
घुश्मेश्वर महादेव मंदिर। फोटो: सोशल
सवाईमाधोपुर। लंबे समय से पर्यटन सर्किट से जोड़ने की बाट जोह रहे शिवाड़ स्थित घुश्मेश्वर मंदिर को अब पंख लगेंगे। राजस्थान सरकार के 20 पर्यटन स्थलों के विकास में शिवाड़ घुश्मेश्वर महादेव मंदिर भी शामिल है। पर्यटन विभाग ने सार्वजनिक निर्माण विभाग को कार्यकारी एजेंसी बनाया है। ऐसे में अब क्षेत्रवासियों को भी प्राचीन शिव मंदिर के विकास की आस जगी है। गौरतलब है कि कस्बे सहित लोगों की ओर से घुश्मेश्वर महादेव मंदिर को पर्यटन का दर्जा दिलाने की लंबे समय से मांग उठाई जा रही है।
राज्य सरकार ने गुरुवार को एक सूची जारी की है। इसमें राज्य के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास के लिए कार्यकारी एजेंसी का निर्धारण किया है। इसमें सवाईमाधोपुर जिले में शिवाड़ स्थित घुश्मेश्वर महादेव मंदिर का भी नाम शामिल है। इसके लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग को कार्यकारी एजेंसी बनाया है।
शिवाड़ स्थित घुश्मेश्वर महादेव मंदिर को पर्यटन का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर लोग लंबे समय से मांग कर रहे थे। इसको लेकर राजस्थान पत्रिका ने 30 मई के अंक में ‘घुश्मेश्वर मंदिर को पर्यटन सर्किट से जोड़ने की मांग’ शीर्षक से समाचार का प्रकाशन किया था। इससे पहले भी कई बार घुश्मेश्वर महादेव मंदिर को पर्यटन स्थल से जोडऩे को लेकर खबरें प्रकाशित की थी। इसके बाद पांच जून को राज्य सरकार ने 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास की सूची जारी की है। इसमें सवाईमाधोपुर जिला भी शामिल है।
राजस्थान सरकार के पर्यटन विभाग ने राज्य सरकार की बजट घोषणा के अनरूप राज्य के 20 पर्यटन स्थलों के विकास के लिए कार्यकारी एजेंसियों का निर्धारण कर उन्हें 15 जून तक विकास के ब्लू प्रिंट बनाने के निर्देश दिए। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रेमप्रकाश शर्मा ने मंदिर के विकास के लिए राज्य की उपमुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री दीया कुमारी से मुलाकात की थी। इस दौरान घुश्मेश्वर मंदिर के विकास के लिए ज्ञापन भी सौंपा था। इस दौरान मीडिया प्रभारी कुमुद जैन, प्रचार प्रसार मंत्री श्ऌाभू दयाल मिश्रा, संयुक्त मंत्री लोकेंद्र सिंह, कोषाध्यक्ष लल्लू लाल महावर सहित सभी ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने राज्य सरकार का आभार जताया।
घुश्मेश्वर महादेव मंदिर को भगवान शिव के 12वें ज्योतिर्लिंग के रूप में माना जाता है। 900 साल पुराने इस मंदिर का इतिहास बड़ा ही अद्भुत है। मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्व प्राकट्य है। कहते हैं कि घुश्मा नामक एक ब्राह्मणी की शिवभक्ति से खुश होकर शिवजी ने उसके नाम से यहां अवस्थित होने का वरदान दिया था।
ऐतिहासिक तथ्यों के मुताबिक यहां महमूद गजनवी ने भी आक्रमण किया था। गजनवी से आक्रमण करते हुए युद्ध में मारे गए स्थानीय शासक चन्द्रसेन गौड व उसके पुत्र इन्द्रसेन गौड के यहां स्मारक मौजूद है। इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण का भी उल्लेख है।
मंदिर के पास ही अलाउद्दीन खिलजी द्वारा बनाई गई मस्जिद भी इस स्थान की प्राचीनता की पुष्टि करती है। मंदिर के सामने शिवालय सरोवर का भी अलग ही महत्व है। कहते हैं कि घुश्मा प्रतिदिन 108 पार्थिव शिवलिंगों का पूजन कर इस तालाब में विसर्जित करती थी। इसका प्रमाण सालों पहले इस तालाब की खुदाई के दौरान मिले हजारों शिवलिंगों से भी मिलता है।
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Updated on:
06 Jun 2025 02:36 pm
Published on:
06 Jun 2025 02:32 pm
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