जब यज्ञ का आयोजक सन्यासी हो तो उस यज्ञ के मायने बदल जाते हैं

जब यज्ञ का आयोजक सन्यासी हो तो उस यज्ञ के मायने बदल जाते हैं
Shatchandi Mahayaguti in the Shivanand Yog Ashram

Jyoti Gupta | Updated: 16 Jul 2019, 02:36:28 PM (IST) Satna, Satna, Madhya Pradesh, India

शतचंडी महायज्ञ की पूर्णाहुति शिवानंद योग आश्रम में

सतना. वैदिक व पौराणिक मंत्रो के निनांद व सुमधुर भजन कीर्तन के मध्य सेमवार को शिवानन्द योगाश्रम में पिछले चार दिनों से चल रहे शतचंडी महायज्ञ की पूर्णाहुति हुई । गुरु पूर्णिमा महोत्सव अंतर्गत यह महायज्ञ आश्रम के अधिष्ठाता व विश्व प्रसिद्द बिहार योग के जनक परमहंस स्वामी सत्यानन्द सरस्वती को समर्पित किया गया। शहर व दूर दूर से आए श्रद्धालूओं ने ब्रम्हांडीय आद्य शक्ति का व सकारात्मकता का अनुभव किया । इसके बाद एक ओर वाराणसी से आए आचार्यों ने मोर्चा संभाला व दूसरी ओर आश्रम के कार्यकर्ताओ ने विराट कन्यापूजन व कन्या भोज कराया। आश्रम के प्रमुख स्वामी हरी श्रद्धानंद ने कहा कि जब यज्ञ का आयोजक सन्यासी हो तो उस यज्ञ के मायने बदल जाते है । जरुरी नहीं कि सन्यासी हमेशा अभाव की स्तिथि में रहे । सन्यासी को हमेशा समृद्ध होना चाहिए पर शर्त यही है की वह इसका उपभोग अपने लिए नहीं करें। प्रत्येक यज्ञ के बाद बड़ी मात्रा में जरुरतमंदो को अपनी पूरी क्षमता से दान देने में ही यज्ञ की सार्थकता है व ऐसे महायज्ञ को ही देवताओ का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होता है । गुरु के इसी आदेश की सार्थकता इस महायज्ञ में किए विराट कन्या पूजन में दिखी।

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