2024 तक नहीं बनी टनल, तो गुजरात को मिल जाएगा सतना के हिस्से का नर्मदा जल

2024 तक नहीं बनी टनल, तो गुजरात को मिल जाएगा सतना के हिस्से का नर्मदा जल
2024 तक नहीं बनी टनल, तो गुजरात को मिल जाएगा सतना के हिस्से का नर्मदा जल

Sukhendra Mishra | Updated: 22 Jul 2019, 12:12:37 AM (IST) Satna, Satna, Madhya Pradesh, India

सतना का सपना अधूरा: स्लीमनाबाद सुरंग बनाने के नाम पर भाजपा सरकार ने 10 साल ठगा, अब कांग्रेस के पाले में गेंद

सतना. विंध्य की धरती पर नर्मदा का पानी लाकर इसे 'पंजाबÓ बनाने का सपना दिखाकर प्रदेश की भाजपा सरकार ने सतना के किसानों को १० साल तक ठगा। तत्कालीन मंत्री-विधायकों ने तमाम दावे किए, आश्वासन दिए पर इन 10 वर्षों में स्लीमनाबाद सुरंग का कार्य पूरा नहीं करा सके। भाजपा सरकार की इस नाकामी और जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा बरगी प्रोजेक्ट में रुचि न लेने से जिला नर्मदा जल से वंचित होने की कगार पर पहुंच चुका है। कारण, इंटर स्टेट रिवर वॉटर डिस्प्यूट एक्ट 1956 की धारा 4 के अंतर्गत यदि 2024 तक स्लीमनाबाद टनल का कार्य पूरा नहीं हुआ, बरगी का पानी सतना नहीं पहुंचा तो नर्मदा ट्रिब्यूनल के आदेशानुसार विंध्य के हिस्से का पानी गुजरात को आवंटित कर दिया जाएगा। इससे सतना और रीवा हमेशा के लिए नर्मदा जल से वंचित हो जाएंगे।

यह है नर्मदा ट्रिब्यूनल का आदेश
इंटर स्टेट रिवर वॉटर डिस्प्यूट एक्ट 1956 की धारा-4 के अंतर्गत नर्मदा नदी के जल बंटवारे के लिए नर्मदा ट्रिब्यूनल बनाया गया था। इसके अंतिम आदेश का गजट प्रकाशन 12/12/1979 को 45 वर्ष के लिए किया गया था। आदेश के अनुसार, मध्यप्रदेश को 18.25 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी दिया गया था। यह शर्त भी रखी गई थी कि यदि मप्र दिसंबर 2024 तक आवंटित पानी का शत-प्रतिशत उपयोग नहीं कर पाता तो जितने पानी का उपयोग नहीं होगा, उसे दूसरे राज्य को दे दिया जाएगा।
टनल निर्माण की वर्तमान स्थिति

नर्मदा का पानी सतना-रीवा की धरती पर लाने के लिए बरगी दायीं तट नहर प्रोजेक्ट को केंद्रीय जल आयोग ने 1992 में स्वीकृति दी थी। तब प्रोजेक्ट की लागत 1101 करोड़ रुपए थी। पर, प्रोजेक्ट का कार्य समय पर पूरा न होने के कारण अब इसकी लागत बढ़कर 2160 करोड़ रुपए हो गई है। सतना एवं रीवा के गांवों तक नर्मदा जल पहुंचाने के लिए बरगी की मुख्य नहर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। लेकिन, स्लीमनाबाद स्थित 12 किमी लंबी सुरंग विंध्य में नर्मदा का पानी लाने में सबसे बढ़ी बाधा है। स्लीमनाबाद टनल का निर्माण कार्य 2011 में प्रारंभ हुआ था। इस नहर को 2019 तक बनकर तैयार हो जाना था। लेकिन, बीते आठ साल में मात्र 4.6 किमी. सुरंग ही खुद पाई है। सुरंग निर्माण का कार्य जिस गति से चल रहा है, यदि आगे भी कार्य की यही गति रही तो 2030 तक भी टनल नहीं बन पाएगी और सतना बरगी के पानी से वंचित हो जाएगा।

किसानों के पास करो या मरो की स्थिति
बगरी के पानी से सतना की लगभग २ लाख हैक्टेयर तथा रीवा जिले की 50 हजार हैक्टेयर जमीन सिंचित हो सकेगी। विंध्य की सूखी धरती की प्याज बुझाकर उसे हराभरा बनाने में नर्मदा जल एक मात्र उम्मीद है। एेसे में अब जिले के किसानों के सामने करो या मरो की स्थिति पैदा हो गई है। प्रदेश सरकार और जनप्रतिनिधियों के पास पांच साल का समय बचा है। 2023 तक स्लीमनाबाद टनल की बाधा को पार कर सतना तक बरगी का पानी लाना होगा।
ओपन कैनाल ही एक मात्र रास्ता

बरगी परियोजना से जुड़े इंजीनियर बताते हैं, स्लीमनाबाद की पहाड़ी पर बालुई पत्थर होने के कारण सुरंग निर्माण का कार्य कछुआ गति से हो रहा। पहाड़ धंसकने के कारण कई-कई माह निर्माण बंद रहता है। इसलिए टनल निर्माण का प्रोजेक्ट फेल हो चुका है। एेसे में यदि सरकार चाहती है कि बरगी का पानी सतना पहुंचे तो टनल की जगह स्लीमनाबाद में ओपन कैनाल बनानी होगी। 4.6 किमी सुरंग का निर्माण पूरा हो चुका है। 7.4 किमी ओपन कैनाल बनाकर टनल निर्माण की बाधा को दूर किया जा सकता है। ओपल कैनाल निर्माण के लिए प्रदेश सरकार को जल्द ही प्रोजेक्ट में परिवर्तन कर नए टेंडर जारी करने होंगे। ताकि दो साल में टनल निर्माण का कार्य पूरा हो सके।

पानीदार होंगे 855 गांव
बरगी कैनाल की दायीं तट नहर से सतना के 855 तथा रीवा जिले के 30 गांवों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। इसमें मैहर विकासखंड के 140 गांव, रामपुर बाघे. के 72, अमरपाटन के 155, उचेहरा के 105, नागौद के 200 तथा मझगवां विकासखंड के 13 गांव शामिल है। बरगी के पानी से जिले की २.४५ लाख हैक्टयेर जमीन सिंचित होगी।

 

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