समय से पहले पहुंच गई पार्क में जिप्सी,बाघ पर्यावास में ले जा रहे पर्यटक

रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के जोन चार में मंगलवार को सुबह करीब पांच बजे एक जिप्सी पार्क में पहुंच गई....

By: rakesh verma

Published: 25 Apr 2018, 07:55 PM IST

सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान के जोन चार में मंगलवार को सुबह करीब पांच बजे एक जिप्सी पार्क में पहुंच गई। इतना ही नहीं वहां सिंहद्वार पर ड्यूटी पर तैनात एक वनकर्मी से उन्हें जोन चार के प्रवेश द्वार पर लगी चेन के ताले की चाबी उपलब्ध कराने के बादजिप्सी चालक पर्यटकों को लेकर जोन चार के आडी डगर में पहुंचा। जबकि नियमानुसार पार्क भ्रमण के दौरान पहली पारी में सुबह साढ़े छह बजे पर्यटक वाहनों (जिप्सी-कैंटरों) के प्रवेश का समय निर्धारित कर रखा है। उसके बाद भी वनाधिकारी व वनकर्मियों की अनदेखी के चलते समय से पहले पार्क भ्रमण कराया जा रहा है। इससे उनके हौसले बुलंद है।


जीपीएस सिस्टम पर खड़े हुए सवाल
वनाधिकारियों ने पार्क भ्रमण के लिए पंजीकृत वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगा रखा है। ऐसे में इस प्रकार समय से पूर्व पार्क में जिप्सी जाने पर जीपीएस सिस्टम में पता चल जाता है। रात तक वनाधिकारियों को इस बारे में पता नहीं चला। इससे जीपीएस सिस्टम पर सवालिया निशान लग रहे हैं।

वनकर्मी उपलब्ध कराते हैं जोन के चेन की चाबी
रणथम्भौर पार्क में दस जोन बना रखे है। ऐसे में प्रत्येक जोन की सीमा का निर्धारण कर रास्ता बंद कर रखा है। उस रास्ते पर दोनों ओर एंगल लगाकर चेन लगा ताला रखा है। इस ताले की चाबी संबंधित ड्यूटी वनकर्मी पर रहती है। ऐसे में वनकर्मी उन्हें चाबी उपलब्ध कराते हैं। इतना ही नहीं कई वनकर्मियों ने जिप्सी चालकों व गाइडों को उनकी डुप्लीकेट चाबी बना कर दे रखी है। इससे उनके पास चाबी रहती है। ऐसे में वे कभी भी कोई से भी जोनमें प्रवेश कर जाते है।

आखिर कैसी मिली जोन के गेट की चाबी
रणथम्भौर पार्क में भ्रमण के दौरान प्रवेश करने का समय सुबह साढ़े छह बजे निर्धारित कर रखा है। इसके अलावा सिंहद्वार तक जाने के लिए गणेश धाम पर बेरिअर व गणेश दुर्ग के सामने मुख्य प्रवेश द्वार पर जांच होने के बाद पर्यटक वाहनों को पार्क में प्रवेश की अनुमति मिलती है। इन दोनों जगहों पर स्टाफ तैनात रहता है। इसके अलावा जोन में प्रवेश करने के लिए जोन के गेट पर चेन लगाकर ताले लगा रखे हैं। इतना इंतजाम होने के बाद एक जिप्सी सुबह पांच बजे जोन चार मेंं प्रवेश कर गई। ऐसे में जिप्सी चालक व गाइड को गेट की चाबी कैसे मिली। यह एक प्रश्न बना हुआ है।

शिकार के पास सटा दी जिप्सी
जोन चार में आडी डगर क्षेत्र में टीले पर बाघिन टी-19 ने हिरण का शिकार कर रखा था। उसके साथ शिकार के दौरान शावक भी थे। जिप्सी चालक ने नियमों को दरकिनार कर शिकार के ठीक नीचे कुछ कदम की दूरी पर जिप्सी लगा दी। वे घंटों वहीं पर खड़े रहे। शिकार के दौरान बाघिन डिस्टर्ब होने पर उन पर हमला भी कर सकती थी। ऐसा यह पहला मामला नहीं है। यहां रोजाना ही बाघ-बाघिन की साइटिंग के दौरान पर्यटक नियमों को दरकिनार करते है। वे बाघ पर्यावास में जिप्सी ले जाते है। इससे वन्य जीव डिस्टर्ब हो रहे हंै।

मामले की जांच करते हैं...
पार्क में सुबह साढ़े छह बजे पहले कोई पर्यटक वाहन नहीं जा सकता है। यह नियम के विरूद्ध है। सुबह पांच बजे पार्क में वाहन जाने के जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो जिप्सी के जीपीएस सिस्टम की जांच करा सच्चाई का पता करेंगे। दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।
अजीत सक्सेना, उप वन संरक्षक, पर्यटन, रणथम्भौर बाघ परियोजना सवाईमाधोपुर।

rakesh verma Bureau Incharge
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