मकानों की फसल से मकान मालिक हो रहे मालामाल

मकानों की फसल से मकान मालिक हो रहे मालामाल

Ravi Mathur | Publish: May, 18 2018 11:10:18 AM (IST) Sawai Madhopur, Rajasthan, India

किराएदारों के सत्यापन पर नहीं है ध्यान
अब तक केवल 250 ने दी पुलिस को सूचना

गंगापुरसिटी. शहर में लहलहा रही मकानों फसल से मकान मालिक मालामाल तो हो रहे हैं, लेकिन उनके यहां रह रहे किराएदारों के बारे में पुलिस को जानकारी नहीं दी जा रही। जबकि नियमानुसार किराएदारों का सत्यापन जरूरी है।
इस मामले में न तो पुलिस सख्ती बरत रही और न ही मकान मालिक गम्भीर हैं, जबकि हालात ये हैं कि शहर के हर मकान में किराएदार मिल जाएंगे।

दरअसल में अपराधों की रोकथाम के मद्देनजर पुलिस की अनदेखी के चलते किराएदारों के सत्यापन की कवायद सिरे नहीं चढ़ रही है। ना तो मकान मालिक किराएदारों का सत्यापन कराने में रूचि ले रहे हैं और ना ही पुलिस की ओर से सख्ती की जा रही है। इसीका नतीजा है कि सात माह के दौरान कोतवाली थाना पुलिस को करीब ढाई सौ किराएदारों के बारे में ही सूचना मिली है, जबकि शहर में बड़ी संख्या में किराएदार
रहते हैं।

 

चोरी व अन्य अपराधों को देखते हुए पुलिस ने बाहर से आकर रहने वाले लोगों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की थी। मकान मालिकों से निर्धारित प्रपत्र में किराएदारों के बारे में सूचना मांगी गई थी। प्रारंभ में कुछ मकान मालिकों ने सूचना उपलब्ध कराई। बाद में कार्रवाई ठण्डे बस्ते में चली गई। गौरतलब है कि शहर में शैक्षणिक संस्थाओं व कोचिंग के चलते बड़ी संख्या में बाहर से विद्यार्थी आकर किराए के मकानों में रहते हैं। सरकारी व निजी क्षेत्र में रोजगार करने वाले भी किराएदार के रूप में रहते हैं।

 


यह जानकारी देनी है
किराएदारों के सत्यापन के लिए प्रपत्र निर्धारित है। इसके अनुसार मकान मालिक का नाम, पता व व्यवसाय के की जानकारी देनी है। इसके अलावा किराएदार का नाम, उम्र, जाति, स्थायी पता, मोबाइल नम्बर, पूर्व मकान मालिक का नाम, मकान छोडऩे का कारण, किराएदार के कार्यालय का नाम व पता की जानकारी देनी होती है। साथ ही किराएदार के दो पहचान दस्तावेज, आपराधिक प्रकरण दर्ज होने पर उसकी सूचना, किराएदार के वाहन के
नम्बर और नौकर होने पर उसका नाम व पता की जानकारी देनी होती है।


यह है लाभ
पुलिस का मानना है कि किराएदारों का सत्यापन अपराध की रोकथाम में सहायक होगा। किराएदार के बारे में प्राप्त जानकारी का सम्बन्धित थाने से सत्यापन कराया जा सकता है। अपराध प्रवृति का रिकॉर्ड सामने आने पर उस पर पुलिस द्वारा निरन्तर निगरानी रखी जा सकती है। इसके चलते अपराधों में नियंत्रण रखने में पुलिस को सहूलियत होगी।


नहीं ले रहे गंभीरता से
किराएदारों का सत्यापन कराने को मकान मालिक गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इसी का नतीजा है कि लम्बे समय के बाद भी करीब ढाई सौ किराएदारों के बारे में ही सूचना मिली है, जबकि पुलिस की ओर से सीएलजी सदस्यों की बैठक में किराएदारों के सत्यापन को लेकर अपील की जाती है। इसके बाद भी सत्यापन गति नहीं पकड़ सका है।


नहीं ले रहे रूचि
सीएलजी की बैठक में सदस्यों से किराएदारों का सत्यापन में सहयोग की अपील की जाती है। बीट कांस्टेबल भी सम्पर्क करते हैं, लेकिन मकान मालिक सत्यापन के प्रति रूचि नहीं दिखा रहे हैं।
दीपक ओझा, थाना प्रभारी, कोतवाली गंगापुरसिटी।

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