हाइवे पर खड़े ट्रक से भिड़ी पिकअप, वाराणसी के दवा व्यापारी की मौत

-सूचना के डेढ़ घंटे बाद पहुंची पुलिस
-दवा व्यवसायी को पिकअप से बाहर निकालने में लगे 6 घंटे
-समय से अस्पताल पहुंचता तो बच सकती थी जान

By: Ajay Chaturvedi

Updated: 11 Oct 2020, 02:58 PM IST

सतना. नेशनल हाइवे पर दुर्धटना और मौत का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में अमदरा थाना क्षेत्र के नेशनल हाइवे-30 पर हुई दुर्घटना में दवा व्यवसायी की मौत हो गई जबकि पिकअप चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई लेकिन पुलिस को मौके पर पहुंचने में डेढ़ घंटे लग गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक नेशनल हाइवे-30 पर एक ट्रक खड़ा था, तभी एक तेज रफ्तार पिकअप ने पीछे आ कर उसमें घुस गया। टक्कर ऐसी थी कि पिकअप का अगला हिस्सा पूरी तरह से ट्रक के भीतर तक जा घुसा था। तेज आवाज सुन कर मौके पर पहुंचे क्षेत्रीय नागरिकों और पिकअप चालके ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी, लेकिन पहले तो पुलिस ही डेढ घंटे बाद पहुंची। फिर पिकअप में फंसे लोगों को बाहर निकालने में तकरीबन 6 घंटे लग गए जिसके चलते दवा व्यवसायी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

घटना के बाबत पुलिस का कहना है कि रितेश गुप्ता पुत्र हरिहर गुप्ता (34 वर्ष) निवासी अवसानगंज थाना जैतपुरा जिला बाराणसी (उत्तरप्रदेश) गुरुवार रात को जबलपुर से दवाइयों की खेप लेकर पिकअप क्रमांक से लखनऊ जा रहे थे। पिकअप प्रकाश रैकवार निवासी घमापुर जिला जबलपुर चला रहा था। रात तकरीबन 2 बजे तेज रफ्तार पिकअप जब पाला गांव के पहुंची, तभी ओवरटेक करने के चक्कर में अनियंत्रित होकर खड़े ट्रक से भिड़ गई। दुर्घटना में पिकअप गाड़ी का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया जिससे रितेश व प्रकाश गंभीर रूप से घायल हो गए। ड्राइवर ने किसी तरह डायल 100 पर फोन कर मदद मांगी, लेकिन घबराहट में घटनास्थल की सही जानकारी नहीं दे पाया। इस वजह से पुलिस काफी देर तक भटकती रही।

लगभग 3 बजे मौके पर पहुंची एफआरवी के स्टॉफ ने चालक को गाड़ी से बाहर निकालकर एम्बुलेंस से तुरंत कटनी रवाना किया। लेकिन रितेश को निकालने में नाकाम रहे। काफी कोशिशों के बाद भी कटर का इंतजाम नहीं हो पाया तो मैहर से क्रेन मंगवाकर पिकअप को थाने लाया गया। अंतत: 6 घंटे बाद शुक्रवार सुबह लगभग 8 बजे कटर मशीन लाकर सामने का हिस्सा अलग कर मृत व्यापारी का शव निकला जा सका।

क्षेत्रीय नागरिकों के मुताबिक आश्चर्य कि घटना स्थल से कुछ दूरी पर ही खेरवासानी टोल प्लाजा है, जहां एम्बुलेंस और आपातकालीन संसाधन उपलब्ध थे। मगर टोल प्रबंधन की तरफ से कोई सहयोग नहीं किया गया और उनकी हाइवे पेट्रोलिंग टीम का भी अता-पता नहीं रहा। हादसे के बाद पुलिस की तरफ से बरती गई लापरवाही ने एक बार फिर कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जाता रहा है, अगर रितेश को सही समय पर गाड़ी से बाहर निकाल कर अस्पताल पहुंचाया जाता तो उसकी जान बच सकती थी।

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