पालीघाट में 250 के पार हुई घडिय़ालोंं की संख्या

मध्यप्रदेश से पाली घाट में छोड़े घडिय़ाल 40 घडिय़ाल व 48 कछुए छोडे

By: Shubham Mittal

Published: 08 Dec 2019, 01:10 PM IST

Sawai Madhopur, Sawai Madhopur, Rajasthan, India

सवाईमाधोपुर.चंबल घडिय़ाल अभयारण्य में अब मध्यप्रदेश से भी घडिय़ालों को छोड़ा जा रहा है। गत दिनों एमपी के मुरैना से मध्यप्रदेश व सवाईमाधोपुर की सीमा पर स्थित पाली घाट में मध्यप्रदेश वन विभाग की ओर से 40 घडिय़ाल व 48 कछुए छोड़े गए। अब चंबल के पाली घाट में घडिय़ालों की संख्या 250 से अधिक हो गई है।
पहले 200 से अधिक थी संख्या
पाली घाट क्षेत्र में इस वर्ष घडिय़ालों की संख्या में काफी अधिक इजाफा हुआ है। पिछले वर्ष यहां 60 घडिय़ाल थे, वह संख्या इस वर्ष बढ़कर 200 से अधिक हो गई थी। वर्तमान में क्षेत्र में 250 से अधिक घडिय़ाल है। इस साल पाली घाट में करीब 150 घडिय़ालों का जन्म हुआ है।
300 घडिय़ालों का हुआ जन्म
पाली घाट से कोटा, धौलपुर रेंज के बीच घडिय़ालोंं के कुनबे में वृद्धि हुई है। 2017 में यह आंकड़ा करीब साढ़े पांच सौ था । 2018 में यह आंकड़ा 600 तक पहुंचा। जो अब बढ़कर 900 से अधिक हो गया है। वन अधिकारियों ने बताया कि पालीघाटए बागौराए मण्डरायल व धौलपुर में घडिय़ाल पाए जाते हैं। जबकि कोटा में मगरमच्छ पाए जाते हैं। वर्तमान में सबसे अधिक घडिय़ाल पाली घाट में हैं।अब वन विभाग की ओर से जनवरी में फिर से घडिय़ालों की गणना कराई जाएगी।
हाड़ौती में बुरे हाल
चंबल अभयारण्य का सबसे बड़ा क्षेत्र हाड़ौती संभाग में है। यहां रंगपुर घाट से पाली घाट तक व कोटा बैराज से भैंसरोडगढ़ तक अभयारण्य का क्षेत्र है। यहां मगरमच्छ तो हैं लेकिन घडिय़ाल नहीं हैं। वहीं कोटा में पूर्व में घडिय़ाल प्रजनन केन्द्र स्थापित किया गया था। जहां घडिय़ालों के अण्डे लाकर उनके बच्चों को बड़ा किया जाता थाए लेकिन यह केन्द्र भी करीब तीस साल पहले बंद हो गया। सवाईमाधोपुर के अधिकारियों ने एमपी के अधिकारियों से घडिय़ालों को कोटा चंबल क्षेत्र में छोडऩे का आग्रह किया था लेकिनपालीघाट में संरक्षण व संवर्धन की अधिक संभावना होने के कारण इन्हें पालीघाट में छोड़ा गया।
मुरैना के प्रजनन केन्द्र में पाला था
पालीघाट में छोड़े गए घडिय़ालों को एमपी के मुरैना स्थित घडिय़ाल प्रजनन केन्द्र में पाला गया था। यहां घडिय़ालोंं के अण्डो का संवर्धन करके घडिय़ालों का कुनबा बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे है। लेकिन वहां पर पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण अब घडिय़ालों को पालीघाट इलाके में छोड़ा गया है।
एक नजर में चम्बल अभयारण्य
1978 में हुई थी राष्ट्रीय चम्बल घडिय़ाल अभयारण्य की स्थापना
5400 वर्ग किमी क्षेत्र में है फैला
400 किमी लम्बी चंबल नदी है कोर एरिया में
03 राज्यों से होकर गुजरता है अभयारण्य
घडिय़ालोंं के आंकड़ों का गणित
550 घडिय़ाल थे अभयारण्य में 2017 में
600 घडिय़ाल थे अभयारण्य में 2018 में
850 घडिय़ाल है अभयारण्य में 2019 में
40 घडिय़ाल थे पालीघाट में 2017 में
50 घडिय़ाल थे पालीघाट में 2018 में
250 घडिय़ाल है पालीघाट में 2019 में
150 घडिय़ालों का इस वर्ष हुआ जन्म
इनका कहना है...
एमपी से पालीघाट में 40 घडिय़ालों को छोड़ा गया है। पिछले कुछ सालोंं से पाली घाट में घडिय़ालों की संख्या में इजाफा हुआ है। यह घडिय़ालों के संवर्धन की दिशा में अच्छी खबर है।
- तुलसीराम मीणा, रेंजर पाली घाट, चंबल घडिय़ाल अभयारण्य, सवाईमाधोपुर।

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