हसबैंड के प्रोत्साहन से सफलता चूम रही कदम

हसबैंड के प्रोत्साहन से सफलता चूम रही कदम
Wife appreciation day

Jyoti Gupta | Updated: 18 Sep 2019, 12:44:47 PM (IST) Satna, Satna, Madhya Pradesh, India

वाइफ एप्रिशिएशन डे:मंजिल तक पहुंचाने में बहुत बड़ा योगदान

 

सतना. एक कहावत है कि एक सफल व्यक्ति के पीछे किसी महिला का हाथ होता है। वो महिला मां, बहन, मित्र और पत्नी हो सकती है। लेकिन इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता कि एक सक्सेसफुल वाइफ की सफलता के पीछे सिर्फ और सिर्फ उसके हैसबैंड का हाथ होता है। ये हम नहीं कह रहे बल्कि शहर की महिलाएं कह रही हैं। उनका कहना है कि शादी के बाद अगर उनको उनके हसबैंड एप्रिसिएट नहीं करते तो वह सफल नहीं हो पाती। आज भी कई शादीशुदा महिलाएं शिक्षा सा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं जिसमें उनके पतियों का महत्वपूर्ण योगदान है। किचन की मल्लिका बनाना हो या फिर किसी भी क्षेत्र में आगे बढऩा, इन सबके पीछे उनके पतियों का ही एप्रिशिएशन रहा। आज वाइफ एप्रिशिएशन डे है जानते हैं शहर की उन महिलाओं से जिनके हसबैंड उनके किस तरह से एप्रिशिएट करते हैं।

खुद का बिजनेस ओपन करने में की मदद

आदर्श नगर निवासी सोनम अग्रवाल कहती हैं कि उनके हसबैंड उनको हर काम के लिए एप्रिशिएट करते हैं। यही वजह कि उन दोनों की शादीशुदा लाइफ बेहद खुशनुमा है। उनको जब मैंने खुद का बिजनेस ओपन करने के लिए कहा तो उन्होंने तुरंत मेरा सर्पोट किया। इसके बाद मैंने घर में ही बैग और कवर, डेकोरेटिव आइटम्स की शॉप खोल ली। जब समय नहीं मिलता तो वो खुद ही मेरे लिए खाना बना देते हैं। मेरी खुद की पहचान बन सके इसके लिए वे हमेशा तैयार रहते हैं। फ्री टाइम में वे खुद ही मेरी शॉप को संभाल लेते हैं उस दौरान मुझे आराम करने को मिल जाता है। दोनों लोग मिलकर घर का काम करते हैं ताकि उनकी जॉब और मेरा काम दोनों प्रभावित न हो। एक हसबैंड का अपनी वाइफ के लिए इससे अधिक क्या प्रोत्साहन हो सकता है।

मुझे पढ़ाने के लिए करा लिया अपना ट्रांसफर

धवारी निवासी नीतू त्रिपाठी भी अपने हसबैंड के प्रोत्साहन की वजह से आज प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर पा रही हैं। नीतू ने बताया कि मैं पढ़ाई में कभी अच्छी थी और एमपीपीएसी की तैयारी करना चाहती थी। दो साल पहले ही मेरी शादी हुई तब मुझे लगा कि अब मैं शायद प्रतियोगी परीक्षाओं में नहीं बैठ पाऊंगी। पर एेसा नहीं हुआ। आपको यकीन नहीं होगा जब मैंने अपने हसबैंड विभव त्रिपाठी से कहा कि मैं प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना चाहती हंू तो उन्होंने खुशी जताई और कहा कि तुम तैयारी कर सकती हो। इसके बाद उन्होंने अपना ट्रांसफर कराया। ताकि मैं उनके साथ रहकर नियमित रूप से प्रतियोगी परीक्षा एमपीपीएस की तैयारी कर संकू। उन्होंने ही मेरा दाखिला एक निजी कोचिंग इंस्टीट्यूट में कराया। अच्छी प्रकाशन की किताबे मुझे ला कर देते हैं। इतना ही नहीं जब मैं पढ़ाई में व्यस्त रहती हंू तब वह मुुझे डिस्टर्ब नहीं करते बल्कि खुद ही खाना पका कर मुझे भी खिला देते हैं। अगर पति का एेसा साथ हर पत्नी को मिले तो वे भी बहुत आगे तक जा सकती हैं।

शिक्षक बनाने में उनका रहा सहयोग

उतैली निवासी प्रियंका दुबे ने बताया कि शादी के कई वर्ष हो गए। उनका पूरा ध्यान बच्चों और परिवार में रहा। जब बच्चे बड़े हुए तब मैंने अपने पति कमलेश दुबे से कहा कि मैं कुछ करना चाहती हंू। उनके पति ने कहा नेकी और पूछ पूछ कर । बताइए क्या करने की इच्छा है। तब मैंने कहा कि अब मैं शिक्षिका बनना चाहती हंू। तो उन्होंने कहा मुझे क्या करना होगा। मैंने कहा कि आप मेरा रेज्यूम तैयार कर दें और अच्छे स्कूलों की जानकारी जुटा दें। उन्होंने एेसा ही किया। इसके बाद मैंने एक साल तक कई स्कूलों में ट्राई किया। एक साल तक किसी का रिसपॉन्स नहीं मिला। पर हसबैंड ने कहा कि तुम योग्य हो निराश मत हो तुम्हारा हो जाएगा। एक साल बाद मुझे एक स्कूल में बतौर शिक्षिका काम करने का मौका मिल गया। वो आर्मी में जॉब करते हैं। फिर भी वो मुझे आगे बढऩे में मदद करते हैं। मेरे लिए समय निकालते हैं। घर का काम हो या फिर बाहर कर वे सर्पोट बराबर मिलता है। मैं घर में ही कुछ बच्चों को फ्री में एजुकेट करती हंू। वे बच्चे बेहद गरीब घर से हैं। मेरे हसबैंड मुझे आर्थिक और मोरल दोनों तरह से प्रोत्साहित करते हैं।

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