अभिभावकों पर बढ़ रहा आर्थिक भार, शिक्षा विभाग की अनदेखी...

निजी स्कूलों में निर्धारित नहीं ड्रेस कोड, महंगे दामों की ब्लेजर मंगाने पर कर है मजबूर

By: Shubham Mittal

Published: 09 Dec 2017, 05:58 PM IST

सवाईमाधोपुर. सरकार की ओर से स्कू लों में डे्रस कोड लागू करने के बाद भी जिले के कई निजी स्कूल अपनी मनमर्जी से ड्रेस कोड लागू कर रहे हैं। इससे अभिभावकों पर आर्थिक भार बढ़ रहा है। इस संबंध में अभिभावकों ने कई बार शिक्षा अधिकारियों को शिकायत भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

दिसम्बर माह में मंगवा रहे महंगे गर्म कपड़े
जिला मुख्यालय पर प्रशासन व शिक्षा विभाग की अनदेखी के चलते निजी स्कूल संचालक ड्रेस कोड के नाम पर अभिभावकों का शोषण करने से नहीं चूक रहे हैं। वे दिसम्बर माह में अभिभावकों पर दबाव बनाकर महंगे गर्म कपड़े मंगवा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि इसके बारे में अधिकारियों को जानकारी नहीं है, लेकिन वे निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। ऐसे में उनके हौसले बुलंद हैं।

यह है नियम
आरटीई प्रभारी त्रिलोकचंद मीणा ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कोई भी निजी स्कूल कम से कम तीन वर्ष से पहले स्कूल की यूनिफॉर्म नहीं बदलेगा। सर्दी के मौसम में विद्यार्थी यूनिफॉर्म के रंग की जर्सी, स्वेटर या कोई भी गर्म कपड़ा पहनकर आ सकता है। कोई एक स्वेटर लागू नहीं कर सकता है। इसके अलावा वह किसी एक दुकान विशेष से यूनिफॉर्म व किताब आदि खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा। अगर ऐसा करता पाए जाने पर संबंधित स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

 

ये बोले अभिभावक
नहीं उभरने देते हैं आर्थिक भार से
राजविहार निवासी अभिभावक रोहित शर्मा ने बताया कि स्कूल में उसके बुआ की लड़की पढ़ती है। स्कूल प्रबंधन की ओर से दिसम्बर माह में ब्लेजर लाने के लिए मजबूर कर रहे है। नहीं लाने पर टीसी काटने की धमकी दी जा रही है। जबकि अक्टूबर माह में ही उसके लिए जर्सी लेकर आए थे। पहले ही निजी स्कूलों की किताबों का भार अभी दूर नहीं हुआ है। इससे पहले ब्लेजर का भार डाला जा रहा है। एक दुकान विशेष से ब्लेजर व जर्सी मंगवाने के पीछे कमीशन का खेल चल रहा है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।

ब्लेजर नहीं तो परीक्षा से रखेंगे वंचित
मण्डी रोड आदिनाथ नगर निवासी अभिभावक धर्मेन्द्र शर्मा का कहना है कि उनके बच्चे दशहरा मैदान के समीप स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ते हैं। उन्होंने बालकों को अक्टूबर माह में काले रंग की जर्सी दिलाई थी, लेकिन अब स्कूल प्रशासन की ओर से जर्सी पहनाकर भेजने से मना कर दिया। उनका क हना है कि एक हजार रुपए की कीमत की ब्लेजर (कोट) स्कूल ड्रेस में शामिल है। यह ब्लेजर बजरिया स्थित एक ही दुकान से लाना अनिवार्य है। ब्लेजर नहीं लाने पर बालक की टीसी काट दी जाएगी और उसे परीक्षा से वंचित रखा जाएगा।

फुल पेंट पहनाने पर भी रोक
साकेत नगर निवासी अभिभावक पंकज गौतम ने बताया कि सर्दी के मौसम में बालक
को स्कूल डे्रस कोड के आधार पर फुल पेंट पहनाकर भेजते हैं तो व्यवस्थापक इसका विरोध करते हैं। वे बालकों को हाफपेंट में ही आने को बाध्य करते हैं। विरोध करने पर परीक्षा में नहीं बैठाने तथा बीच सत्र में स्कूल से निष्कासित करने की धमकी दे रहे हैं। स्कूल प्रशासन की ओर से हर साल डे्रस बदली जा रही है। इससे अभिभावकों पर आर्थिक भार बढ़ रहा है।

इनका कहना है....
कोई भी निजी स्कूल महंगे दामों की गर्म कपड़े खरीदने के लिए बाध्य करता है तो वह नियमों के विरूद्ध है। बालक स्कूल डे्रस के रंग की स्वेटर, जर्सी या अन्य कोई भी गर्म कपड़ा अपनी स्वेच्छा से पहनकर आ सकता है। इस संबंध में शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर संबंधित स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अशोक शर्मा, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक सवाईमाधोपुर

बालकों को एक दुकान विशेष से गर्म कपड़े खरीद के लिए बाध्य करने की शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
चन्द्रशेखर शर्मा, अवर उप जिला शिक्षा अधिकारी प्रा. सवाईमाधोपुर

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