Terror Funding: एटीएस को नहीं मिले कोई साक्ष्य, दो संदिग्धों को मिली जमानत, पुलिस ने बढ़ाई निगरानी

Terror Funding: एटीएस को नहीं मिले कोई साक्ष्य, दो संदिग्धों को मिली जमानत, पुलिस ने बढ़ाई निगरानी
Terror funding: ATS found no evidence, two suspects got bail

Suresh Kumar Mishra | Updated: 24 Aug 2019, 02:43:14 PM (IST) Satna, Satna, Madhya Pradesh, India

टेरर फंडिंग: पुलिस ने बढ़ाई निगरानी

सतना। टेरर फंडिंग के मामले में पकड़े गए पांच युवकों में दो संदेहियों से पूछताछ में एटीएस को कोई अहम साक्ष्य नहीं मिले। ऐसे में दोनों को शुक्रवार को सीआरपीसी की धारा 151 के तहत अदालत में पेश कर दिया गया। वहां से दोनों को जमानत मिल गई। उधर, सतना से तीन आरोपियों को पकड़ कर भोपाल लेकर गई एटीएस की पूछताछ जारी है। पूरे मामले को मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी गंभीरता से लिया है।

उन्होंने कहा कि अब इस बात की जांच कराई जाएगी कि पूर्व में पकड़े गए आरोपी बलराम सिंह और उसके साथियों पर किस तरह से कार्रवाई की गई थी, जिससे उन्हें जमानत मिली? साथ ही एटीएस को निर्देश दिए गए हैं कि टेरर फंडिंग की जड़ तक पहुंचा जाए, ताकि इस कृत्य से जुड़े सभी लोग कार्रवाई के दायरे में आ सकें।

इन्हें मिली जमानत
पुलिस ने टेरर फंडिंग के मामले में सुनील सिंह पुत्र राजेंद्र सिंह (23) निवासी दलदल थाना रामपुर बाघेलान जिला सतना, बलराम सिंह पुत्र शिव कुमार सिंह (28) निवासी सोहास थाना कोटर जिला सतना एवं शुभम मिश्रा पुत्र विजय मिश्रा (25) निवासी आदर्श नगर नई बस्ती थाना कोलगवां जिला सतना को गिरफ्तार किया था। इन तीनों के खिलाफ एटीएस भोपाल ने थाना कोलगवां में अपराध क्रमांक 0/19 में धारा 122, 123, 420, 468, 471, 120बी, 201 आइपीसी, धारा 3, 6 भारतीय बेतार तार यांत्रिकी अधिनियम 19333 एवं धारा 4, 20, 25 भारतीय तार अधिनियम 1885 के तहत अपराध कायम कराया है। कोटर थाना क्षेत्र अंतर्गत खोहर निवासी भागेंद्र सिंह (30) एवं कोलगवां थाना क्षेत्र की नई बस्ती निवासी गोविंद कुशवाहा (25) को शक के आधार पर पकड़ा था। भागेंद्र और गोविंद को एटीएस की पूछताछ के बाद क्लीनचिट दी गई है। फिर भी पुलिस इन दोनों पर नजर रख रही है।

क्यों नहीं लगी थी भनक...
कांग्रेस प्रवक्ता नरेन्द्र सलूजा ने पुलिस की वर्तमान कार्रवाई पर संतोष जताते हुए तत्कालीन पुलिस कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि टेरर फंडिंग के आरोपी बलराम को जमानत कैसे मिल गई और जमानत के बाद बलराम कैसे पाकिस्तानी के संपर्क में रहा, इसकी भनक पुलिस क्यों नहीं लग सकी?

पीएचक्यू भी गंभीर
पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस मुख्यालय भोपाल के भी कान खड़े हुए हैं। बलराम की गिरफ्तारी के बाद सतना पुलिस की कमजोर कार्य प्रणाली पर असंतोष जताते हुए इस बात की जांच कराई जा रही कि एटीएस और सतना पुलिस से कहां चूक हुई है। यह भी देखा जा रहा कि किस कारण से बलराम को पूर्व के प्रकरण में जमानत मिली और जमानत के बाद उस पर नजर क्यों नहीं रखी गई? साथ ही जमानत पर छूटे अन्य लोगों की भी कुण्डली खंगालने के एटीएस को निर्देश दिए गए हैं।

निगरानी में हैं कई और
पीएचक्यू प्रवक्ता आशुतोष प्रताप सिंह ने बताया कि इलाहाबाद, चित्रकूट, सतना और रीवा के कुछ लोग भी निगरानी में हैं। पकड़े गए लोग युद्ध की स्थिति में सामरिक महत्व की जानकारियां एकत्रित कर रहे थे। पाकिस्तानी हैंडलरों से मिलकर ये लोग भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे। सीधे-साधे लोगों को फोन कॉल के जरिए इनाम में बड़ी राशि खुलने का झांसा देकर राशि वसूलने वाले गिरोह से इनकी साठगांठ सामने आई है। एटीएस मामले की अन्य कडिय़ां खोलने में जुटी है।

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