ये क्या मेले के नाम पर विंध्य चेम्बर कर रहा मनमानी...

suresh mishra

Publish: Dec, 07 2017 02:33:17 (IST)

Satna, Madhya Pradesh, India
ये क्या मेले के नाम पर विंध्य चेम्बर कर रहा मनमानी...

चेंबर ने मेला स्थल तैयार करने को नष्ट किए पौधे, उखाड़ी सुरक्षा जाली, डीएम के निर्देशों के विपरीत तैयार हो रहा मेला स्थल, शासकीय योजना के तहत किया गया

सतना। चेम्बर द्वारा डाइट के मैदान को व्यापार मेले के लिये तैयार किया जा रहा है। लेकिन जिन शर्तों के तहत अनुविभागीय दण्डाधिकारी ने कलेक्टर के अनुमोदन उपरांत डाइट का मैदान विन्ध्य चेम्बर ऑफ कामर्स को आवंटित किया था उन शर्तों को ताक पर रख कर काम हो रहा है। हद तो यह है कि यहां चल रही मनमानी की आधिकारिक जानकारी अभी तक डाइट प्राचार्य द्वारा एसडीएम को नहीं दी गई है।

मनमानी की स्थिति यह है कि मध्यप्रदेश शासन के निर्देश पर यहां कराए गये पौधरोपण के कई पौधों को उखाड़ दिया गया है तो काफी संख्या में पौधों से ट्री गार्ड हटा दिये गये हैं। इनकी सुरक्षा के लिये लगाई गई जाली को बिना अनुमति के हटा कर पौधरोपण के ऊपर स्टाल तान दिये गये हैं। इतना ही नहीं छात्रावास के मुख्य द्वार के सामने भी जगह न छोड़ कर वहां भी स्टाल खड़ा कर दिया गया है।

आयुक्त राज्य शिक्षा केन्द्र ने शासकीय शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान की भूमि और भवन को अन्य प्रयोजनों एवं संस्थाओं को उपलब्ध नहीं कराने के निर्देश कलेक्टर को 2 मई 2008 को दिये थे। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय ने शैक्षणिक संस्थानों के मैदान को शैक्षणिक सत्र के दौरान वैवाहिक व अन्य समारोहों के आयोजन के लिये प्रतिबंधित कर दिया था। इस आधार पर न्यायालय कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट ने एक आदेश पारित कर विशेष परिस्थितियों में ही शैक्षणिक एवं अति आवश्यक सार्वजनिक उपयोग के लिये कलेक्टर या उनके द्वारा अधिकृत सक्षम अधिकारी से विधिवत पूर्व अनुमति प्राप्त करने के बाद संस्था के मैदान का उपयोग करने का आदेश जारी किया था।

इस आदेश के अनुक्रम में डाइट प्राचार्य ने डाइट मैदान की अनुमति एसडीएम द्वारा दिये जाने के पर्व अपनी एनओसी में तमाम शर्तें शामिल थीं। चेम्बर को व्यापार मेले के लिये मैदान देने के लिये जो शर्तें तय की गई थीं जिनमें प्राथमिक शर्त संस्थान परिसर में रोपित पौधों की सुरक्षा प्रभावित नहीं करना प्रमुख था। इसके साथ ही जो अन्य शर्तें थीं उनमें संस्थान परिसर स्थित आवासीय भवन, प्रशासनिक भवन एवं छात्रावास तथा उसके सम्मुख के क्षेत्र का उपयोग संबंधितों द्वारा किसी भी प्रयोजन में नहीं करने कहा गया था। इन्ही शर्तों के आधार पर अनुविभागीय दण्डाधिकारी ने चेम्बर को मेला स्थल के लिये अनुमति दी थी।

यूं उड़ाई दंडाधिकारी के आदेश की धज्जियां
डाइट मैदान की अनुमति अनुविभागीय अधिकारी के न्यायालय द्वारा जारी की गई थी। अर्थात उनकी शर्तों का उल्लंघन न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना माना जाएगा। लेकिन चेम्बर ने दण्डाधिकारी के आदेश को ताक पर रखते हुए मनामानी तरीके से उन स्थलों पर भी अपने स्टाल सजा लिये जहां की अनुमति उन्हें नहीं थी। इस मामले में डाइट के प्राचार्य भी चुप्पी साधे हुए हैं और उन्होंने इस अनियमितता की जानकारी अभी तक आधिकारिक तौर पर अनुमति जारी कर्ता अधिकारी को नहीं दी है।

जबकि स्थिति यह है कि डाइट छात्रावास के मुख्य द्वार के सामने ही स्टाल बना दिये जाने से विद्यार्थियों का सीधा निकास प्रभावित हो रहा है। जबकि यह संस्थागत नियमों के विपरीत है। किसी संस्थान को दिये गये स्थल में उस मूल संस्थान के प्रतिष्ठानों नियमितता प्रभावित नहीं की जा सकती है। लेकिन प्राचार्य ने यह जानकारी भी एसडीएम या डीएम को नहीं दी।

उखाड़ दिये पौधे, हटा दिये ट्री गार्ड
हास्टल के सामने के स्थल के उपयोग पर प्रतिबंध के बाद भी डाइट द्वारा शासकीय योजना के तहत किये गये पौधरोपण स्थल का जबरिया उपयोग कर लिया है। यहां पौधरोपण के लिये लगी सुरक्षा जाली और पटिया उखाड़ दी है साथ ही कई पौधों को भी उखाड़ दिया गया है। इतना ही नहीं कुछ पौधों पर लगे ट्री गार्ड हटाकर उनके ऊपर स्टाल तान दिये गये हैं। यह एसडीएम के आदेशों के तो विपरीत है साथ ही पर्यावरण सुरक्षा के म²ेनजर एनजीटी के आदेशों का भी उल्लंघन है। हद तो यह हो गई कि डाइट परिसर में तैयार की गई नक्षत्र वाटिका को भी नहीं छोड़ा गया। बल्कि इस पूरी वाटिका के ऊपर ही डोम तैयार किया जा रहा है। जबकि इस स्थल को चेम्बर को नहीं दिया गया है।

नहीं दिया पूरा किराया
चेम्बर को डाइट मैदान देने के लिये जो अनुमति आदेश एसडीएम द्वारा दिया गया है उसकी कंडिका 9 के अनुसार जो किराया नियत है उसका भी पूरा भुगतान चेम्बर द्वारा नहीं किया गया है। जबकि नियमानुसार इसका किराया प्रतिदिवस 10 हजार रुपये व 1500 रुपये साफ सफाई का कुल 11 दिन का 1,11,500 रुपये जमा करने थे। लेकिन चेम्बर ने कलेक्टर द्वारा सहमति का हवाला देते हुए 15000 रुपये ही जमा किये हैं। जबकि कलेक्टर की शुल्क में छूट की कोई लिखित अनुमति अभी तक डाइट को नहीं मिली है न ही अनुमति आदेश में छूट का कोई उल्लेख है।

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