जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का जन्म-तप कल्याणक महोत्सव पर जिनालयों में गूंजे जयकारे

abhishek ojha

Publish: Feb, 15 2018 05:57:12 PM (IST)

Sawai Madhopur, Rajasthan, India
जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का जन्म-तप कल्याणक महोत्सव पर जिनालयों में गूंजे जयकारे

जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का जन्म-तप कल्याणक महोत्सव पर जिनालयों में गूंजे जयकारे

सवाईमाधोपुर. जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का जन्म-तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। इस दौरान आवासन मण्डल के दिगम्बर जैन मंदिर सहित नगर परिषद के अन्य मंदिर भगवान वासुपूज्य के जयकारों से गूंज रहे थे। प्रवक्ता ने बताया कि जिनालयों में जिनेन्द्र देव का अभिषेक कर अष्ट द्रव्यों से पूजा-आराधना कर कल्याणक दिवसों के अघ्र्य चढ़ाए। महिलाओं द्वारा बधाई गीत गाए। महिलाओं ने जैन भजनों की प्रस्तुति दी।

शांति पाठ व विसर्जन विधि के साथ पूजा कर जिनेन्द्र देव की आरती उतारी। दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र चमत्कारजी आलनपुर के पंडित उमेश जैन शास्त्री ने जन्म तप कल्याणक के महत्व पर प्रकाश डाला।

जैन धर्म के 18 वें तीर्थंकर भगवान अरहनाथ के गर्भकल्याणक की पूर्व संध्या पर मुनि सुधासागरजी की प्रेरणा से शनिवार शाम दिगम्बर जैन नेमिनाथ सोशल ग्रुप के नेतृत्व में सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा नेमिनाथजी की नसियां आलनपुर में णमोकार महामंत्र का जाप, भक्तामर स्त्रोत पाठ का शास्त्रोक्त पद्धति से किया जाएगा। इस दौरान बाबूलाल रांवका, प्रेमचन्द श्रीमाल, अनिल पल्लीवाल, सुरेश जैन, राहुल जैन, मनीष पहाडिय़ा आदि थे।

लोककथा : अंगूठी चोर
महाराजा कृष्णदेव राय एक कीमती रत्नजडि़त अंगूठी पहना करते थे। राजमहल में आने वाले मेहमानों और मंत्रीगणों से भी वह बार-बार अपनी उस अंगूठी का जिक्र किया करते थे। एक बार कृष्णदेव राय उदास होकर अपने सिंहासन पर बैठे थे। तभी तेनालीराम वहां आ पहुंचे। उन्होंने राजा की उदासी का कारण पूछा। तब राजा ने बताया- 'मेरी पसंदीदा अंगूठी खो गयी है।

मुझे पक्का शक है कि उसे मेरे बारह अंगरक्षकों में से किसी एक ने चुराया है। बुद्धिमान तेनालीराम कुछ सोचते हुए बोले- 'मैं अंगूठी चोर को बहुत जल्द पकड़ लूंगा उन्होंने बारह अंगरक्षकों से कहा- 'आप सब मेरे साथ आइये, हम सबको काली मां के मंदिर जाना है। मंदिर पहुंच कर तेनालीराम पुजारी के पास गए और उन्हें कुछ निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने अंगरक्षकों से कहा- 'आप सबको बारी-बारी से मंदिर में जाकर मां काली की मूर्ति के पैर छूने हैं और तुरंत ही बाहर निकल आना है।

ऐसा करने से मां काली आज रात स्वप्न में मुझे उस चोर का नाम बता देंगी। अब सारे अंगरक्षक बारी-बारी से मंदिर में जाकर माता के पैर छूने लगे। जैसे ही कोई अंगरक्षक पैर छू कर बाहर निकलता, तेनालीराम उसका हाथ सूंघते और एक कतार में खड़ा कर देते। कुछ ही देर में सभी अंगरक्षक एक कतार में खड़े हो गए। थोड़ी देर बाद तेनालीराम बोले- 'सातवें स्थान पर खड़ा अंगरक्षक ही चोर है।

ऐसा सुनते ही वह अंगरक्षक भागने लगा, पर वहां मौजूद सिपाहियों ने उसे धर दबोचा। राजा और बाकी सभी लोग चकित थे कि तेनालीराम ने यह कैसे पता लगाया। तेनालीराम सबकी जिज्ञासा शांत करते हुए बोले- 'मैंने पुजारी जी से कह कर काली मां के पैरों पर तेज सुगन्धित इत्र छिड़कवा दिया था।

जिसने भी मां के पैर छुए, उसके हाथ में वही सुगन्ध आ गयी। लेकिन जब मैंने सातवें अंगरक्षक के हाथ सूंघे तो उनमें कोई खुशबू नहीं थी। उसने पकड़े जाने के डर से मां काली की मूर्ति के पैर छुए ही नहीं। एक बार फिर सभी तेनालीराम की बुद्धिमत्ता के कायल हो गए।

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