धरा रही प्यासी तो खरीफ पर पड़ेगा असर

धरा रही प्यासी तो खरीफ पर पड़ेगा असर

Rajeev Pachauri | Updated: 12 Jun 2019, 09:26:46 PM (IST) Sawai Madhopur, Sawai Madhopur, Rajasthan, India

गंगापुरसिटी . केरल में मानसून ने एक सप्ताह देरी से दस्तक दी है। वहीं इस बार प्री मानसून बारिश भी नहीं बरसी है। ऐसे में इसका असर खरीफ की बुवाई में दिख सकता है। उपखंड की खेती बारिश आधारित है। मांड क्षेत्र पूरी तरह से बारिश पर भी निर्भर रहता है। ऐसे में इस बार प्री मानसून की बारिश नहीं होने का असर खरीफ का रकबा घटने के रूप में दिख सकता है। हालांकि किसानों को अभी प्री मानसून बारिश की उम्मीद है।

गंगापुरसिटी . केरल में मानसून ने एक सप्ताह देरी से दस्तक दी है। वहीं इस बार प्री मानसून बारिश भी नहीं बरसी है। ऐसे में इसका असर खरीफ की बुवाई में दिख सकता है। उपखंड की खेती बारिश आधारित है। मांड क्षेत्र पूरी तरह से बारिश पर भी निर्भर रहता है। ऐसे में इस बार प्री मानसून की बारिश नहीं होने का असर खरीफ का रकबा घटने के रूप में दिख सकता है। हालांकि किसानों को अभी प्री मानसून बारिश की उम्मीद है।


जानकारों का कहना है कि मानसून के प्रदेश में तय समय के पहुंचने से पूर्व प्री मानसून की बारिश हो जाती है। इससे धपती धरा को राहत मिलती है। वहीं अन्नदाता को भी इससे खासा लाभ मिलता है। प्री मानसून बारिश के साथ ही किसान खरीफ फसल की तैयारी में जुट जाता है। मसलन, जुताई आदि का कार्य शुरू कर दिया जाता है। इस दरिम्यान कई जगह पानी वाले स्थानों पर तो बुवाई तक हो जाती है।

इस बीच मानसून के पहुंचने से फसलों को जीवनदान मिल जाता है। इस बार अब तक प्री मानसून की बारिश नहीं हुई है। ऐसे में किसान मायूस हैं। मानसून के आठ दिन की देरी से चलने के कारण भी बारिश नहीं होना माना जा रहा है। किसानों का मानना है कि मानसून की दस्तक से पहले एक-दो बारिश हो जाती है तो यह खरीफ की फसल के काफी लाभदायक रहता है। यदि प्री मानसून बारिश नहीं होती है तो खरीफ की खेती का रकबा घटने का अंदेशा बना रहता है।


बारिश पर निर्भर है खेती


उपखंड की बात करें तो यहां ज्यादातर खेती बारिश पर ही निर्भर है। मांड क्षेत्र पूरी तरह से बारिश की खेती पर निर्भर रहता है। खरीफ की फसल का भविष्य यहां बारिश ही तय करती है। प्री मानसून बारिश के दरिम्यान यहां किसान खेत तैयार करते हैं इसके बाद बारिश की दस्तक के साथ ही बुवाई का काम शुरू हो जाता है। वर्तमान में किसान बेसब्री से प्री मानूसन बारिश का इंतजार कर रहे हैं।


विभाग ने किया जागरूक


खरीफ फसल की बुवाई से पूर्व कृषि विभाग किसानों को सफेद लट एवं टिड्डी नियंत्रण के लिए जागरूक किा है। इसके लिए कई स्थानों पर कृषक गोष्ठियां की गई हैं। उपखंड में सफेद लट से प्रभावित ग्राम पंचायतों में अभियान चलाकर कृषकों को बुवाई पूर्व नियंत्रण की जानकारी दी गई है। ताकि किसान अच्छी फसल का उत्पादन कर सकें।


इनका कहना है
मानसून से पूर्व की बारिश खेती के लिहाज से अच्छी रहती है। मांड क्षेत्र में तो किसान बारिश पर ही निर्भर है। यदि बारिश समय से नहीं हो पाती है तो इसका नकारात्मक असर खरीफ की फसल पर पड़ता है।
- गोपाल शर्मा, कृषि अधिकारी गंगापुरसिटी

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