सडक़, बिजली व साफ पानी, मिला न उम्मीद!

मूलभूत सुविधाओं को तरस रहा बेरई की ढाणी व गांव, जनप्रतिनिधियों व सरकारी अधिकारियों की अनदेखी

By: Arun verma

Published: 24 Jul 2020, 07:31 PM IST

बालेर. केन्द्र व राज्य सरकार गांंव-ढाणियों में सडक़, बिजली, पानी, चिकित्सा व शिक्षा आदि मूलभूत सुविधाओं को विकसित करने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही है, लेकिन ग्राम पंचायत बालेर की बेरइ की ढाणी के गांव भीमपुरा, विश्वनाथपुर व श्रीनाथपुरा में आज तक विकास की किरण नहीं पहुंची है। यहां के ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं, लेकिन इनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं।

लगता है 16 किमी का चक्कर
डांग क्षेत्र के इन गांव के लोगों को आम दैनिक उपयोग की सामग्री, चिकित्सा सेवाओं के लिए लगभग 8.10 किलोमीटर दूर पैदल चलकर बालेर कस्बे आना पड़ता है। गांव को ग्राम पंचायत मुख्यालय से जोडऩे के लिए सडक़ तक नहीं है। लोगों को अरावली पर्वतमाला की दुर्गम पहाडिय़ों को भी पार करना पड़ता है। गांव में अगर कोई गंभीर बीमार हो जाए तो उसे चारपाई पर लादकर कस्बा स्थित चिकित्सालय लाना पड़ता है।

गर्मी में पेयजल संकट
गर्मी के दिनों में पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है। इस दौरान भूजल स्तर नीचे जाने से हैंडपम्प और कुएं सूख जाते हैं। ताल-तालाब में भी पानी खत्म हो जाता है। ऐसे में महिला पुुुरुषों को 4 किमी दूर जाकर पीने के पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है।

विस्थापन का पेच
ग्राम पंचायत बालेर के गांव बेरर्ई का नाम वन विभाग की विस्थापन लिस्ट में है। हालांकि गांव का अब तक विस्थापन नहीं हो पाया है। इसके चलते यहां सभी विकास कार्य रुके हुए हैं। आलम यह है कि यहां के लोगों को न तो प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना का लाभ मिल पा रहा है। न ही स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण में आर्थिक मदद। इधर, खण्डार उपखण्ड के कई गांव विस्थापन लिस्ट में होने के बावजूद वहां सभी तरीके के विकास कार्य करवाए जा रहे हैं।

इनका कहना है...
- हमने कई बार आवास, शौचालय आदि योजनाओं का लाभ देने की मांग की तो गांव के विस्थापन होने की बात कहकर मना कर देते है।
रकम सिंह गुर्जर, किसान, बेरई

-हमें कोई सुविधा नहीं मिल रही है। गांव में सडक़, पानी, बिजली कुछ नहीं है। हमारी कोई नहीं सुनता।
छोट्या गुर्जर, किसान, विश्वनाथपुरा

हमारे बच्चों को भविष्य खराब हो रहा है। हमारे बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। हम पिछड़ते जा रहे हैं। इसका जिम्मेदार प्रशासन है।
मुरारी गुर्जर, किसान, विश्वनाथपुरा

- मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का जायजा लिया जाएगा। हमारे स्तर पर जो कार्रवाई हो सकेगी की जाएगी।
जगदीश बैरवा, विकास अधिकारी, पंचायत समिति, खण्डार

Arun verma
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