वन भूमि से अतिक्रमण हटाने गया दल बैरंग लौटा, हिन्दवाड़ गांव विस्थापन का मामला, ग्रामीणों ने किया वनाधिकारियों का घेराव

Vijay Kumar Joliya

Updated: 14 Jul 2019, 06:00:00 AM (IST)

Sawai Madhopur, Sawai Madhopur, Rajasthan, India

सवाईमाधोपुर. हिन्दवाड़ गांव ( Hindwad village ) के विस्थापन की पहेली सुलझने का नाम नहीं ले रही है। sawai madhopur ranthambore news वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी शनिवार को गांव से विस्थापित होने के बाद पुन: वापस आए लोगों को वन भूमि ( Forest land ) से खदेडऩे के लिए गांव पहुंचे। दल ने जमीनों पर जेसीबी चलाने का प्रयास किया। इस कार्रवाई का ग्रामीणों ने विरोध किया। वहीं वन विभाग की टीम का घेराव कर लिया। लोगों के बढ़ते विरोध को देखते हुए दल सदस्यों को बैरंग लौटना पड़ा।

 

 

ग्रामीणों का यह तर्क
सत्यनारायण स्वामी व मेघराज मीणा अन्य ने बताया कि 2009 में वन विभाग की ओर से चिह्नित किए गए परिवारों में से कुछ लोग विस्थापन का पैकेज लेने के बाद भी गांव में वापस आकर वन विभाग को सुपुर्द की गई भूमि पर जुताई का कार्य कर रहे हैं, लेकिन विभाग की ओर से ऐसे लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। बल्कि वन विभाग अपनी साख को बचाने के लिए जिन लोगों ने विस्थापन से इंकार कर दिया है और जो लोग आज भी अपनी खातेदारी की जमीन पर खेती का काम कर रहे हैं। उन्हें बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के जबरन गांव से खदेडऩे का प्रयास कर रहे हैं।

 

 


थाने में पहुंचे ग्रामीण
वन विभाग का जाप्ता पहुंचने के बाद ग्रामीण रवांजना डूंगर थाने पहुंचे और पुलिस से मदद की गुहार की। इसके बाद ग्रामीणों के साथ रवांजना डूंगर थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने वन अधिकारियों व ग्रामीणों की समझाइश का प्रयास किया।

 


बिना नोटिस के कार्रवाई
ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के अधिकारी नियमों को ताक में रखकर अपनी मनमर्जी कर रहे हैं। विभाग की ओर से कार्रवाई से पूर्व संबंधित लोगों को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया। बिना किसी पूर्व सूचना के ही वन विभाग के अधिकारी अवैध रूप से कार्रवाई कर रहे हैं।

 


नहीं मिला पूरा पैकेज
ग्रामीणों ने 2009-10 में जब विस्थापन शुरू हुआ था। तब दस लाख की मुआवजा राशि ग्रामीणों को एक मुश्त देने की बात हुई थी, लेकिन गांव के अधिकतर परिवारों को अब तक मुआवजा की पूरी रकम नहीं मिली है। पूर्व में न्यायालय की ओर से भी वन विभाग को ग्रामीणों को पूरी मुआवजा राशि देने के बाद भी भूमि का अधिग्रहण करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन इसके बाद भी वन विभाग के अधिकारी जबरन कार्रवाई कर रहे हैं।

 


वन विभाग का यह है तर्क
वनाधिकारियों ने बताया कि जिन लोगों ने विस्थापन के पैकेज को स्वीकार करके गांव को पहले छोड़ दिया था और अब वे वापस गांव में आकर रह रहे हैं। ऐसे लोगों को एक बार फिर से गांव से बाहर भेजा जाएगा। विभाग की माने तो वनकर्मियों ने किसी भी खातेदार की भूमि पर जेसीबी नहीं चलाई।

 


ये बोले लोग...
वन विभाग जबरन तरीके से खातेदारी की भूमि वाले लोगों पर कार्रवाई कर रहा है। जो सरासर गलत है। वन अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। अन्यथा हमको न्यायालय की शरण में जाना होगा।
- मुरारीलाल स्वामी, स्थानीय निवासी

 

यह सही है कि वन विभाग की ओर से पूर्व में विस्थापन की प्रक्रिया की गई थी, लेकिन अब तक लोगों को पूरा पैकेज ही नहीं दिया गया है। ऐसे में जब तक वन विभाग लोगों को पूरा पैकेज नहीं दे देता उसे कार्रवाई का हक नहीं है। यह न्याय संगत नहीं है।
- रामप्रसाद, स्थानीय निवासी।

 

वन विभाग की ओर से बिना किसी पूर्व सूचना के कार्रवाई की जा रही है। जिन लोगों ने पैकेज नहीं लिया है। उनकी खातेदारी भूमि पर जेसीबी चला रहा है जो गलत है। वन अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
- चौथमल दास स्वामी, स्थानीय निवासी

 

वन विभाग मनमर्जी करते हुए गरीबों को परेशान कर रहा है। जिन लोगों को विस्थापन का पैकेज ही नहीं मिला है। उन्हें जबरन परेशान किया जा रहा है। पूर्व में भी ऐसा कई बार हो चुका है। कोर्ट ने भी जब तक विभाग पैकेज का पूरा पैसा नहीं देता, जमीन लोगों की ही मानी है। इसके बाद भी वन विभाग बाज नहीं आ रहा है। वन विभाग हर बार अवकाश के दिन ही कार्रवाई करता है ताकि ग्रामीण कुछ ना कर सकें।
- सत्यनारायण स्वामी, स्थानीय निवासी।

 

इनका कहना है....
कुछ लोग विस्थापन के बाद भी वापस आ गए हैं। ऐसे में कार्रवाई के लिए जाप्ता बुलाया गया था। कार्रवाई के दौरान कुछ ग्रामीणों ने दस्तावेज दिखाकर जमीन को अपना बताया। ऐसे में कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया है। अब दस्तावेजों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- संदीप कुमार, एसीएफ, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर

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