TEEN TALAQ: 5 में से 3 जजों ने दिया असंवैधानिक करार, कहा-6 महीने के अंदर संसद बनाए नया कानून

देश के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार की सुबह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। ये फैसला आजाद भारत का सबसे बड़ा फैसला है।

By: suresh mishra

Published: 22 Aug 2017, 02:13 PM IST

सतना। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार की सुबह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। ये फैसला आजाद भारत का सबसे बड़ा फैसला है। पांच सदस्यीय बेंच ने तीन तलाक पर फैसला सुना दिया है। चीफ चस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपने फैसले में कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत इस मामले में दखल नहीं दे सकती है। देश की संसद इस पर नया कानून बनाए। कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं को राहत देते हुए तीन तलाक पर ६ महीने के लिए रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली इस बेंच में जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस जोसेफ कुरियन, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल थे।

गौरतलब है कि, तीन तलाक के मुद्दे को लेकर यूपी चुनाव में फतह करने वाली केन्द्र की मोदी सरकार की सबसे बड़ी जीत है। सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक को खत्म कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केंद्र सरकार 6 महीने के अंदर संसद में इसको लेकर कानून बनाए। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश जेएस खेहर के नेतृत्व में 5 जजों की पीठ ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट में तीन जज तीन तलाक को अंसवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे, वहीं 2 दो जज इसके पक्ष में नहीं थे।

सतना में भी हुए तीन तलाक
बता दें कि, इस तरह के दो मामले मध्य प्रदेश में सतना जिले के नजीराबाद इलाके में भी आ चुके है। जहां पर एक महिला को सोते समय उसके पति ने मोबाइल पर तलाक दे दिया। इसके बाद जहां ये महिलाएं एक-एक रोटी के लिए मोहताज है, वहीं इनके पति दूसरी शादी कर फिर से अपना घर बसा चुके हैं। जबकि दूसरा मामला भी नजीराबाद का ही है। जहां पीडि़त को मायके पहुंचने के एक दिन बाद ही शाह आलम ने उसे मोबाइल पर तलाक दे दिया। अपने तीन साल के मासूम बेटे को पालने के लिए अब खुशबू लोगों के घर में झाड़ू पोंछा कर रही है।

केस-2: सोती हुई पत्नी को तलाक दे गया पति
पहला मामला नजीराबाद स्थित शबाना निशा का है। बताया गया कि शबाना की शादी 07 जुलाई 2013 को यूपी के बांदा के बसौदा निवासी सलीम सौदागर से हुई थी। शादी के एक साल बाद जुलाई 2014 में सोते समय उसके पति ने उसे तलाक दे दिया। सोकर उठने के बाद तलाक देने की बात शबाना की देवरानी ने उसे बताई और कहा कि वो घर से चली जाए। एक पैर से विकलांग शबाना अब कपड़ों की सिलाई बुनाई का काम कर गुजर बसर करने को मजबूर है, जबकि उसका पति सलीम दूसरी शादी कर आराम से अपनी जिंदगी जी रहा है।

केस-2: मोबाइल पर 'तलाक, तलाक, तलाक'
तीन तलाक से जुड़ा दूसरा चौंकाने वाला मामला भी नजीराबाद का ही है। खुशबू की शादी 7 जून 2007 में इलाहाबाद के निरियारी गांव निवासी शाह आलम से हुई थी। शादी के दो साल बाद से ही ससुराल पक्ष ने उसे दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक प्रताडऩा देना शुरू कर दिया। इस बीच उसे एक बेटा भी हुआ, लेकिन उस पर अत्याचार कम नहीं हुए और उसे जबरदस्ती मायके भेज दिया गया। मायके पहुंचने के एक दिन बाद ही शाह आलम ने उसे मोबाइल पर तलाक दे दिया। अपने तीन साल के मासूम बेटे को पालने के लिए अब खुशबू लोगों के घर में झाड़ू पोंछा कर रही है। जब उनसे ये पूछा गया कि उन्होंने ये तलाक क्यों मान लिया, तो समाज और परंपरा को लेकर खुशबू की नाराजगी साफ नजर आई।

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