अब किसानों को उम्मीद के मुताबिक मिलेंगे उपज के दाम

Shubham Mittal

Publish: Feb, 15 2018 12:25:00 PM (IST)

Sawai Madhopur, Rajasthan, India
अब किसानों को उम्मीद के मुताबिक मिलेंगे उपज के दाम

अब किसानों को उम्मीद के मुताबिक मिलेंगे उपज के दाम

सवाईमाधोपुर. अब किसानों को उपज के दाम उम्मीद के मुताबिक मिल सकेंगे। अच्छी उपज के बाद अब न तो किसानों को मंडी में जाने की जरूरत पड़ेगी, न किसी बिचौलिया के चक्कर में आने की आवश्यकता होगी। यहीं किसान के पास संघ स्वयं फल, सब्जियों के खरीदार के लिए आएगा। यह सब संभव होगा नाबार्ड से। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक(नाबार्ड) की ओर से आर्थिक सहायता से सवाईमाधोपुर जिले में एक हजार किसानों के नौ किसान उत्पादक संगठनों का निर्माण किया जाएगा। इन किसान उत्पादकों के माध्यम से जिले में चल रही नाबार्ड की वाड़ी विकास परियोजनाओं के तहत लाभान्वित आदिवासी किसानों को जोड़ा जाएगा।

इससे काश्तकारों के कृषि उत्पाद के विपणन की समस्याओं का समाधान किया जा सकेगा। इसके लिए नौ किसान उत्पादक संगठनों के निर्माण का प्रस्ताव राजस्थान बाल कल्याण समिति की ओर से जयपुर नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय को स्वीकृति के लिए भेजा गया है। जिले में प्रस्तावित नौ किसान उत्पादक संगठनों का निर्माण फलों व सब्जियों के लिए प्रसंस्करण इकाई व उनके विपणन के लिए किया जाएगा। नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से स्वीकृति के बाद किसान उत्पादक संगठन निर्माण एवं पंजीकरण कार्य त्वरित गति से शुरू किया जाएगा।

इसलिए पड़ी जरूरत : किसान उत्पादक संगठन का मुख्य उद्््देश्य अपने स्वयं के संगठन के माध्यम से किसान उत्पादकों के लिए बेहतर आय सुनिश्चित करना है। बड़े पैमाने पर अपने उत्पादों का आर्थिक लाभ पाने के लिए लघु व सीमांत उत्पादकों के पास व्यक्तिगत रूप से आदानों व उत्पादन दोनों नहीं है। इसके अलावा कृषि विपणन में मध्यस्थों की एक लम्बी श्रृंखला होती है, जो अक्सर गैर पारदर्शी तरीके से काम करते है। इसके कारण उत्पादक केवल उस मूल्य का एक छोटा सा हिस्सा प्राप्त करता है, जो अंतिम उपभोक्ता देता है। एकत्रिकरण के माध्यम से प्राथमिक किसान उत्पादक आर्थिक लाभ उठा सकते है। इससे छोटे काश्तकारों को फायदा मिलेगा।

जिले में 9 सौ किसान कर रहे कार्य
जिले में 9 सौ किसान परियोजना के तहत कार्य कर रहे है। नाबार्ड की ओर से वित्त पोषित आदिवासी किसानों के उत्पादन की महत्वपूर्ण परियोजना वर्ष 2015-16 में शुरू की गई थी। इसमें हर किसान के एक वाड़ी या वाटिका स्थापित की गई है। इसमें फलदार पौधे, सब्जियां एवं आधुनिक तकनीकी ट्रेलिस सिस्टम लगाई गई है। इस परियोजना से आदिवासी किसानों को अब साठ हजार से एक लाख रुपए तक की अतिरिक्त आमदनी होने लगी है। इन किसान उत्पादक संघों के मालिक खुद किसान होंगे। इसमें 2022 तक किसानों की आमदनी 1.50 लाख से 2 लाख रुपए तक हो सकेगी।

ये है किसान उत्पादक संघ के उद्देश्य
यह लघु स्तर के उत्पादकों विशेष रूप से छोटे व सीमांत किसानों के समूहीकरण के उद्देश्य से बनाया गया है, ताकि किसानों के हितों का संरक्षण किया जा सकें। इसमें किसानों को बीज, उर्वरक, मशीनों की आपूर्ति, मार्केट परामर्श व तकनीकी सहायता देना है। इसी तरह किसानों को प्रशिक्षण, नेटवर्किंग, वित्तीय एवं तकनीकी परामर्श देना, किसानों को ऋण की उपलब्धता एवं बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने के संदर्भ में उन चुनौतियों के समाधान का प्रयास करना है।

स्वामित्व रहेगा सदस्यों के पास
इसमें उत्पादक संगठन का स्वामित्व सदस्यों के पास रहेगा। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक, नाबार्ड, एसएफएसी एवं सरकारी विभाग उत्पादक संगठन बनाने के लिए उत्पादक संगठन बनाने वाली संस्थाओं जैसे गैर सरकारी संस्थान, व्यक्तिगत व अन्य संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

बनाए जाएंगे किसान उत्पादक संघ
जिले में जल्द ही ९ किसान उत्पादक संघ बनाए जाएंगे। इसमें नाबार्ड आर्थिक सहायता प्रदान करेगा। इसमें किसानों को मार्केट से जोड़ा जाएगा। इससे आदिवासी किसानों की आर्थिक दशा सुधरेगा वहीं आजीविका के अवसर बढ़ेंगे।
मखनलाल मीणा, डीडीएम, नाबार्ड, सवाईमाधोपुर

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