संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में कृष्ण-रूक्मिणी विवाह प्रसंग सुनाया

संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में कृष्ण-रूक्मिणी विवाह प्रसंग सुनाया
कथा व कृष्ण के विवाह

Vijay Kumar Joliya | Publish: Jan, 25 2018 10:02:38 PM (IST) Sawai Madhopur, Rajasthan, India

साकेत नगर में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में शास्त्री ने कंस के पूर्व जन्म की कथा व कृष्ण के विवाह

सवाईमाधोपुर. साकेत नगर में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में बुधवार को कथा वाचक कैलाश नारायण शास्त्री ने कंस के पूर्व जन्म की कथा व कृष्ण के विवाह का प्रसंग सुनाया। आयोजन से जुड़े बत्तीलाल गुर्जर ने बताया कि इस दौरान कथावाचक ने कहा कि श्रद्धा भाव से ही ईश्वर की प्राप्ति होती है। इस दौरान कृष्ण राधा की सजीव झांकियां भी सजाई गई। इस दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

देव वांदरा में वार्षिक मेला आज से
बाटोदा. खेड़ा बाढ रामगढ मुराड़ा गांव में गुरुवार से वार्षिक मेले का आयोजन होगा। आयोजन समिति के सदस्य दिनेश मीना बिंजारी ने बताया कि 25 जनवरी से शुरू होने वाला वार्षिक मेला 28 जनवरी तक लगेगा। इसमें 25 व 26 जनवरी को पद दंगल एवं 27 व 28 को पुरुष सुड्डा दंगल कार्यक्रमों का आयोजन होगा। साथ ही मेले के उद्घाटन व समापन पर क्षेत्रीय विधायकों के साथ-साथ कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर देव वांदरा विकास समिति कार्यकारिणी की बैठक होगी। इसमें वर्ष भर के आय व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत करने के साथ ही कार्यों की समीक्षा की जाएगी। मीना ने बताया कि इस बार मीणापाड़ा गांव के सर्व समाज के लोगों को मेला व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है।

लोककथा : तेरी दुनिया
एक बार एक हंस किसी समुद्र से उड़कर दूसरे समुद्र की ओर जा रहा था। रास्ते में थककर वह एक कुएं के किनारे बैठ गया। उस कुएं में एक मेढक था। मेढक ने पूछा- 'भाई! तुम कौन हो, कहां से आए हो?Ó हंस ने जवाब दिया- 'मैं समुद्र किनारे रहने वाला एक पक्षी हूं और मोती चुनकर खाता हूं।Ó यह सुनकर मेढक ने पूछा- 'समुद्र कितना बड़ा है?Ó हंस ने कहा- 'बहुत बड़ा है।Ó मेढक ने थोड़ी दूर पीछे हटकर कहा- 'इतना बड़ा होगा।Ó उसने कहा- 'नहीं-नहीं बहुत बड़ा।Ó मेढक ने थोड़ा-सा और बड़ा चक्कर लगाकर पूछा- 'इतना बड़ा?Ó हंस ने कहा- 'नहीं, इससे भी बहुत बड़ा।Ó मेढक ने अब की बार सारे कुएं का चक्कर लगाकर कहा- 'क्या इतना बड़ा है?Ó हंस ने कहा- 'समुद्र, तुम्हारी सोच से भी बहुत बड़ा है। वह तुम्हारे इस चक्कर में नहीं समा सकता।Ó यह सुनकर मेढक गुस्से में आ गया। बोला- 'तू झूठा है, बेईमान है। हवाई बातें करता है। मुझे मूर्ख समझ रहा है। इससे बड़ा कुछ हो ही नहीं सकता।Ó हंस ने हंस कर कहा- 'हां भाई, तेरी दुनिया इस कुएं तक है। गलती मेरी ही है।

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