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सवाई माधोपुर

राजस्थान के जंगल चीतों के लिए अनुकूल, 5 साल पहले तलाशी थी संभावनाएं

नामीबिया से मध्यप्रदेश के नेशनल पार्क कूनों में बसाए गए चीतों को अब कूनों का जंगल रास आने लगा है। यहां पर चीतों के कुनबे में लगातार इजाफा भी हो रहा है।

सवाई माधोपुरMay 16, 2024 / 11:28 am

Kirti Verma

Sawaimadhopur News : वन विभाग व सरकार पहल करे तो प्रदेश के जंगलों में भी चीतों की दहाड़ गूंज सकती है। करीब पांच साल पहले डब्ल्यूआईआई और दक्षिणी अफ्रीका की एक टीम ने राजस्थान में चीतों को बसाने की संभावनाओं का आंकलन करने के लिए कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और बारां के शेरगढ़ अभयारण्य का दौरा किया था। इसके बाद टीम ने मुकुंदरा और शेरगढ़ अभयारण्य को चीतों के अनुकूल माना था।
बता दें कि नामीबिया से मध्यप्रदेश के नेशनल पार्क कूनों में बसाए गए चीतों को अब कूनों का जंगल रास आने लगा है। यहां पर चीतों के कुनबे में लगातार इजाफा भी हो रहा है। वहीं सवाईमाधोपुर के रणथम्भौर टाइगर रिजर्व का क्षेत्र कूनों के जंगलों से भी मिला हुआ है। यहां की आबोहवा में भी ज्यादा अंतर नहीं होने के कारण समानता ही है। इसके चलते ही गत दिनों एक चीता ओमान कूनो के जंगल से निकलकर राजस्थान के करौली के जंगलों तक आ गया था। बाद में पूणे से आई विशेषज्ञों की टीम चीते को ट्रेंकुलाइज कर वापस कूनो लेकर गई थी। ऐसे में अब एक बार फिर से राजस्थान में भी चीतों को बसाने को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
मुकुंदरा हिल्स और शेरगढ़ अभयारण्य को माना था अनुकूल
करीब पांच साल पहले डब्ल्यूआईआई और दक्षिण अफ्रीका की एक टीम ने राजस्थान में चीतों को बसाने की संभावनाओं के आंकलन के लिए कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और बारां के शेरगढ़ अभयारण्य का दौरा किया था। टीम ने मुकुंदरा और बारां के शेरगढ़ अभयारण्य को चीतों के अनकूल भी माना था। वहीं पूर्व में चीतों की रिवाइलडिंग के तहत दूसरे फेज में राजस्थान के जंगलों में चीतों को लाने की योजना भी थी। यहां तक कि वन विभाग ने शेरगढ अभयारण्य में तैयारी भी शुरू कर दी थी। यहां पर एनक्लोजर का भी निर्माण किया था, लेकिन अफसरों की इच्छाशक्ति के अभाव में मामला आगे नहीं बढ़ सका।
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विकसित हो सकता है पर्यटन सर्किट
यदि सरकार व वन विभाग पहल करे तो बारां के शेरगढ़ अभयारण्य में चीतों को शिफ्ट करने से प्रदेश के वाइल्ड लाइफ पर्यटन को पंख लग सकते हैं। साथ ही एमपी से राजस्थान तक एक वाइल्ड लाइफ पर्यटन सर्किट भी विकसित हो सकता है।
एक्सपर्ट व्यू
यह सही है कि पूर्व में डब्ल्यूआईआई की टीम ने कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और बारां के शेरगढ़ अभयारण्य को चीतों के अनकूल माना था। हालांकि बाद में चीतों को एमपी के कूनो में शिफ्ट किया गया था। लेकिन यदि वन विभाग व सरकार की ओर से राजस्थान में भी चीतों को शिफ्ट किया जाए तो यहां भी पर्यटन को चार चांद लग सकते हैं।
तपेश्वर सिंह भाटी, वन्यजीव एक्सपर्ट, कोटा।

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