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सतना

शिक्षाकर्मी घाेटाले से उलझे संविलियन को लेकर जिपं सदस्य और डीईओ में नोकझोंक

जिपं सामान्य सम्मेलन में गहमागहमी: जिपं सदस्य बोले- जल निगम के ज्यादातर काम गुणवत्ताहीन
जिपं अध्यक्ष ने भी कामों की जानकारी से सदस्यों को अनभिज्ञ रखने पर जताई आपत्ति

सतनाJun 29, 2024 / 12:06 pm

Ramashankar Sharma

jila panchayat sammelan
सतना। लगभग नौ महीने बाद शुक्रवार को जिला पंचायत के सामान्य सम्मेलन में काफी गहमागहमी देखने को मिली। शिक्षा विभाग के एजेंडे पर चर्चा के दौरान जिपं सदस्य ज्ञानेंद्र सिंह और डीईओ नीरव दीक्षित में नोकझोंक की स्थिति बन गई। जल निगम के एजेंडे पर ज्यादातर सदस्यों ने पेटी कान्ट्रेक्ट के चलते गुणवत्ताहीन काम होने की जानकारी देकर जांच की मांग की। सदस्यों की सबसे सबसे ज्यादा नाराजगी बिजली कंपनी पर देखने को मिली। इस पर पृथक से बैठक की मांग की गई। सम्मेलन की शुरुआत में राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी भी विधायक मैहर श्रीकांत चतुर्वेदी के साथ पहुंचीं। उन्होंने अधिकारियों के कहा कि जिपं सदस्यों के समन्वय और सहयोग से विकास का वार्षिक प्लान तैयार करें। सम्मेलन की अध्यक्षता जिपं अध्यक्ष रामखेलावन कोल ने की। बतौर सचिव जिपं सीईओ संजना जैन सहित विभिन्न विभागों के जिला प्रमुख अधिकारी और जिपं सदस्य मौजूद रहे।
पालन प्रतिवेदन के जवाब पर सदस्य नाराज

सम्मेलन के एजेंडे पर चर्चा से पहले पालन प्रतिवेदन पर चर्चा शुरू हुई। जिपं सदस्य ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि सदस्य इस बात पर धन्यवाद ज्ञापित करते हैं कि पहली बार सदस्यों को एजेंडा दो दिन पहले समय पर उपलब्ध कराया गया। इसके बाद बिजली कंपनी के पालन प्रतिवेदन का जवाब देने खड़े हुए कंपनी के प्रतिनिधि अपना जवाब प्रस्तुत नहीं कर पा रहे थे। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए सदस्य ज्ञानेन्द्र ने पालन प्रतिवेदन पढ़ा। इस दौरान सदन को बताया गया कि ऊर्जा मंत्री के सतना दौरे की वजह से अधिकारी आज उनके साथ हैं। सदस्य दीपक किशोर ने असफल ट्रांसफार्मरों पर अपनी बात रखी। इसके बाद ज्ञानेन्द्र ने 8 महीने से ज्यादा समय से बंद ट्रांसफार्मरों की जानकारी देते हुए कहा कि ऐसे में तो किसान तबाह हो जाएंगे। उन्हें विद्युत की उपलब्धता ही नहीं है जबकि रोपा की स्थिति है। रवैए में सुधार नहीं लाया गया तो क्षेत्रवासियों के साथ जिला पंचायत में धरना देंगे।
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पूरे जिले में बिजली से हाहाकार

बिजली के मुद्दे पर सदस्य एकता सिंह ने कहा कि अधिकारियों की स्थिति यह है कि वे फोन तक नहीं उठाते हैं। संजय सिंह ने कहा कि पूरे जिले में बिजली समस्या को लेकर हाहाकार की स्थिति है। कोई सुनने वाला नहीं है। 9 माह बाद भी सदन को जानकारी नहीं दी जा रही है। इसकी पृथक से बैठक बुलाने की आवश्यकता है। रमाकांत पयासी ने कहा कि पालन प्रतिवेदन पढ़ना भर काम रह गया है। बिजली अमला समस्याओं के निराकरण में नाकाम है।
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मैहर सीमेंट के अतिक्रमण का मुद्दा उठा

मैहर सीमेंट फैक्ट्री द्वारा वन विभाग की जमीन पर किए गए अवैध कब्जे का मुद्दा सदस्य श्रीधर उरमलिया ने उठाया। कहा, इस पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अभी भी अतिक्रमण हो रहा है। तब बताया गया कि शासन स्तर तक मामला भेज दिया गया है। वहां से जो मार्गदर्शन आएगा उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। आदिवासियों को खेती करने से मना करने के मसले पर वन विभाग ने जवाब दिया कि वन भूमि पर खेती नहीं की जा सकती है। अगर संबंधितों के पास कब्जे के दस्तावेज हैं तो वनाधिकार पट्टे के लिए आवेदन दें। परीक्षण कराया जाकर पात्रता होने पर पट्टे जारी किए जाएंगे। पौधरोपण पर सवाल खड़े करने पर वन विभाग के अधिकारी ने जिपं सदस्य ज्ञानेन्द्र से कहा कि सदस्य स्थल चयन कर लें। तय तारीख पर सत्यापन कर सकते हैं।
सड़क निर्माण पर भी घेरा

आरईएस के निर्माण कार्यों पर सदस्यों ने काह कि सुदूर सड़कों के निर्माण में यह नहीं देखा जाता है कि किस सड़क में ज्यादा आवागमन है। वहां काम पहले किया जाए। अधिकारी यह देखते हैं कि किसमें ज्यादा पैसा बचना है वह रोड पहले बनाई जाएगी।
झलकी जिपं अध्यक्ष की पीड़ा

सदन में लगभग खामोश बैठे रहे जिपं अध्यक्ष की प्रभावी भूमिका न दिखाई देने पर सदस्यों ने कई बार बैठक संचालन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। उसी दौरान सदस्यों ने जब निर्माण कार्यों की जानकारी नहीं मिलने की बात सदन में रखी तो जिपं अध्यक्ष अपनी पीड़ा नहीं रोक पाए। कहा, यहां अपमान के अलावा सम्मान नहीं मिलता है। निर्माण की जानकारी न सरपंच देता न मैदानी अमला न ही अधिकारी। हद तो यह है कि हमारे जारी पैसे के काम की भी जानकारी नहीं मिल पाती है। जो भी काम हों उनकी न केवल जिपं सदस्यों को जानकारी दी जाए बल्कि भूमि पूजन में भी बुलाया जाए।
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विभाग दे रहा गलत जानकारी

शिक्षा विभाग के एजेंडे पर सदस्य ज्ञानेन्द्र ने आधे घंटे शिक्षकों के संविलियन पर चर्चा के लिए मांगे। कहा कि डीईओ सदन को गुमराह कर रहे हैं। जो भी जानकारी दी गई है वह पूरी तरह से असत्य है। इस दौरान उन्होंने संविलियन के नियम कायदे और पत्राचार को सदन के समक्ष रखते हुए कहा कि डीईओ नहीं चाहते हैं कि सही प्रक्रिया का पालन हो। इस पर डीईओ ने कहा कि जो भी जानकारी दी गई है वह विभागीय आंकडो़ं पर शत प्रतिशत सही दी गई है। जहां तक संविलियन की बात है तो संबंधित शिक्षक जिला पंचायत के कर्मचारी हैं जो भी निर्णय लिया जाना है जिपं सीईओ और उनकी गठित समिति को लेना है। इस दौरान सदस्य और डीईओ में नोंकझोंक भी हुई। हालांकि जिपं सीईओ ने इस मामले में डीईओ से पूरी जानकारी समक्ष में रखने के निर्देश दिए हैं। कहा है कि सभी तथ्यों का अध्ययन करने के बाद इस बार स्पीकिंग आर्डर जारी किए जाएंगे।
पीएचई की मोटर खरीदी पर जांच का आश्वासन

पीएचई के एजेंडे पर चर्चा के दौरान सदस्य भीम सोनी ने कहा कि मैहर में 248 मोटर पंप जबरन सरपंचों पर दबाव बना कर क्रय आदेश जारी करवाए गए हैं। पीएचई में स्थिति यह है कि टीएस पर हस्ताक्षर कराने के लिए सरपंच से 3 हजार रुपए तक लिए जाते हैं। इस दौरान मैहर मोटर पंप क्रय मामले में अन्य सदस्यों द्वारा आपत्ति उठाने पर इसकी जांच कराने का आश्वासन दिया।
पेटी पर पेटी, कहां से हो गुणवत्ता का काम

सदस्य रमाकांत ने कहा कि जल निगम पानी बिछाने का काम बहुत घटिया तरीके से कर रहा है। शासन जिस राशि पर ठेका देता है, उसके बाद ठेका कंपनी उससे काम राशि में काम पेटी पर दे देती है। इसके बाद और राशि कम करके दूसरे पेटी ठेकेदार को काम दे दिया जाता है। इसके बाद संबंधित ठेकेदार जो अनुभवहीन होता है वह अपना लाभ बचाते हुए काम करता है। लिहाजा काम काफी घटिया हो जाता है, जबकि शासन इसकी ज्यादा राशि देती है। हालत यह है कि 100 रुपए शासन से मिलते हैं और 50 रुपए का भी काम नहीं हो रहा है। अनुभवहीनता की वजह से हादसे भी हो रहे हैं। इसमें तत्काल सुधार लाया जाना चाहिए और पेटी प्रथा बंद कर कंपनी खुद काम करें।
जल संसाधन विभाग को घेरा

जल संसाधन विभाग के एजेंडे पर संजय सिंह ने कहा कि जल संसाधन विभाग की नीलाम होने वाली जमीनों पर आय की जानकारी चाही जो नहीं मिल सकी। कहा, जल संसाधन विभाग अपनी जमीन सुरक्षित करे और अतिक्रमण से बचाकर तय नियमों के तहत नीलामी कराए। कुरी बांध और पटना बांध में हो रही गफलत पर ध्यान आकृष्ट किया। कहा, बांध से लोग पत्थर निकाल रहे हैं, अवैध कब्जा कर जमीन जोत रहे हैं। पटना बांध पर कहा कि किसानों का पानी फैक्ट्री ले रही है और किसानों को सिंचाई का पानी नहीं मिल रहा है।
झलकियां

  • सदन में सदस्यों ने कहा कि बिजली कंपनी की एक योजना में 60 फीसदी ट्रांसफार्मर चोरी हो गए हैं। अधिकारी चुप्पी साधे हैं।
  • उपाध्यक्ष ने भी संविलियन के मामले में विभागीय प्रतिवेदन पर असहमति जताई।
  • सदस्यों ने शिक्षा विभाग के संलग्नीकरण पर सवाल किया।
  • जिपं सीईओ ने बंदूक के साथ अपनी फोटो लगाकर डीईओ को वाट्सएप मैसेज करने के मामले में डीईओ से प्रतिवेदन चाहा।
  • पंचायती राज के सालों से लंबित कामों पर विभागीय अधिकारियों को सदन में घेरा गया। कहा जो योजना बंद हो चुकी हैं उनके काम भी आज तक पूरे नहीं हुए।

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