MP: स्कूल मैदान से गायब हो गए खेल और खेल शिक्षक, कैसे तैयार होंगे 'सुल्तान'

MP: स्कूल मैदान से गायब हो गए खेल और खेल शिक्षक, कैसे तैयार होंगे 'सुल्तान'

Suresh Kumar Mishra | Publish: Sep, 11 2018 11:35:18 AM (IST) Satna, Madhya Pradesh, India

जिले की 141 हायर सेकंडरी स्कूलों में से सिर्फ 17 में ही पीटीआई

कमलेंद्र शुक्ला@सतना। छात्रों को शारीरिक रूप से फिट रखने, पढ़ाई के बोझ से कुछ हद तक राहत देने के उद्देश्य से सरकारी स्कूलों में दो खेल पीरियड लगाना अनिवार्य है। स्कूल शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक कैलेंडर में भी 40-40 मिनट के दो खेल कालांश निर्धारित किए हैं पर जिले की ज्यादातर हायर सेकंडरी स्कूलों के खेल मैदान से खेल गायब हो चुके हैं। खेल कैलेंडर दीवारों की शोभा बनकर लटकते रहते हैं। खेल के नाम पर एक पीरियड छात्रों को लिए खाली छोड़कर महज औपचारिकता निभाई जा रही है। स्कूलों में खेल शिक्षक भी नहीं हैं। हकीकत यह है कि जिले की 141 हायर सेकंडरी स्कूलों में से सिर्फ 17 में ही पीटीआइ हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जिले में सुल्तान कैसे तैयार होंगे।

कैलेंडर में 50 से ज्यादा खेल
स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी शैक्षणिक खेल कैलेंडर में टेबल टेनिस, बैडमिंटन, खो-खो, शतरंज, वालीबॉल, कबड्डी, बास्केटबॉल, हॉकी सहित 50 से ज्यादा खेल शामिल किए गए हैं। डीइओ मानते हैं कि स्कूलों में पीटीआइ शिक्षकों की कमी है। हालांकि उनका दावा है कि ज्यादातर स्कूलों में खेल पीरियड तो लग रहे। जहां खेल शिक्षक नहीं हैं वहां जो शिक्षक खेलों के बारे में जानते हैं, उन्हें जिम्मेदारी सौंपी है।

80 फीसदी स्कूल खाली
स्कूली बच्चों को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ्य रखने के अलावा खेल प्रतिभाओं को उभारने के लिए खेल पीरियड अनिवार्य किया गया है। जिले की 141 हायर सेकंडरी स्कूलों में 80 प्रतिशत से ज्यादा स्कूलों में खेल शिक्षकों (पीटीआइ) की तैनाती ही नहीं की गई। 141 में से सिर्फ 17 में ही खेल शिक्षक पदस्थ किए गए हैं। खेल शिक्षकों की कमी के चलते न खेल पीरियड लग रहे न छात्रों की प्रतिभा निखारने का मौका मिल रहा।

निभा रहे औपचारिकता
ज्यादातर स्कूलों में खेल पीरियड के दौरान छात्रों को अपने हाल में छोड़ दिया जाता है। चाहे खेलो, चाहे पढ़ते रहो। कुछ स्कूल ऐसे भी हैं जो पढ़ाई के पीरियड के दौरान बीच में ही खेल का एक पीरियड लगा रहे हैं। इसमें भी खेल शिक्षक न होने पर छात्र अपनी मर्जी से खो-खो, वॉलीबॉल जैसे अन्य खेल अपने से ही खेलते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ स्कूलों में तो आखिरी के खेल पीरियड में छात्रों की छुट्टी कर दी जाती है।

खेल के नाम पर वसूली
स्कूलों में खेल के नाम पर 9वीं-10वीं के छात्रों से 60 रुपए और 11वीं-12वीं के छात्रों से सालाना 100 रुपए फीस भी ली जा रही। इसमें 40 प्रतिशत डीइओ, 15 प्रतिशत जेडी और 45 प्रतिशत स्कूल के खाते में जमा हो रहे।

यहां हैं पीटीआइ
- शास. उत्कृष्ट उमा विद्यालय व्यंकट-एक 02
- शास. उत्कृष्ट उमा विद्यालय व्यंकट-दो 01
- शास. कन्या धवारी स्कूल 01
- शास. उत्कृष्ट अमरपाटन 1-1 व कन्या
- मैहर उत्कृष्ट 01
- रामपुर उत्कृष्ट 01
- छिबौरा 01
- उत्कृष्ट उचेहरा 01
- गुड़वा 01
- रामनगर उत्कृष्ट 01

6 पीरियड पढ़ाई के
- शैक्षणिक कैलेंडर में 8 पीरियड निर्धारित किए गए हैं। 6 पढ़ाई और 2 खेल के।
- 40-40 मिनट के खेल पीरियड आखिरी में रखे गए हैं।
- स्कूल शिक्षा विभाग ने प्राचार्यों को अनिवार्य रूप से खेल पीरियड लगाने को कहा है।

यहां अध्यापक संवर्ग के पीटीआई
- कोठी, अबेर, हर्रई रामनगर, नादन मैहर, टिकुरिया टोला।

स्कूलों में खेल शिक्षकों की कमी है। लेकिन, छात्रों के लिए खेल पीरियड लगाए जा रहे हैं।
बीएस देशलहरा, डीइओ

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