उर्दू से किनारा कर रही सरकार, भर्ती 117 पर 400 की दरकार

बड़ी संख्या में प्रदेश में रिक्त पड़े हैं पद

By: Shubham Mittal

Updated: 08 Dec 2019, 01:30 PM IST

सवाईमाधोपुर. पिछले कई वर्ष से उर्दू विषय के साथ हो रहा भेदभाव अभी थमने का नाम नहीं ले रहा। इस कारण उर्दू विषय की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों में कुंठा की भावना पैदा हो रही है। वे खुद को निराश व हतोत्साहित महसूस कर रहे हैं। वर्ष 2013 के बाद सरकार ने उर्दू विषय के व्याख्याताओं की एक भी जगह नहीं निकाली, जबकि लगभग हर विषय के व्याख्याताओं की भर्ती दो बार निकल चुकी। विद्यार्थी अब संशोधित विज्ञप्ति जारी करवाकर उसमें उर्दू विषय के व्याख्याताओं की भर्ती निकालने की मांग कर रहे हैं। गौरतलब है कि इस संबंध में उर्दू शिक्षकों की ओर से मुख्यमंत्री के नाम जिला शिक्षा अधिकारी को कई बार ज्ञापन सौंपा जा चुका है।
385 जगह खाली
सरकारी पोर्टल शाला दर्पण के अनुसार अभी राजस्थान में उर्दू विषय के स्कूल व्याख्याताओं के कुल 65 पद रिक्त हैं। अभी कुल पद 428 स्वीकृत हैं। उर्दू विषय के स्कूल व्याख्याताओं के सबसे ज्यादा पद राजसमंद में 11 व बाड़मेर में नौ पद लम्बे समय से रिक्त चल रहे हैं। वहीं उर्दू के वरिष्ठ अध्यापकों के 862 पद मंजूर हैं। इनमे से करीब 385 पद रिक्त चल रहे हैं। तृतीय श्रेणी के उूर्द विषय के शिक्षकों के खाली पदों की संख्या तो और भी ज्यादा है।
2013 में 221 पद
कांग्रेस सरकार ने आखिरी बार वर्ष 2013 में उर्दू विषय के स्कूल व्याख्याताओं की भर्ती निकाली थी। पहली विज्ञप्ति में 212 पदों की जगह निकली थीए इसके बाद संशोधित विज्ञप्ति जारी की गई इसमें कुल 221 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। उर्दू के व्याख्याताओं के अनुसार कांग्रेस सरकार ने भर्ती तो निकाल दी। इसके बाद सरकार का कार्यकाल खत्म हो गया। नियुक्ति की प्रक्रिया भाजपा सरकार के कार्यकाल में पूरी हुई। उस समय लगभग सभी विषयों के व्याख्याताओं को जुलाई 2015 में नियुक्ति दे दी गई, लेकिन उर्दू व कुछ अन्य विषय के व्याख्याताओं को 22,23 व 24 फरवरी 2016 को नियुक्ति दी गई।
13 अप्रेल को फिर विज्ञप्ति, उर्दू नहीं
राजस्थान लोक सेवा आयोग ने 13 अप्रेल 2018 को स्कूल व्याख्याताओं की भर्ती निकाली थी। कुल बीस विषयों के करीब पांच हजार पदों पर भर्ती निकाली थी, लेकिन इनमें एक भी पद उर्दू व्याख्याता का नहीं है। इससे पहले 16 अक्टूबर 2015 को भी राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से स्कूल व्याख्याताओं के 13 हजार 98 पदों पर भर्ती निकाली गई थी, तब भी उर्दू विषय की एक भी भर्ती नहीं निकाली थी।
सितम्बर2019 में दुबारा जारी की विज्ञप्ति
राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से सितम्बर 2019 में विज्ञप्ति को संशोधित कर पुन: जारी किया गया। लेकिन इसमें भी कुल 117 पद ही उर्दू के दिए गए। जबकि प्रदेश भर में उर्दू के 385 से अधिक पद रिक्त हैं।
शाला दर्पण के रिकॉर्ड में कमियां
उर्दू शिक्षकों ने बताया कि सरकार के शाला दर्पण पोर्टल के रिकॉर्ड में भी खामियां है। शिक्षकों का आरोप है कि सरकार की ओर से पोर्टल पर प्रदेश भर के उर्दू के रिक्त पदों की भी पूरी जानकारी नहीं अपलोड की जा रही है।
ये है मुख्य मांगे....
- प्रदेश में 400 पदों पर भर्ती हो।
- स्टाफिंग पैटर्न में उर्दू के जाो पद समाप्त किए उन्हें पुन सृजित करें।
- तृतीय भाषा को स्टाफि ंग पैर्टन से बाहर करें।
- जिला स्तर पर अल्प भाषा प्रकोष्ठ का गठन हो।
कहां- कहा है कमी
प्रारंभिक शिक्षा में सवाईमाधोपुर ब्लॉक में खादखुर्द, नसिया, खैरदा, बौंली में उप्रावि ढाण्ी खिरनी,गंगापुर सिटी में नबिया का बाड राप्रावि,राप्रावि सपेरा बस्ती , राबाप्रावि माहनदपुर डोडा, बामनवास में सरकारी यूपीएस बेरखण्डी विद्यालय इसी प्रकार सेकेण्डरी में रामावि फसलसावटा,रामावि पीलवा नदी,रामावि गौगेर में 95 प्रतिशत तक उर्दू बहुल्य विद्यार्थी होने के बाद भी शिक्षक नहीं हैं।
जिलेवार स्कूलों में स्थिति...
जिला रिक्त पद उर्दू व्याख्याता
सवाईमाधोपुर 02
अजमेर 02
बांसवाड़ा 01
बारां 03
बाड़मेर 09
भरतपुर 03
बीकानेर 03
बूंदी 01
चूरू 05
डूंगरपुर 02
जैसलमेर 01
जालोर 03
झालावाड़ 03
जोधपुर 02
कोटा 01
पाली 03
राजसमंद 11
सीकर 01
सिरोही 03
उदयपुर 06
कुल 65
.........
स्कूल व्याख्याता भर्ती. 2018
विषय पद
भूगोल 782
अर्थशास्त्र 129
पंजाबी 15
राजस्थानी 06
लोकप्रशासन 05
समाजशास्त्र 32
चित्रकला 40
संगीत ्06
इतिहास 613
वाणिज्य 118
जीव विज्ञान 166
रसायन 160
गृह विज्ञान 54
हिन्दी 849
राजनीति विज्ञान 815
भौतिक 187
कृषि 370
गणित 193
अंग्रेजी 304
संस्कृत 156
कुल 5000
..........
इनका कहना है....
सरकार की ओर से स्टाफिंग पैर्टन के आधार पर विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर उर्दू शिक्षकों की भर्तियां जारी की है। यह विद्यालयों में उर्दू के विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर हैं।
- रामखिलाड़ी बैरवा, माध्यमिक, जिला शिक्षा अधिकारी,सवाईमाधेापुर।
सालों से उर्दू विषय के शिक्षकों की उपेक्षा की जा रही है। प्रदेश भर में उर्दू के बड़ी संख्या में पद रिक्त है। सरकार ने अपनी कमियां छुपाने के लिए पोर्टल पर भी अधूरी जानकारी अपलोड कर रखी है।
- मोइन खान, जला संयोजक राजस्थान उर्दू संघर्ष समिति।

Patrika
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