वाह जनाब, बाघ का सिर खा जा रहे मगरमच्छ, तो बाकी अंग कौन खा रहा, क्या पता चल पाएगा

-पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन पर उठे सवाल तो भोपाल के प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने ली सुधि
-स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स करेगी मामले की जांच
-8 महीने में 5 बाघों की संदिग्ध मौत

By: Ajay Chaturvedi

Updated: 07 Sep 2020, 05:06 PM IST

सतना. पन्ना टाइगर रिजर्व से गत 8 महीने में 5 बाघों की संदिग्ध परिस्थित में मौत हो गई। उधर बाघों की मौत होती रही और पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन सोता रहा। हर मौत के बाद एक नई कहानी गढ कर लोगों के मुंह बंद कर दिए जाते रहे। इसी क्रम में करीब महीना भर पहले एक 8 साल के बाघ पी-123 का शव केन नदी में उतराया मिला। युवा बाघ का सिर धड़ से गायब था। इतना ही नहीं अन्य कई अंग भी नहीं थे। ऐसे में पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने बमुश्किल बाघ का लापता होना तो स्वीकारा, पर उसके सिर सहित अन्य अंगों के गायब होने पर सफाई दी कि, बाघ का सिर मगरमच्छ खा गया होगा। अन्य अंगों के बाबत चुप्पी साध ली। लेकिन दबी जुबान प्रबंधन की लापरवाही की चर्चा होती रही। अंततः इसे संज्ञान लिया प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी भोपाल ने। उन्होंने 3 सितंबर को बाघों के गायब होने की जांच स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स को सौंपी दी है।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी, भोपाल के एक्शन में आने के तत्काल बाद यानी अगले ही दिन टाइगर स्ट्राइक फोर्स की टीम ने पन्ना पहुंच गई। जांच टीम ने 5 सितंबर को घटनास्थल का दौरा करने के बाद पार्क के उन सभी अधिकारियों- कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ कर बयान दर्ज किए जो बाघ की सर्चिंग, शव बरामद होने व पोस्टमार्टम की कार्रवाई में शामिल रहे हैं।

टाइगर स्ट्राइक फोर्स की टीम ने जांच शुरू कर दी है। अब तो सच्चाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगी, पर इस बीच लोग इस जांच पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स की जांच सही है पर यह जांच जूनियर अधिकारियों के स्तर से क्यों? क्या ये जांच भी लोगों की जुबान बंद करने के लिए है? इस जांच से क्या बाघ की मौत का सच सामने आ पाएगा? बाघ की मौत से जुड़े तथ्यों पर पर्दा डालने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के आपराधिक कृत्यों का क्या वाकई भंडाफोड़ हो पायेगा? उनका कहना है कि लगता तो ये है कि पिछले चार बाघों की मौत की तरह इस बार भी जांच के नाम पर लीपापोती कर मामले को रफादफा कर दिया जाएगा।

इस बीच बता दें कि क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व भदौरिया ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया था कि सात अगस्त 2020 को प्रातः परिक्षेत्र गहरी घाट के बीट झालर के सकरा में नदी के किनारे बाघ पी-431 व बाघिन टी-6 मेंटिंग में थी, तभी वहां पर नर बाघ पी-123 पहुंच गया। दूसरे नर बाघ पी- 123 के पहुंचने पर बाघ पी-431 आक्रामक हो गया। फलस्वरूप दोनों बाघों के बीच संघर्ष होने पर नर बाघ पी-123 को जान गवानी पड़ी।

Ajay Chaturvedi
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