मध्यप्रदेश के इन थानों में महिला अधिकारी न पुलिसकर्मी, पुरुषों को फरियाद सुनाती है पीड़िताएं

मध्यप्रदेश के इन थानों में महिला अधिकारी न पुलिसकर्मी, पुरुषों को फरियाद सुनाती है पीड़िताएं

Suresh Kumar Mishra | Publish: Sep, 16 2018 01:19:13 PM (IST) Satna, Madhya Pradesh, India

चित्रकूट अनुभाग: काम करने को तैयार नहीं महिला अधिकारी

सतना। महिलाओं की सुरक्षा के लिए भले ही प्रदेश सरकार संजीदा हो, लेकिन पुलिस गंभीर नहीं है। जिले का दस्यु प्रभावित चित्रकूट अनुभाग एेसा है जहां पांच थानों के बीच एक महिला पुलिस अधिकारी तक तैनात नहीं है। एेसे में छेड़छाड़, दुष्कर्म और अन्य अपराधिक मामलों में पीडि़त महिलाएं पुरुष अफसरों को ही फरियाद सुनाने को मजबूर हैं।

कई बार लोक लज्जा के डर से महिलाएं पुरुषों के सामने आपबीती जाहिर भी नहीं कर पाती। एेसे में कुछ मामले थाने की देहरी से ही रफा-दफा कर दिए जाते हैं। इसके जब गलत परिणाम सामने आते हैं तो पुलिस की ही किरकिरी होती है। लेकिन विभाग के अफसरों ने इस ओर गंभीरता ही नहीं बरती।

इसलिए आते हैं महिला थाने
दस्यु प्रभावित अनुभाग चित्रकूट में दुष्कर्म के मामले सामने आने पर पीडि़ता को महिला थाने भेजा जाता है। इसके लिए पीडि़ता को कई घंटे का इंतजार करना होता है और कई बार तो उसे दूसरे दिन आने को कह दिया जाता है। जानकारों का कहना है कि छेड़छाड़ के प्रकरण में महिला सरपंच, महिला सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका की मौजूदगी में थाना के पुरुष अधिकारी पीडि़ता के बयान दर्ज करा सकते हैं। दुष्कर्म के मामलों में महिला पुलिस अधिकारी ही जरूरी है। एेसे में चित्रकूट अनुभाग के ज्यादातर मामलों में फरियादी या पीडि़ता को इंतजार ही करना होता है।

थानेदारों का मोह
पहले से जिले में पदस्थ महिला पुलिस अधिकारियों ने विभाग में खासी पैठ बना रखी है। इसलिए चित्रकूट अनुभाग के लिए तबादला सूची तैयार होने पर भी उनके नाम का जिक्र नहीं किया जाता। नई भर्ती में आई महिला पुलिस अधिकारियों के नाम पर मुहर लगती है तो वह वहां काम करने ही नहीं जाती और कुछ दिन बाद शहर या इससे जुड़े थाना में पोस्टिंग करा लेती हैं। जबकि संवेदनशील चित्रकूट अनुभाग में महिला पुलिस अधिकारी की तैनाती जरूरी है।

महिला पुलिस अधिकारी की जरूरत
जानकार बताते हैं कि छेड़छाड़ या दुष्कर्म के अपराध में पीडि़ता के बयान लेने और प्रकरण दर्ज करने के लिए नियमों के तहत महिला पुलिस अधिकारी की जरूरत होती है। इसके लिए उप निरीक्षक या सहायक उप निरीक्षक स्तर की महिला पुलिस अधिकारी होनी चाहिए। जो पीडि़ता के बयान दर्ज करने के साथ अदालत की कार्रवाई सही तरीके से संपादित करा सके।

क्यों बने लोक सेवक

चित्रकूट अनुभाग में महिला उप निरीक्षक की तैनाती के लिए पूर्व में आदेश भी किए गए, लेकिन विभाग के लिए कुछ अफसरों से मिलकर उन आदेशों को रद्द करा दिया गया। समस्या यह भी है कि चित्रकूट में महिला पुलिस अधिकारियों के रहने के लिए कई दिक्कत हैं। एेसे में सवाल उठता है कि अगर दिक्कतों का सामना ही नहीं करना तो फिर लोक सेवक ही क्यों बने?

यह है थानों का हाल
चित्रकूट अनुभाग के थाना मझगवां में तीन महिला आरक्षकों की तैनाती है। मौजूदा समय में इनमें दो आरक्षक अवकाश पर हैं। एक महिला आरक्षक थाना नयागांव में पदस्थ है। इसके अलावा थाना बरौंधा, धारकुण्डी, सभापुर में महिला आरक्षक तक नहीं।

हर रोज आते हैं महिला अपराध से जुड़े प्रकरण

गौर करने वाली बात तो यह है कि दस्यु प्रभावित इन सभी थानों में लगभग हर रोज महिला अपराध से जुड़े प्रकरण आते हैं। दूसरी ओर प्रत्येक माह चित्रकूट में मेला भी लगता है। उप्र की सीमा से सटे चित्रकूट के नयागांव थाना में हर दूसरे दिन महिलाओं से जुड़े प्रकरण पुलिस के पास आते हैं।

नई भर्ती में आए अधिकारी दस्यु प्रभावित इलाके में काम करने से बचते हैं, लेकिन महिला पुलिस अधिकारी की तैनाती जरूरी है। जल्द ही नयागांव थाना के लिए आदेश कर दिए जाएंगे।
संतोष सिंह गौर, एसपी

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