशी योगेश ताम्रकार दहाई का आंकड़ा भी नहीं पा सके हैं। दो केन्द्रों में तो उन्हें सिर्फ एक-एक वोट मिले हैं। मतदान केन्द्र क्रमांक 217 शा. प्राथमिक शाला कामता टोला कक्ष क्रमांक 1 में सिर्फ 4 वोट मिले हैं तो केन्द्र क्रमांक 219 हाई स्कूल कामता टोला कक्ष क्रमांक 11 में सिर्फ 1 वोट मिला। इसी तरह से केन्द्र क्रमांक 220 दर्सगाहे स्लामिया हाईस्कूल नजीराबाद कक्ष क्रमांक 1 में भी इन्हें सिर्फ 1 वोट मिला।
यहां मिले प्रत्याशियों को सबसे ज्यादा मत

भाजपा प्रत्याशी योगेश ताम्रकार को केन्द्र क्रमांक 149 सिंधु उमावि रीवा रोड में सबसे ज्यादा 415 मत मिले। इसी तरह से कांग्रेस प्रत्याशी सिद्धार्थ कुशवाहा को केन्द्र क्रमांक 92 शा. पॉलीटेक्निक कालेज में 459 मत मिले। वहीं बसपा प्रत्याशी सईद अहमद को केन्द्र क्रमांक 217 प्राथमिक शाला कामता टोला में 437 मत मिले।
परिषद में फिर नजर आएंगे ये चेहरे
इस बार नगर निगम परिषद में कई पुराने चेहरे देखने को मिलेंगे। पहले भी चुनाव जीत कर पार्षद के तौर पर ये निगम परिषद में शामिल रहे हैं। ऐसे चेहरों में भाजपा से राजेश चतुर्वेदी पालन, नम्रता सुशील सिंह, गोपी गेलानी, सूर्यपाल सिंह, ममता मुरानी सोनी हैं। भाजपा से टिकट कटने पर बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतने वालीं मीना माधव भी पहले पार्षद रह चुकी हैं। कांग्रेस से रजनी रामकुमार तिवारी, रावेन्द्र सिंह मिथलेश, अशरफ अली बाबा, कमला सिंह, राजेश सूर्यवंशी शामिल हैं।
इनके परिवार की महिलाएं बनी पार्षद

आरक्षण की वजह से कई पूर्व पार्षद चुनाव लड़ने से वंचित रह गये। लेकिन पार्टियों ने इनके परिवार पर ही भरोसा जताते हुए इनके घर की महिलाओं को प्रत्याशी बनाया। इनमें से इस बार चुनाव जीतने वालों में पार्षद प्रसेनजीत सिंह तोमर की पत्नी वंदना सिंह तोमर, नीरज शुक्ला की मां कुसुमकली शुक्ला, अजय प्रताप सिंह की पत्नी मनीषा सिंह, अनिल गुप्ता की पत्नी अर्चना गुप्ता और पुष्पराज कुशवाहा की पत्नी प्राची कुशवाहा ने जीत हासिल की है।
ये पहली बार बने पार्षद

इस बार की परिषद में कई ऐसे चेहरे हैं जो पहली बार पार्षद बने हैं। इनमें भाजपा से अभिषेक तिवारी अंशू, महेन्द्र पाण्डेय, आदित्य यादव, प्रवीण जैन पीके, रमेश शुक्ला गुड्डा, महेन्द्र पाण्डेय पहली बार नगर निगम के सदन में जाएंगे। कांग्रेस से अमित अवस्थी सन्नू, पंकज कुशवाहा, मनीष टेकवानी, कृष्णकुमार सिंह, तिलकराज सोनी, उमेश मलिक शामिल हैं। बहुजन समाज पार्टी से मोहम्मद तारिक रजा फुरसत और निर्दलीय प्रत्याशी संजू यादव भी बतौर पार्षद पहली बार नगर निगम की ड्यौढ़ी चढ़ेंगे।
परिणाम के बाद सिद्धार्थ भोपाल रवाना

नगर निगम परिणाम के बाद कांग्रेस प्रत्याशी सिद्धार्थ कुशवाहा सड़क मार्ग से भोपाल के लिये रवाना हो गए हैं। माना जा रहा है कि यहां उनकी मुलाकात कमलनाथ से होगी। इस मुलाकात में वे निगम चुनाव के परिणामों पर चर्चा करने के बाद अपने साथ हुए भितरघात और बिखरी रही कांग्रेस को लेकर चर्चा कर सकते हैं।
सीएम के रोड शो ने बदला माहौल, कमलनाथ का संदेश नीचे तक नहीं पहुंच सका
नगर निगम चुनाव के लिये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ दोनों ने चुनाव प्रचार किया। सीएम ने सतना में न केवल सभा की बल्कि रोड शो भी किया। सीएम का रोड शो भाजपा के लिये बड़ी संजीवनी साबित हुआ और इसके अगले दिन से माहौल में बदलाव भी देखने को मिला था। वहीं कमलनाथ की सभा तो प्रभावी रही लेकिन उनका संदेश नीचे मतदाताओं तक नहीं पहुंच सका। स्थिति यह रही कि कमलनाथ की सभा से शहर के बड़े कांग्रेसी चेहरे नदारद रहा जिसका नकारात्मक संदेश कांग्रेस प्रत्याशी के लिये गया। वहीं संगठनात्मक खामी के चलते कमलनाथ का संदेश प्रभावी तौर पर मतदाताओं तक नहीं पहुंच सका।
भाजपा की जीत के 5 बड़े कारण

  • योगेश ताम्रकार की साफ स्वच्छ और विकासशील छवि से साथ इनका विजन के साथ मैदान में आना
  • मुख्यमंत्री का रोड शो और आम सभा
  • भितरघात पर संगठन की ओर से लगाम
  • भाजपा के बड़े चेहरों का प्रत्याशी के साथ मिलकर प्रचार में शामिल होना
  • प्रदेश और केन्द्र की योजनाओं का लोगों को मिला लाभ
कांग्रेस की हार के 5 बड़े कारण
  • कांग्रेस से बगावत कर सईद का बसपा से लड़ जाना जिसे एक बड़ा वर्ग कांग्रेस से दूर हो गया
  • आला कमान से मिले फ्री हैण्ड की वजह से संगठन सक्रिय भूमिका में नहीं रह सका
  • कांग्रेस के सभी बड़े चेहरे या तो घर बैठ गए या फिर नुकसान करने का काम किया
  • नाराज लोगों के मान मनौव्वल पर भी गंभीरता नहीं बरती गई।
  • पूर्व महापौर की पार्टी में ज्वाइनिंग करवा कर लाभ तो लिया लेकिन नुकसान ज्यादा हुआ
  • एक वर्ग विशेष ने इन्हें जातिवर्ग का प्रत्याशी बताते हुए दुष्प्रचार करने में सफल रहा जिसका असर अंतिम दो दिनों में बड़े बदलाव के रूप में हुआ।
सईद ने इस तरह बिगाड़ा कांग्रेस का खेल
शुरुआती दौर में जब कांग्रेस ने अपनी टिकिट फाइनल की थी उस वक्त प्रत्याशी सिद्धार्थ को काफी मजबूत माना जा रहा था और भाजपा भी सकते में थी। लेकिन जैसे ही सईद अहमद ने कांग्रेस से नाता तोड़ते हुए बसपा का दामन थाम महापौर चुनाव लड़ने की घोषणा की उसके साथ ही कांग्रेस की उल्टी गिनती शुरू हो गई। मुस्लिम वर्ग का एक बड़ा वोटर उनके हाथ से निकल गया। इसी तरह से एससी वर्ग भी जो कांग्रेस के खेमे में था वह एक बार फिर से बसपा के हाथी पर सवार हो गया। उधर सईद ने मंदिर कार्ड खेल कर कांग्रेस के एक बड़े मतदाता वर्ग को अपने पाले में ले आए। इन्होंने कांग्रेस से नाराज लोगों से भी संधियां करते हुए कांग्रेस को बड़ा भितरघात करवा कर नुकसान पहुंचाया। सईद ने भी बड़े सधे तरीके चुनाव प्रचार किया जिसका सीधा नुकसान कांग्रेस को हुआ।
2023 के लिये संकेत है निगम चुनाव

नगर निगम चुनावों को 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव का प्री टेस्ट भी माना जा रहा है। कम से कम सतना के लिये तो यह स्पष्ट नजर आ रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिस तरीके से इस बार कांग्रेस बिखर चुकी थी वह रैगांव के सबक का दूसरा पहलू था। रैगांव में कांग्रेस ने मिलकर और संगठन को सक्रिय करके चुनाव लड़ा था जिसका नतीजा काफी बेहतर रहा। लेकिन इसके ठीक विपरीत निगम चुनाव में कांग्रेस के सभी प्रभावी चेहरे घर बैठ गए। सारे कद्दावर नेता बैकडोर से कांग्रेस प्रत्याशी के हित में खड़े नजर नहीं आए। दूसरा इस बार जिस तरीके से वोटिंग के दो दिन पहले वर्ग विशेष का भाजपा की ओर डायवर्सन हुआ है वह भी एक संकेत है। दो प्रभावी वर्ग क्षत्रिय और ब्राह्मण के सत्ता पक्ष से असंतुष्ट मतदाताओं ने भी अचानक से बसपा से रुख मोड़ते हुए भाजपा के पाले में चले गये। इसकी वजह कांग्रेस प्रत्याशी के जातीय समीकरण का एक अंडर करेंट बड़ी तेजी से मतदाताओं तक फैलना रहा। वहीं एक बड़ा फैक्टर जातीय रूप से सामने आया है। हालांकि आरक्षित सीट होने से सभी प्रत्याशी पिछड़ा वर्ग से ही थे लेकिन जिले में पिछड़े वर्ग में या तो पटेल या फिर कुशवाहा ही प्रभावी भूमिका में रहा है और पार्टियां जिस तरीके से इन पर भरोसा दिखा रही है उससे सामान्य वर्ग का बड़ा तबका इन वर्गों से असंतुष्ट होता जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस प्रत्याशी को इस असंतोष का भी सामना भी करना पड़ा है। अब अगर पार्टीगत स्थितियों को अगर देखें तो कांग्रेस एक तरीके इस चुनाव के बाद पूरी तरह से बिखर चुकी है तो भाजपा को भी कई सबक सीखने होंगे। हालांकि यह सबक उनके अंदरूनी पड़ताल पर ही मिलेंगे लेकिन भाजपा जीत तो गई है लेकिन उसका कैडर इस बार वैसा नहीं दिखा जैसे भाजपा चुनाव लड़ती दिखती है। जीत के बाद भी यह दर्द भाजपा प्रत्याशी को अंदर तक टीसता रहेगा।
satna: 47 फीसदी मतदाताओं का विश्वास हासिल कर योगेश बने महापौर
IMAGE CREDIT: patrika
बोले योगेश- नगर निगम को आमजन की संस्था बनाएंगे
सतना। नव निर्वाचित महापौर योगेश ताम्रकार ने कहा कि नगर निगम से जो आम जनों की दूरी हो गई है उसे खत्म करते हुए इसे आम जन की संस्था बनाएंगे। इसके लिये एक कॉल सेंटर और हेल्पलाइन बनाई जाएगी ताकि आम जनों को तत्काल उनकी समस्याओं से निजात मिल सके। निगम में एक सिटिजन फोरम बनाया जाएगा जिसमें निगम के विकास के लिये आमजन अपने सुझाव दे सकेंगे। नियमित तौर पर जनता दरबार लगाया जाएगा जिसके जरिये समस्याओं का शीघ्र निराकरण किया जाएगा। सम्पत्ति कर का सरलीकरण किया जाएगा। बच्चों की प्रतिभा निखारने के लिये ओपन थियेटर स्थापित किया जाएगा। हाट बाजार के माध्यम से ठेला व्यापारियों को व्यवस्थापन किया जाएगा। स्वच्छ जल की नियमिति सप्लाई की व्यवस्था की जाएगी।
जनता की हैं योगेश से बड़ी अपेक्षाएं

योगेश ताम्रकार से जनता की भी बड़ी अपेक्षाएं हैं। सबसे बड़ी शहर की समस्या बेपटरी यातायात है। इसके बाद सीवर लाइन से खस्ताहाल हो चुकी सड़कों का निर्माण और काफी पहले बनी सड़के जो अब जर्जर हो चुकी हैं उन्हें वापस सही करना प्रमुख है। रीवा की तर्ज पर शहर का सुनियोजित विकास कर सतना का पुराना वैभव वापस शहरवासी देखना चाहते हैं। निगम की जल निकासी व्यवस्था अभी भी कई स्थानों पर काफी खराब है। निगम में इस समय टैक्स काफी लग रहा है और इससे हर शहरवासी हलाकान है। शहर का फैलाव व विकास अभी एक ही दिशा में हो रहा है। इसे नियोजित करते हुए समरूप विकास जनता चाहती है। अतिक्रमण शहर की बड़ी समस्या है। कुछ सौ लोगों के कारण पूरे शहर की जनता परेशान है। इस पर व्यापक जनहित में ठोस कदम उठाने की अपेक्षा जनता रखती है।

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